
किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो
आर्यन अग्रवाल, 10 वर्ष
एक दिन मिनी अपने नए गुलाबी फ्रॉक और सुंदर जन्मदिन वाली टोपी पहनकर बगीचे में खेल रही थी। वह अपनी सहेलियों के आने का इंतजार कर रही थी। तभी उसका छोटा भाई चिंटू वहां आ गया। चिंटू बहुत ही नटखट और शरारती लड़का था। उसने उपहारों के डिब्बे में से एक बड़ा सा बैंगनी भोंपू निकाल लिया। चिंटू चुपके से मिनी के पीछे गया और अपने गाल फुलाकर जोर से भोंपू बजा दिया "पों… पों…!" अचानक हुई इस तेज आवाज से मिनी बुरी तरह डर गई। उसने तुरंत घबराकर अपने दोनों हाथों से कान बंद कर लिए। चिंटू को इस तरह जोकर जैसी पीली टोपी पहने और शरारत करते देख मिनी का गुस्सा गायब हो गया। दोनों भाई-बहन जोर-जोर से हंसने लगे। बगीचे का माहौल उनकी खिलखिलाहट से और भी खुशनुमा हो गया।
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भोमीक जैन, 10 वर्ष
रोहन ने अपनी दूरबीन मीना की तरफ तानी और जोर से चिल्लाया, "ठहरो! मैंने तुम्हें अपनी दूरबीन से पकड़ लिया है। तुम एक रहस्यमयी द्वीप की जासूस हो!" मीना ने भी अपनी जादुई छड़ी हवा में लहराई और रोहन को डराते हुए कहा, "पीछे हट जाओ रोहन! अगर तुमने मुझ पर नजर रखी, तो मैं इस छड़ी से तुम्हें एक मेंढक बना दूंगी!" दोनों एक-दूसरे के सामने बिल्कुल डटकर खड़े हो गए। बगीचे की ठंडी हवा और पीछे लहराते पेड़ भी ऐसा लग रहे थे मानो उनके इस नकली मुकाबले का मजा ले रहे हों।
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हनिष्का भगेला, 11 वर्ष
एक दिन मोहन और उसकी बहन रानी पार्क में खेल रहे थे। अगले दिन रानी का जन्मदिन था। मोहन ने सोचा कि वह अपनी बहन को एक सुंदर सरप्राइज देगा। दोनों ने मिलकर रंग-बिरंगी टोपियां, खिलौने और सजावट का सामान खरीदा। घर लौटते समय मोहन ने सारी चीजें एक डिब्बे में छिपा दीं ताकि रानी को पता न चले। अगले दिन सुबह मोहन ने दोस्तों की मदद से घर को खूब सजाया। जब रानी बाहर आई, तो सबने एक साथ कहा, "जन्मदिन मुबारक हो!" रानी खुशी से झूम उठी। उसने केक काटा, दोस्तों के साथ खेली और सबको मिठाई खिलाई। वह अपने भाई के इस प्यारे सरप्राइज से बहुत खुश हुई। उस दिन रानी ने सीखा कि सच्ची खुशी अपने प्रियजनों के साथ प्यार बांटने में होती है।
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कुमुद गोयल, 11 वर्ष
एक दिन दो बच्चे बगीचे में खेल रहे थे। एक बच्ची ने रंग-बिरंगी टोपी पहन रखी थी। तभी एक बच्चा खिलौने वाला भोंपू बजाने लगा। भोंपू की तेज आवाज सुनकर बच्ची ने अपने कान बंद कर लिए। बच्चा हंसने लगा और दोनों मजे से खेलने लगे। थोड़ी देर बाद उन्होंने मिलकर जन्मदिन की तैयारी की और खुशी-खुशी खेलते रहे।
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यथार्थ तिवारी, 8 वर्ष
