
After being ahead, the promising and organization leaders are now slacking off, the desire for reward is less visible
हनुमानगढ़. इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में राष्ट्रीय स्तर पर व राष्ट्रपति भवन में विज्ञान का ज्ञान दिखाकर सम्मान पाने में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शुमार रहने वाले हनुमानगढ़ की स्थिति इस साल अब तक चिंताजनक है। विज्ञान आधारित बेजोड़ मॉडल बनाने पर जिले की तीन छात्राओं का गत कुछ बरसों में जापान की यात्रा के लिए भी चयन हो चुका है। इसके बावजूद इंस्पायर अवार्ड मानक योजना सत्र 2024-25 की पंजीयन प्रक्रिया में अब तक संस्था प्रधानों व विद्यार्थियों ने अपेक्षा से बेहद कम रूचि दिखाई है।
हनुमानगढ़ जिला गत कुछ बरसों में पंजीयन व चयन के मामले में प्रदेश में कई बार टॉप थ्री व फाइव में रह चुका है। अब यह हालात हैं कि इस साल अब तक लक्ष्य की तुलना में मात्र पांच प्रतिशत ही नामांकन हुआ है। इससे शिक्षा अधिकारियों की चिंता बढ़ चुकी है। हालांकि कई जगहों पर आमुखीकरण कार्यशाला कराई जा चुकी है। फिर भी हालात ज्यादा नहीं बदले हैं। लक्ष्य के अनुसार पंजीयन नहीं कराए जाने पर संस्था प्रधानों व शिक्षकों को कार्यवाही की चेतावनी दी जा रही है ताकि कोई होनहार विद्यार्थी पंजीयन के अभाव में आगे बढऩे से वंचित नहीं रह जाए।
एडीईओ माध्यमिक रणवीर शर्मा ने बताया कि ई-एमआईएएस पोर्टल पर विद्यार्थियों के आइडिया के पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है। अभी लक्ष्य की तुलना में केवल पांच प्रतिशत ही पंजीयन हुआ है जो बहुत कम है। अत: संस्था प्रधान व शिक्षा अधिकारी अपने ब्लॉक में लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत नामिनेशन करवाया जाना सुनिश्चित करे।
जानकारी के अनुसार जिले के 1770 विद्यालयों को इंस्पायर अवार्ड के लिए नॉमिनेशन प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। प्रत्येक विद्यालय को न्यूनतम पांच विद्यार्थियों के आइडिया का नॉमिनेशन कराने का लक्ष्य दिया हुआ है। इंस्पायर अवार्ड नॉमिनेशन की गति बढ़ाने के लिए पीईईओ को प्रतिदिन न्यूनतम एक विद्यालय एवं यूसीईओ को न्यूनतम 5 विद्यालयों के विद्यार्थियों के पांच-पांच आइडिया अपलोड कराने को कहा गया है।
इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में पंजीयन व आइडिया चयन की बात करें तो प्रदेश पिछले कुछ बरसों से निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। पंजीयन में पिछले पांच-सात साल में राजस्थान टॉप थ्री व फाइव में स्थान बना रहा है। इसी तरह हनुमानगढ़ जिला भी पंजीयन के मामले में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शुमार रहता है। शिक्षा सत्र 2020-21 से लेकर गत शिक्षा सत्र तक आधा दर्जन के करीब विद्यार्थियों का चयन विज्ञान आधारित मौलिक एवं बेजोड़ मॉडल राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी के लिए हो चुका है। जबकि तीन छात्राओं का चयन जापान यात्रा के लिए हो चुका है।
प्रत्येक स्कूल में कक्षा 6 से 10 तक अध्ययनरत 10 से 15 आयु वर्ग के विद्यार्थी शिक्षकों के माध्यम से मौलिक विचारों को वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं। यह पुरस्कार विज्ञान व गणित के ज्ञान पर आधारित है। विद्यार्थी का आइडिया बेजोड़ होने पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग उसे पेटेंट भी कराता है। जिला स्तरीय प्रदर्शनी में शामिल विद्यार्थियों में से दस प्रतिशत का चयन राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के लिए होता है। इस प्रदर्शनी से भी दस फीसदी का चयन राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए किया जाता है। चयनित विद्यार्थी को प्रोजेक्ट में सुधार आदि पर खर्च के लिए 50 हजार रुपए मिलते हैं।
Published on:
26 Aug 2024 12:24 pm
