
मार्च छोड़कर बर्गर खाते CJP प्रवक्ता विजेता दहिया | फोटो सोर्स- X(@manojshukla938)
CJP Protest Video: दिल्ली की सड़कों पर जब आंदोलनकारी युवा पुलिस की लाठियां खा रहे थे, ठीक उसी वक्त आंदोलन का एक बड़ा चेहरा रेस्टोरेंट में बैठकर बर्गर का स्वाद ले रहा था। जी हां, 'संसद मार्च' के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजेता दहिया का बर्गर खाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद से ही प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच भारी नाराजगी है और लोग पूछ रहे हैं कि 'जब जनता सड़क पर पिट रही थी, तब नेता जी मार्च छोड़कर रेस्टोरेंट में क्या कर रहे थे?' अब इस पूरे बवाल पर खुद विजेता दहिया ने सामने आकर सफाई दी है। दहिया ने कहा कि दो रात से सोया नहीं था, भूख लगी तो बर्गर खा लिया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, क्या प्रदर्शनकारी भूखा मर जाए?
CJP की अपील पर हजारों युवा अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर कूच कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। प्रदर्शन के बीच युवाओं को अपने बड़े नेताओं की कमी खली। मार्च की शुरुआत करने वाले अभिजीत दीपके जहां जंतर-मंतर पर ही रुके रहे, वहीं विजेता दहिया पूरे प्रदर्शन से गायब दिखे। इसी बीच उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह रेस्टोरेंट में आराम से बर्गर खाते दिखे। वीडियो में कुछ लोग उनसे मार्च छोड़कर गायब होने पर सवाल भी पूछ रहे हैं, जिस पर वह चुप रहें।
इस पूरे विवाद पर एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में विजेता दहिया ने अपनी अनुपस्थिति का कारण बताया। दहिया ने कहा कि मैं दो रातों से धरना स्थल पर ही था। जब मार्च शुरू हुआ, तो मैं उसमें शामिल भी हुआ। वहां पुलिस ने इंटरनेट पूरी तरह बंद कर रखा था। मैंने प्रदर्शनकारियों से पहले ही कहा था कि बैरिकेड के ऊपर से न कूदें। इसके बाद मुझे लगा कि मार्च पूरा हो गया है, तो मैं नहाने-धोने के लिए घर चला गया, ताकि रात को दोबारा जरूरत पड़ने पर वापस आ सकूं। जो लोग कभी आंदोलन में नहीं आए, वही इसे बड़ा मुद्दा बना रहे हैं।
अपने इंस्टाग्राम पर एक और वीडियो शेयर करते हुए विजेता दहिया ने आलोचकों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोई इंसान बर्गर क्यों खाता है? क्योंकि उसे भूख लगती है। मैं दो रात से सोया नहीं था और मुझे कुछ अच्छा खाने का मन था। अगर कोई आम इंसान खाए तो दिक्कत नहीं, लेकिन कोई सामाजिक काम करने वाला बर्गर खाते हुए देश के मुद्दे पर बात करे, तो लोगों को परेशानी होने लगती है। प्रदर्शनकारी बर्गर खा ले या किसान पिज्जा खा ले, तो बवंडर खड़ा कर दिया जाता है।
उन्होंने आगे नाराजगी जताते हुए कहा कि लोग मुझसे ऐसे जवाब मांग रहे हैं जैसे यह मेरी कोई नौकरी हो या उन्होंने मुझे अपॉइंट किया हो। पिछले डेढ़ महीने से मैं आंदोलन में लगा हूं और अपना एक पैसे का काम नहीं कर पाया हूं। जो लोग आंदोलन की भावना को समझते हैं, वे आज भी मुझसे मिलकर छोले-भटूरे खिलाना चाहते हैं।
जब विजेता दहिया से पूछा गया कि क्या यह संसद मार्च सफल रहा? तो उन्होंने कहा कि सही दिशा में बढ़ाया गया हर कदम सही होता है। सफलता को इस बात से नहीं देखना चाहिए कि कोई संसद पहुंच पाया या नहीं। उन्होंने नेताओं पर लाठी न चलने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी टीम के रवित को सिर में चोट आई है और अभिजीत के चेहरे पर स्याही फेंकी गई। दहिया ने दावा किया कि उन्हें भी कुछ लोगों ने घेर लिया था और पिछले डेढ़ महीने से उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
Updated on:
21 Jul 2026 11:40 am
Published on:
21 Jul 2026 11:10 am
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