
Delhi Student Protest 2026 : 'कॉकरोच' के तंज से जन्मी 'जनता पार्टी', (फोटो सोर्स:@JaiBhimMadiga)जिसने हिला दी व्यवस्था
Parliament march India: संसद मार्ग से लेकर कनॉट प्लेस की सड़कों पर पसरा सन्नाटा किसी बड़ी जंग के बाद का मंजर बयान कर रहा है। बिखरे हुए चश्मे, फटे हुए कुर्ते, टूटे हुए बैरिकेड्स और जगह-जगह सड़क पर जमा लाल धब्बे यह सब छात्रों पर हुए उस बर्बर पुलिसिया एक्शन की गवाही दे रहे हैं, जिसने देश की राजधानी को दहला कर रख दिया।
लाखों छात्रों का भविष्य तय करने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की धांधली के खिलाफ जब हजारों छात्र संसद का घेराव करने निकले, तो उन्हें जवाब में मिलीं पुलिस की लाठियाँ और आंसू गैस के गोले। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे 100 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। लेकिन, संसद के मुहाने तक पहुंचे इन छात्रों का साफ कहना है कि "हम झुकेंगे नहीं, हम डिगेंगे नहीं।"
इस पूरे आंदोलन का सबसे रोचक और असरदार पहलू है युवाओं का विरोध दर्ज कराने का अनोखा तरीका। दरअसल, हाल ही में बेरोजगारी और सरकार की आलोचना करने वालों की तुलना 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट्स' से किए जाने वाले एक बयान के जवाब में युवाओं ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का गठन कर लिया।
"हमें कॉकरोच कहा गया? ठीक है, कॉकरोच हर परिस्थिति में जीवित रहने के लिए जाने जाते हैं। हम भी अपनी आवाज दबने नहीं देंगे।"
- अभिजीत दिपके, छात्र नेता (CJP)
सोशल मीडिया पर मीम्स, रील्स और ऑनलाइन अभियानों से शुरू हुआ यह गुस्सा अब जंतर-मंतर पर धधक रहा है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर बैठने के बाद इस प्रदर्शन को और धार मिली है। वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में लिए जाने के बाद यह गुस्सा और भड़क उठा।
भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी (Gen Z) का देश है। बीते कुछ महीनों में NTA द्वारा आयोजित NEET-UG और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में जिस तरह की गड़बड़ियां, फर्जीवाड़े और पेपर लीक के मामले सामने आए, उसने करोड़ों युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है।
20 से अधिक दुखद मौतें: परीक्षा रद्द होने और भविष्य अंधकारमय दिखने के कारण देशभर में दो दर्जन से अधिक प्रतियोगी छात्रों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया।
विपक्ष का हमलाव रुख: राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार पर प्रशासनिक नाकामी का आरोप लगाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो दबाव में आकर कोई भी कदम पीछे खींचने में यकीन नहीं रखते। लेकिन इस बार का गुस्सा राजनीतिक से ज्यादा सामाजिक और युवाओं के सीधे भविष्य से जुड़ा है।
आंदोलनकारियों पर पुलिस ने 5 से अधिक एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं, लेकिन इसके बावजूद मंगलवार की सुबह जंतर-मंतर पर दोबारा हजारों की संख्या में छात्र जमा हो गए। पुलिसिया लाठियां और वॉटर कैनन भी इस 'कॉकरोच सेना' के इरादों को डिगा नहीं पाए हैं। दिल्ली की हवा में भले ही अभी आंसू गैस की चुभन बाकी हो, लेकिन युवाओं की इस हुंकार ने सत्ता के गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
Updated on:
21 Jul 2026 05:48 pm
Published on:
21 Jul 2026 05:43 pm
