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अनूपपुर के नवगठित निकायों में हितग्राहियों को नहीं मिल रहे पीएम आवास

अनूपपुर. नवगठित नगर परिषद डोला, बनगवां, डूमरकछार एसईसीएल कॉलरी क्षेत्र में होने के कारण यहां स्थित भूमि कॉलरी द्वारा अधिग्रहित की गई है जिसके कारण यहां रहने वाले लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभिन्न विकास कार्य भी इसकी वजह से प्रभावित हो रहे हैं। तीनों नगर परिषद का […]

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अनूपपुर. नवगठित नगर परिषद डोला, बनगवां, डूमरकछार एसईसीएल कॉलरी क्षेत्र में होने के कारण यहां स्थित भूमि कॉलरी द्वारा अधिग्रहित की गई है जिसके कारण यहां रहने वाले लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभिन्न विकास कार्य भी इसकी वजह से प्रभावित हो रहे हैं। तीनों नगर परिषद का गठन कुछ ही वर्ष पूर्व हुआ है जिसके कारण यह विभिन्न निर्माण कार्य के साथ ही हितग्राही मूलक कार्य प्रस्तावित हंै लेकिन यहां राजस्व की भूमि उपलब्ध न होने के कारण कार्य अटक गए हैं। एसईसीएल और वन भूमि क्षेत्र में तीनों नगर परिषद स्थित हैं। जिसके कारण यहां निजी भूमि तथा राजस्व की भूमि बहुत कम होने से सभी योजना के कार्य प्रभावित हैं। भूमि उपलब्ध में होने के कारण यहां रहने वाले गरीब तथा जरूरतमंद हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। वे वर्तमान में जिस भूमि पर निवासरत हैं वह कॉलरी प्रबंधन की भूमि है। स्वयं की भूमि उपलब्ध न होने से हितग्राही को आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नगर परिषद बनगांव में ऐसे हितग्राहियों की संख्या 1200, डूमर कछार में 400 है तथा डोला में 681 है।

सर्वे कार्य के बावजूद नहीं बन पाई बात

भूमि संबंधी परेशानियों को देखते हुए पूर्व में अनूपपुर कलेक्टर आशीष वशिष्ठ के निर्देश पर राजस्व तथा कॉलरी प्रबंधन की संयुक्त टीम ने तीनों नगर परिषद में सर्वे का कार्य किया था। इस कार्य में पटवारी राजस्व निरीक्षक सहित एसईसीएल के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे। सर्वे करने के पश्चात कुल आवश्यकता वाली भूमि चिन्हित की गई। इसके बाद यह कार्य बीते एक वर्ष से आगे नहीं बढ़ पाया।

निर्माण कार्य भी बिना एसईसीएल की अनुमति के करना मुश्किल

डोला, बनगवा तथा डूमर नगर परिषद में वर्तमान समय में सड़क नाली तथा सामुदायिक भवन एवं मंगल भवन सहित नगर पालिका के नवीन कार्यालय का निर्माण कार्य किया जाना है। कॉलरी प्रबंधन द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र की भूमि पर निर्माण कार्य किए जाने को लेकर आपत्ति जाहिर की जाती है। साथ ही बिना अनुमति के नगर परिषद को यह निर्माण कार्य करने पड़ते हैं। शासकीय भूमि उपलब्ध न होने की वजह से यहां नगर परिषद को परेशानी का सामना करना पड़ता है। तीनों निकाय के अध्यक्ष कलेक्टर से मिलकर समस्या को दूर करने की मांग भी कर चुके हंै।

सर्वे के दौरान कॉलरी प्रबंधन ने अधिग्रहित भूमि में से उपयोग की जा रही भूमि तथा अनुपयोगी भूमि की सूची तैयार करते हुए भारत सरकार को अनुपयोगी भूमि को नगर परिषद के निर्माण कार्यों के लिए प्रदान किए जाने के संबंध में पत्राचार किया है। इसके संबंध में अभी तक कोई भी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। अजीत तिर्की, एसडीएम कोतमा