
दिल्ली पुलिस ने ओडिया समाज ट्रस्ट कार्यालय में 25 लाख लूट का खुलासा किया।
Robbery Case in Delhi: अपराधी चाहे जितना शातिर हो, कुछ न कुछ सुराग तो छोड़ ही देता है। यह लाइनें दिल्ली की उस लूट की वारदात में बिल्कुल फिट बैठ गईं, जिसे आरोपियों ने बेहद शातिराना अंदाज से अंजाम दिया था। दरअसल, अपराध पर बनने वाले धारावाहिक क्राइम पेट्रोल से सीखकर दिल्ली में एक युवक ने लूट की वारदात के लिए योजना तैयार की। इसके लिए सबसे पहले उसने अपना टारगेट सेट किया। इसमें उसके दोस्त ने मदद की। इसके बाद दोनों ने मिलकर लूट की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान कोई भी सुराग नहीं छोड़ा, लेकिन पुलिस ने 11 दिनों में 40 लोगों से पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के बाद आरोपियों को धर दबोचा। इसके बाद आरोपियों ने जो कहानी बताई, उसे सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि दोनों दोस्तों ने क्राइम पेट्रोल देखकर दिल्ली के आरके पुरम स्थित ओडिया समाज ट्रस्ट के दफ्तर को निशाना बनाया। पकड़े गए आरोपियों में से एक ओडिया समाज ट्रस्ट में बतौर चालक काम करता था। दोनों ने बड़े शातिराना अंदाज में 25 लाख रुपये लूट की वारदात को अंजाम दिया, लेकिन एक छोटी सी भूल कर बैठे, वही भूल पुलिस को आरोपियों तक ले गई। घटना 23 सितंबर की है।
11 दिनों तक 40 लोगों से गहन पूछताछ और सीसीटीवी के विश्लेषण के बाद तीन अक्टूबर को दिल्ली की सरोजनी नगर थाना पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 23 लाख 50 हजार रुपये की नकदी बरामद की। साथ ही अलमारी काटने के लिए इस्तेमाल किया गया कटर भी मिला है। दोनों आरोपियों की पहचान राजेंद्र कुमार और राजेश कुमार के रूप में हुई है। दोनों दिल्ली के ही रहने वाले हैं। इनमें से राजेंद्र कुमार एनजीओ में बतौर चालक काम करता है।
डीसीपी अमित गोयल ने बताया "23 सितंबर को सरोजनी नगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि आरकेपुरम स्थित ओडिया समाज ट्रस्ट के कार्यालय में अलमारी काटकर 25 लाख रुपये चोरी किए गए हैं। सूचना पर सरोजनी नगर थाना प्रभारी अतुल त्यागी और एएसआई नरेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को मौके पर ओडिया समाज ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक एसएमएस दास की बेटी जेआर दास मिलीं। उनकी तहरीर पर एसएचओ अतुल त्यागी ने लूट की धाराओं में केस दर्ज किया और मामले की छानबीन शुरू की गई। छानबीन के दौरान एसआई दीपक और एएसआई नरेंद्र कुमार की टीम ने करीबन 11 दिन तक 40 लोगों से पूछताछ की। साथ ही 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया गया।"
डीसीपी ने बताया कि इसी बीच एएसआई नरेंद्र कुमार को एक ऑटो में संदिग्ध दिखाई दिए। जो एनजीओ कार्यालय में प्रवेश करते समय और बाद में ऑटो के अंदर वेश बदल रहे थे। ऑटो रिक्शा में उन्होंने टोपी पहनी, गर्दन पर तौलिया डाला और हाथों में दस्ताने पहने। ऑटो रिक्शा के नंबर की मदद से पुलिस ऑटो चालक तक पहुंची। ऑटो चालक ने पूछताछ में बताया कि उसने दोनों युवकों को नेताजी नगर में छोड़ा था। इसके बाद पुलिस ने नेताजी नगर में लगे सीसीटीवी चेक किए।
इसमें एक आरोपी राजेंद्र कुमार की पहचान हो गई। तीन अक्टूबर को पुलिस ने राजेंद्र कुमार को गोल चंबारी के पास धर दबोचा। पहले तो राजेंद्र ने टाल मटोल किया, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती बढ़ाई तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। साथ ही अपने दूसरे साथी की पहचान भी बता दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी की रकम बरामद कर ली।
Published on:
04 Oct 2025 12:51 pm
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