एक दिन रिया और मोहन पार्क में खेल रहे थे। दोनों बहुत अच्छे मित्र थे। खेलते-खेलते मोहन को एक खिलौना माइक जैसा लाउडस्पीकर मिला। उसने सोचा कि इससे मजेदार आवाजें निकालकर खेला जाए। मोहन ने वह लाउडस्पीकर रिया के कान के पास ले जाकर जोर से आवाज निकाली। अचानक तेज आवाज सुनकर रिया घबरा गई और अपने कान बंद कर लिए। उसे बहुत परेशानी हुई। रिया ने मोहन से कहा, "इतनी तेज आवाज से मेरे कान में दर्द हो रहा है।" रिया की बात सुनकर मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत रिया से माफी मांगी और कहा, "मुझे नहीं पता था कि इससे तुम्हें तकलीफ होगी। मैं आगे से ऐसा कभी नहीं करूंगा।"
तभी वहां एक बड़े व्यक्ति आए। उन्होंने दोनों बच्चों को समझाया कि तेज आवाज हमारे कानों के लिए हानिकारक होती है। अधिक शोर से सुनने की क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। हमें हमेशा दूसरों का ध्यान रखना चाहिए और ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी को कष्ट पहुंचे। मोहन ने उनकी बात ध्यान से सुनी और वचन दिया कि वह कभी भी किसी के कान के पास तेज आवाज नहीं करेगा। रिया ने भी उसे माफ कर दिया। इसके बाद दोनों फिर से खुशी-खुशी खेलने लगे।
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कुंवर प्रताप सिंह झाला, 11 वर्ष
एक धूप भरी दोपहर में प्रिया और राजू बगीचे में खेलने गए। राजू के पास एक फूंकने वाली नली थी। उसने जोर से फूंक मारी तो तेज हवा निकली और हरे रंग का बड़ा गुब्बारा प्रिया की ओर उड़ गया। प्रिया की गुलाबी पोशाक और टोपी हवा में लहराने लगीं। वह हंसते हुए पीछे हट गई। पास में उनकी पार्टी की चीजें रखी थीं। दोनों ने खूब मजे किए, फिर साथ बैठकर नाश्ता किया। शाम को वे हंसते हुए घर लौट गए।
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रिशिता टहलयानी, 10 वर्ष
एक गांव था, वहां पर एक मैदान था। वहां पर एक माली काम करता था, उसके दो बच्चे थे। वह हमेशा चुप रहते थे क्योंकि उनके पास कोई दोस्त और कोई खिलौने नहीं थे। उसी मैदान के पास कुछ घर थे। वहां के बच्चे रोज मैदान में खेलने आते थे। एक दिन उन दो चुप बच्चों को देखकर उन्होंने सोचा कि वे उन्हें कुछ उपहार दें। अगले दिन जब माली के बच्चे उठे तो उन्हें मैदान में एक डिब्बा दिखा। उस डिब्बे में उनके लिए बहुत सारे खिलौने और चॉकलेट्स थीं। वे बहुत खुश हुए और खेलने लगे। उन्हें खेलते देख वे बच्चे भी बहुत खुश हुए।
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काजल गुर्जर, 11 वर्ष
एक सुहावने दिन की बात है, राहुल और मीना अपने घर के पीछे वाले बगीचे में खेल रहे थे। आज मीना का जन्मदिन था, इसलिए पूरे घर में उत्साह का माहौल था । दोनों बच्चों ने रंग-बिरंगी पार्टी वाली टोपियां पहनी हुई थीं और बगीचे की हरियाली के बीच उत्साहित नजर आ रहे थे। बगीचे में घास के ऊपर डिब्बे में उपहार और ढेर सारी मिठाइयां रखी हुई थीं। राहुल जो स्वभाव से बहुत नटखट था, उसने पास ही रखे एक खिलौने के डिब्बे से एक खिलौने वाला भोंपू उठा लिया। वह मीना को चौंकाने का मौका ढूंढ रहा था। जैसे ही मीना फूल देखने के लिए नीचे झुकी, राहुल दबे पांव मीना के पास आ गया और भोंपू बजा दिया पों-पों। अचानक हुई इस आवाज से मीना उछल पड़ी और झेंपते हुए अपने