
वाशिंगटन. आमतौर पर स्वच्छता स्वास्थ्य के लिए बेहतर और गंदगी को बुरा माना जाता है, लेकिन संभवत: पहली बार वैज्ञानिकों ने गंदगी को अत्यधिक स्वच्छता से बेहतर बताया है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) पर किए गए अध्ययन में यह चौंकाने वाली थ्योरी सामने आई है। शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष स्टेशन की सतह से 803 नमूने लिए, जिनका पृथ्वी पर आकर अध्ययन किया गया, जिसमें पाया कि सूक्ष्मजीवों के मामले में आइएसएस इतना बंजर है कि अंतरिक्ष यात्रियों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। क्योंकि यहां मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले पर्यावरणीय सूक्ष्मजीवों की नितांत कमी है, जिन्हें ्रप्रतिरक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद माना जाता है। जैव विविधता की इस कमी के चलते अंतरिक्ष यात्रियों को अक्सर चकत्ते, ठंड में होने वाले घाव, फंगल संक्रमण और दाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों को लाया जाए
शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि मामूली गंदगी से यहां सूक्ष्मजीव पनपते हैं तो ऐसा किया जाना चाहिए। इससे यात्रियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। शोध पत्र के सह लेखक कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के रोडोल्फो सालिडो ने कहा, भविष्य में किसी भी कृत्रिम वातावरण में विविध सूक्ष्मजीवों से पारिस्थितिक तंत्र विकसित करने से सेहत संबंधी जोखिम को टाला जा सकता है। इसमें अंतरिक्ष स्टेशन भी हैं।
आइएसएस के नमूनों में क्या मिला
शोधकर्ताओं ने आइएसएस की सतह से लिए 803 नमूनों के विश्लेषण में देखा कि इनमें जीवाणु की कौनसी प्रजाति और रसायन मौजूद था। अध्ययन में पाया कि पूरे आइएसएस पर इंसानी त्वचा ही सूक्ष्मजीवों का मुख्य स्रोत थी। हालांकि भोजन और भोजन तैयार करने वाले क्षेत्रों में भी सूक्ष्मजीव थे। इसके अलावा वहां शौचालय में भी कुछ प्रजातियां थीं। कुल मिलाकर शोधकर्ताओं ने पाया कि पृथ्विी के ज्यादातर नमूनों की तुलना में अंतरिक्ष स्टेशन पर पर्यावरणीय सूक्ष्मजीवों की कमी थी, जो आमतौर पर मिट्टी और पानी में पाए जाते हैं। ये प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी हैं।
Published on:
02 Mar 2025 12:02 am
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