
लंदन. ‘मुझे कितनी खुशी और गर्व होगा, जब हम दोनों मिलकर सापेक्ष गति के साथ विजयी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। मैं जानता हूं कि सभी लोगों में से तुम मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती हो, मुझे सबसे अच्छी तरह समझती हो।’ यह उस चिट्ठी का हिस्सा है, जो महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी पूर्व पत्नी मिलेवा मैरिक को करीब सवा सौ साल पहले लिखी थी। तब उनकी शादी नहीं हुई थी। चिट्ठी में मिलेवा के लिए जगह-जगह ‘माय डॉक्सल’ (मेरी गुडिय़ा) का संबोधन है। यह आइंस्टीन की उन 43 निजी चिट्ठियों में शामिल है, जो उन्होंने 1898 से 1903 के बीच मिलेवा को भेजी थीं। इनकी 11 दिसंबर को लंदन में नीलामी होने वाली है।
ये चिट्ठियां तब लिखी गई थीं, जब आइंस्टीन ऑस्ट्रिया के बर्न में संघीय पेटेंट कार्यालय में काम कर रहे थे। यहीं उन्होंने सापेक्षता के विशेष सिद्धांत की रचना शुरू की। सिद्धांत के बारे में उनका झुकाव चि_ियों में भी झलकता है। मिलेवा वैज्ञानिक के साथ गणितज्ञ भी थीं।कुछ विद्वान कहते हैं कि मिलेवा ने आइंस्टीन के शुरुआती चार रिसर्च पेपर्स तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
16 साल चली शादी
आइंस्टीन और मिलेवा ने 6 जनवरी, 1903 को शादी की थी। दोनों के तीन बच्चे हुए। रिश्तों में तनाव के बाद पति-पत्नी अलग रहने लगे थे। उनका 1919 में तलाक हो गया। उस समय जर्मनी में तलाक से पहले पांच साल तक अलग रहने का कानून था।
जो वादा किया, निभाया
आइंस्टीन ने मिलेवा से वादा किया था कि अगर वह कभी नोबेल पुरस्कार जीतते हैं तो इसकी सारी रकम मिलेवा को दे देंगे। तलाक के दो साल बाद 1921 में आइंस्टीन को नोबेल मिला। उन्होंने वादे के मुताबिक सारी रकम मिलेवा को सौंप दी।
Published on:
07 Dec 2024 01:19 am
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