कान बंद कर लिए। पहले तो वह थोड़ी नाराज हुई लेकिन राहुल की शरारती मुस्कान देखकर वह अपनी हंसी रोक न पाई। राहुल हंसते हुए मीना से बोला, "जन्मदिन मुबारक हो मीना, यह मेरी तरफ से एक छोटा सा धमाका था।" धूप की सुनहरी किरणों के बीच, फूलों की महक और बच्चों के ठहाकों से पूरा बगीचा गूंज उठा। उस दिन राहुल और मीना ने सीखा कि असली खुशी महंगे उपहार में नहीं, बल्कि साथ मिलकर हंसने और छोटी-छोटी शरारतों में छिपी होती है।
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जनसी साहू, 10 वर्ष
एक सुहावने दिन, रिंकी और राजू अपने घर के बगीचे में खेल रहे थे। आज रिंकी का जन्मदिन था, इसलिए वह बहुत उत्साहित थी। उसने अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक और एक सुंदर सी जादुई टोपी पहनी हुई थी। बगीचे को रंग-बिरंगे फूलों और सजावटी सामानों से सजाया गया था। राजू ने एक हाथ में छोटा सा भोंपू लिया हुआ था और वह जोर-जोर से धुन बजाकर अपनी खुशी जाहिर कर रहा था। जमीन पर रिंकी का पसंदीदा खिलौना और एक सुंदर उपहार भी रखा हुआ था। दोनों बच्चे बहुत खुश थे और खिलखिलाकर हंस रहे थे। रिंकी अपनी जादुई छड़ी घुमाते हुए नाच रही थी, मानो वह वास्तव में कोई जादू कर रही हो। बगीचे में चारों ओर बिखरी हरियाली और फूलों की खुशबू ने उनके इस खास दिन को और भी यादगार बना दिया था। उन दोनों की हंसी और खेल ने पूरे माहौल को उमंग और आनंद से भर दिया।
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अश्विक जैन, 7 वर्ष
एक दिन सीमा और रीना स्कूल से लौटते समय रास्ते में रुककर खेलने लगीं। सीमा के पास एक सुंदर गुड़िया थी, जिसे रीना भी कुछ देर खेलना चाहती थी। रीना ने प्यार से कहा, “सीमा, मुझे भी थोड़ी देर गुड़िया दे दो।” लेकिन सीमा ने मना कर दिया। धीरे-धीरे बात बढ़ गई और दोनों में झगड़ा होने लगा। रीना ने गुड़िया पकड़ने की कोशिश की और सीमा उसे बचाने लगी। इसी खींचतान में उनका बस्ता और छतरी जमीन पर गिर गए। दोनों गुस्से में एक-दूसरे को देखने लगीं। तभी तेज हवा चलने लगी और हल्की बारिश शुरू हो गई। दोनों को याद आया कि छतरी तो नीचे पड़ी है। सीमा ने जल्दी से छतरी उठाई और रीना को अपने पास बुलाकर बोली, “आओ, हम दोनों साथ चलें।” रीना मुस्कुराई और बोली, “अब गुड़िया से भी हम दोनों मिलकर खेलेंगे।” उस दिन दोनों ने सीखा कि झगड़ा करने से चीजें बिगड़ती हैं, लेकिन बांटकर खेलने और साथ रहने से दोस्ती मजबूत होती है।
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इनसिया मोती, 10 वर्ष
रमेश एक जादूगर है जो रोमांचक जादुई शो करता है मगर अभी उसकी आर्थिक स्थिति उसे महंगे मॉल्स में शो करने में सक्षम नहीं बना रही है। वह रास्ते पर छोटे-छोटे जादुई टोटके दिखाकर दिन में दो बार के खाने के पैसे जमा करता है। वह बगीचे में खड़ी एक लड़की जिसका नाम सीता है, उसे जादू दिखा रहा है। उसने सीता को जादुई टोपी पहनाई और हवा से उसका रंग बदल दिया और उसके कपड़े के रंग से मिला दिया। सीता यह जादू देखकर अचंभित रह गई। उसने रमेश को एक हजार रुपये दिए ताकि उसे दिन के खान-पान के लिए इतनी मेहनत न करनी पड़े। रमेश बहुत खुश हुआ और उसने सीता को धन्यवाद किया। उसे इस बात का विश्वास हो गया कि मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।
