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जगन्नाथ पुरी के दर्शन के बाद इस मंदिर के जरुर करें दर्शन, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी यात्रा

जगन्नाथ पुरी के दर्शन के बाद इस मंदिर के जरुर करें दर्शन, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी यात्रा

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Tanvi Sharma

Jul 02, 2018

jagannath

जगन्नाथ पुरी के दर्शन के बाद इस मंदिर के जरुर करें दर्शन, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी यात्रा

हिन्दू धर्म में मंदिरों का बहुत महत्व है। जगन्नाथ पुरी से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर साक्षी गोपाल मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर उड़ीसा प्रांत के प्रसिद्ध शहर पुरी के पास ही बना हुआ है। साक्षी गोपाल मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। मंदिर को लेकर लोगों की धारणा है कि जो श्रद्धालु पुरी में जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करने आएगा उस की यह यात्रा तब ही संपूर्ण होगी जब व्यक्ति साक्षी गोपाल मंदिर के भी दर्शन करेगा। जो भी श्रृद्धालु पुरी में पहुंचकर जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करते हैं उसके बाद वे इस मंदिर में माथा टेकने जरुर जाते हैं। साक्षी गोपाल के दर्शन से पहले हर श्रद्धालु मंदिर के पास बने चंदन के सरोवर में स्नान करते हैं उसके बाद ही दर्शन करते हैं।

काफी रोमांचक है मंदिर से जुड़ी कथा

साक्षी गोपाल मंदिर की खूबसूरती की तारिफ करते ही बनती है, इसकी इमारत बहुत सुंदर और मनोभानव है। जिस तरह मंदिर अद्भुत है उसी तरह उसकी कथा भी काफी रौचक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि एक धनवान ब्राह्मण अपनी आयु के अंतम पड़ाव पर था। तब उसने तीर्थ यात्रा करने के लिए सोचा और वह वृंदावन जाने के लिए चल पड़ा। तभी उस के साथ एक गरीब ब्राह्मण लड़का भी चलने लगा। यह उस समय की बात है जब तीर्थ यात्राएं पैदल करनी पड़ती थी व आपने खाने-पीने की व्यवस्था भी स्वयं को करनी पड़ती थी। जब वे दोनों यात्रा के लिए निकले तब उस गरीब लड़के ने उस बुर्जुग ब्राह्मण की बहुत अच्छी देखभाल की। उस लड़के की सेवा से खुश होकर वृंदावन के गोपाल मंदिर में उस ब्राह्मण ने अपनी कन्या का रिश्ता उस गरीब लड़के से पक्का कर दिया तथा वापस जाकर इस कार्य को पूरा करने का वचन भी दे दिया।

जब वे दोनों पुरी से यात्रा कर लौट रहे थे तब उस ब्राह्मण लड़के ने उस बुजुर्ग ब्राह्मण लड़के को भगवान गोपाल जी के सामने किया वादा याद करवाया। ब्राह्मण द्वारा अपने घर पर यह बात बताने पर परिवार वाले इस रिश्ते से सहमत नहीं हुए और उस गरीब लड़के की इस बात को लेकर बहुत बेइज्जती की। इस बेइज्जती तथा वादा खिलाफी से दुखी हो कर वह लड़का पचांयत के पास गया तो पंचों की ओर से इस बात का सबूत मांगा गया। लड़के ने कहा कि विवाह के वादे के समय गोपाल भगवान वहां मौजूद थे। गरीब लड़के की इस बात से पंचों ने भी खूद हंसी उड़ाई गई। अपने सच को साबित करने के लिए वह लड़का फिर वृदावन पहुंच गया। यहां पहुंच कर उसने भगवान गोपाल जी से अपनी पूरी दर्द कहानी सुनाई तथा हाथ जोड़कर विनती की कि अब आप ही मेरे साथ जाकर पंचायत को सारी बात समझा सकते हैं।

उस गरीब लड़के के इस विश्वास को देखकर गोपाल जी बहुत प्रसन्न हुए और उसके साक्षी यानी गवाह बनने को तौयार हो गए। गोपाल जी ने लड़के से कहा कि तुम आगे-आगे चलना मैं तुम्हारे पीछे चलुंगा और मेरे धुंगरुओं की आवाज़ तुम्हारे कानों तक आती रहेगी। तुम इस दौरान पीछे मुडकर मत देखना वना मैं वहीं स्थिर हो जाउंगा। लड़का मान गया तथा दोनों पूरी की ओर चल पड़े। चलते-चलते जब वह अट्टक के नजदीकी गांव पुलअलसा के पास पहुंचे तो रेतला रास्ता शुरु हो गया लेकिन रेतले रास्ते के कारण घुंगरूओं की आवाज आना बंद हो गई। तभी लड़के ने पीछे पलट कर देखा और गोपाल जी वहीं स्थिर हो गए। अपने भगवान की स्थिरता को देखकर वह लड़का परेशान हो गया पर भगवान जी ने उस लड़के को कहा कि तुम परेशान न हो और जाकर पंचायत को यहां ले आअो। वह गरीब लड़का गया ओर पंचायत को वहां ले आया, जहां गोपाल जी खड़े थे। पंचायत के आने पर गोपाल जी ने वह सारी बात बताई जो की उस धनवान ब्राह्मण ने उस गरीब लड़के से बोली थीं। भगवान गोपाल जी के गवाह बनने से उस गरीब लड़के का विवाह धनवान ब्राह्मण की लड़की से संपन्न हुआ और भगवान गोपाल वहीं समा गए।

तभी से आज तक उनकी याद में यहां साक्षी गोपाल मंदिर बना है। यह इस बात का गवाह है की जो भक्त अपने भगवान पर भरोसा रखते हैं। भगवान भी संकट के समय उनका साथ देते हैं तथा अपना हाथ देकर संकट से उन्हें उभार लेते हैं। इसी के बाद से जगन्नाथ पुरी के दर्शन के बाद यहां दर्शन करना जरुरी माना जाता है।