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फर्जी शेयर मार्केट ग्रुप बनाकर ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों से ठगी का जाल

सीमांत जिले में इन दिनों साइबर ठगों ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी का नया तरीका अपनाया है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी शेयर मार्केट ग्रुप बनाए जा रहे हैं। इन समूहों में 60 से 70 तक सदस्य दिखाए जाते हैं, जिनमें अधिकांश ठगों के ही लोग होते हैं।

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केस-1 : जैसलमेर के एक व्यवसायी को सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर मार्केट निवेश से जुड़े एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में करीब 60 से अधिक सदस्य दिखाई दे रहे थे। कई सदस्य लगातार मुनाफे के स्क्रीनशॉट और निवेश के अनुभव साझा कर रहे थे। कुछ दिनों बाद एक आइपीओ में निवेश करने का सुझाव दिया गया। व्यवसायी ने शुरुआत में छोटी राशि लगाई, जिस पर मुनाफा दिखाया गया। भरोसा बढ़ने पर बड़ी राशि निवेश कर दी। कुछ ही दिनों में ग्रुप बंद हो गया और संपर्क भी समाप्त हो गया। तब जाकर ठगी का अहसास हुआ।

केस-2 : शहर एक युवक को टेलीग्राम पर शेयर ट्रेडिंग से जुड़े एक ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में मौजूद सदस्य लगातार बताते रहे कि विशेष शेयर में निवेश करने पर रकम दोगुनी हो जाएगी। युवक को एक लिंक भेजा गया, जहां निवेश करने पर खाते में बढ़ती राशि का आंकड़ा भी दिखाई देता रहा। कुछ दिन बाद जब युवक ने पैसा निकालने का प्रयास किया तो अलग-अलग शुल्क के नाम पर और राशि जमा करने को कहा गया। बाद में प्लेटफॉर्म ही गायब हो गया।

केस-3 : सीमांत क्षेत्र के एक सरकारी कर्मचारी को शेयर मार्केट विशेषज्ञ बताकर एक व्यक्ति ने संपर्क किया। उसे एक निवेश ग्रुप में शामिल किया गया, जहां दर्जनों लोग रोजाना मुनाफे के संदेश भेज रहे थे। कर्मचारी ने भी भरोसा कर निवेश किया। कुछ दिन बाद ग्रुप के अधिकांश सदस्य अचानक निष्क्रिय हो गए और मुख्य संचालक का मोबाइल बंद हो गया। तब समझ आया कि अधिकांश सदस्य फर्जी थे और पूरी योजना ठगी के लिए बनाई गई थी।

सीमांत जिले में इन दिनों साइबर ठगों ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी का नया तरीका अपनाया है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी शेयर मार्केट ग्रुप बनाए जा रहे हैं। इन समूहों में 60 से 70 तक सदस्य दिखाए जाते हैं, जिनमें अधिकांश ठगों के ही लोग होते हैं। इन फर्जी सदस्यों का काम केवल माहौल बनाना होता है। यह लोग लगातार मुनाफे के स्क्रीनशॉट, निवेश सलाह और सकारात्मक अनुभव साझा करते रहते हैं। इससे नए लोग प्रभावित होकर निवेश करने लगते हैं। कुछ समय बाद ग्रुप में आइपीओ या विशेष निवेश अवसर का हवाला दिया जाता है। कम समय में डबल रिटर्न का दावा कर लोगों को बड़ी राशि लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई मामलों में शुरुआत में थोड़ा लाभ दिखाकर भरोसा मजबूत किया जाता है, ताकि पीड़ित अधिक रकम निवेश कर दे। राशि जमा होते ही ठग धीरे-धीरे संपर्क कम कर देते हैं। कुछ समय बाद ग्रुप बंद कर दिया जाता है या निवेशकों को बाहर कर दिया जाता है। इस दौरान नामी कंपनियों के लोगो और मिलते-जुलते नाम वाले क्लोन प्लेटफॉर्म का उपयोग भी किया जाता है, जिससे निवेशकों को धोखे का पता नहीं चलता है।

एक्सपर्ट व्यू: सलाह देने वाले व्यक्ति की विश्वसनीयता की जांच जरूरी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. जालमसिंह राठौड़ के अनुसार सोशल मीडिया पर बने निवेश ग्रुप सबसे बड़ा जोखिम बनते जा रहे हैं। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले संबंधित कंपनी, प्लेटफॉर्म और सलाह देने वाले व्यक्ति की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है। अधिक मुनाफे या कम समय में रकम दोगुनी होने के दावे अक्सर ठगी का संकेत होते हैं। अनजान ग्रुप, संदिग्ध लिंक और अप्रमाणित निवेश योजनाओं से दूर रहें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना देना जरूरी है, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और अन्य लोग भी इस जाल से बच सकें।