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पूजा व्यक्ति की नहीं, गुणों की होनी चाहिएः आचार्य सुनील

- महान व्यक्तियों के स्वभाव में तरलता होती है

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पूजा व्यक्ति की नहीं, गुणों की होनी चाहिएः आचार्य सुनील

पूजा व्यक्ति की नहीं, गुणों की होनी चाहिएः आचार्य सुनील

नई दिल्ली। प्रसिद्ध जैन संत आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि पूजा व्यक्ति की नहीं, गुणों की होनी चाहिए। हर गृहस्थ को प्रतिदिन ईश्वर की अराधना करनी चाहिए, क्योंकि गुणों का खजाना इस सृष्टि में जगत के समस्त जीवों में भरा हुआ है। गुणों की पहचान ईश्वर के माध्यम से होती है।

आचार्य सुनील सागर ने यहां प्रवचन के दौरान शनिवार को कहा कि इंसान रूप नहीं बल्कि उसके गुणों के कारण पूजा जाता है। रूप तो आज है, कल नहीं, लेकिन गुण जब तक जीवन है तब तक और मरने के बाद भी जिंदा रहते हैं।

उन्होंने कहा कि संसार में किसी भी क्षेत्र में शिखर पर पहुंचना सरल नहीं होता। बात चाहे साहित्य-संस्कृति की हो, कला, व्यवसाय और समाज सेवा की हो या किसी अन्य क्षेत्र की, महानता प्राप्त करने वाले लोग कुछ ऐसे गुणों से ओतप्रोत होते हैं जो सामान्य लोगों में दुर्लभ होते हैं। सबके कल्याण के लिए अपना सर्वस्व लुटाने से भी परहेज नहीं करने का जज्बा ही महान बनाता है। महान व्यक्तियों के स्वभाव में तरलता होती है। प्रतिद्वंद्वियों व विरोधियों की अच्छी बातों को स्वयं अपनाने में भी उन्हें संकोच नहीं होता। ऊर्जा का सही व सकारात्मक प्रयोग करने का गुण ही लोगों को महानता की ओर ले जाता है।