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वेदांशी शंगारी, 11 वर्ष
एक बार दो भाई बहन थे। भाई का नाम था राहुल और बहन का नाम था टीना। टीना राहुल से 3 वर्ष बड़ी थी। राहुल को भोंपू बजाना बहुत पसंद था। उसके पापा ने उसको उसके जन्मदिन पर गिफ्ट दिया था और राहुल सारा दिन भोंपू बजाता रहता था। टीना को बहुत गंदा लगता था कि वह सारा दिन भोंपू बजाता रहता है। तो एक दिन टीना ने राहुल का वह भोंपू छुपा दिया। राहुल बहुत उदास हो गया। दो दिन बाद टीना का जन्मदिन था। राहुल ने अपनी पॉकेट मनी बचाकर उसे गुलाबी रंग की ड्रेस गिफ्ट की और साथ में बर्थडे टोपी भी दी। टीना को बहुत अच्छा लगा, फिर उसने खुश होकर राहुल को उसका छुपाया हुआ भोंपू दे दिया। राहुल को इतनी खुशी हुई कि वह जोर-जोर से भोंपू बजाने लगा। फिर दोनों भाई-बहन खुश होकर साथ में खेलने लगे।
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ग्रीषा बोर्दिया, 9 वर्ष
एक दिन पार्क में दो बच्चे, रीमा और रोहन, खेल रहे थे। उस दिन रोहन अपने साथ एक खिलौना भोंपू लाया था। उसे भोंपू बजाने में बहुत मजा आ रहा था। वह बार-बार जोर-जोर से भोंपू बजा रहा था। रीमा पास में खड़ी थी। जैसे ही रोहन ने भोंपू उसके कान के पास बजाया, रीमा घबरा गई। उसने तुरंत अपने कान बंद कर लिए। तेज आवाज से उसे बहुत परेशानी हुई। उसने रोहन से कहा, “कृपया मेरे कान के पास भोंपू मत बजाओ। इससे मुझे तकलीफ हो रही है।” पहले तो रोहन हंसने लगा, लेकिन तभी पार्क में बैठे एक बुजुर्ग व्यक्ति उनके पास आए। उन्होंने प्यार से समझाया, “बेटा, बहुत तेज आवाज से दूसरों को परेशानी होती है।
शोर से लोगों का ध्यान भटकता है और कानों को भी नुकसान पहुंच सकता है। हमें हमेशा दूसरों की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए।” रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत रीमा से माफी मांगी और भोंपू को दूर रख दिया। फिर दोनों बच्चों ने मिलकर दूसरे खेल खेलने शुरू कर दिए। अब वे हंसते-खेलते हुए समय बिताने लगे। उस दिन रोहन ने एक महत्वपूर्ण बात सीखी कि हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे दूसरों को कष्ट हो। शोर कम करना और दूसरों का सम्मान करना एक अच्छे नागरिक की पहचान है।
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मोहम्मद बिलाल, 12 वर्ष
एक दिन मिंटू को बाजार से एक नया चमकीला भोंपू मिला। वह उसे पाकर बहुत खुश था। वह पूरे घर में घूम-घूमकर उसे जोर-जोर से बजाने लगा। शाम को मिंटू अपने भोंपू के साथ पार्क में खेलने गया। वहां उसकी दोस्त पिंकी भी खेल रही थी। मिंटू ने पिंकी को चिढ़ाने के लिए उसके ठीक कान के पास जाकर जोर से भोंपू फूंक दिया "पों… पों… पों…!"
भोंपू की आवाज इतनी तेज थी कि पिंकी के कान कांप उठे। उसने तुरंत रोते हुए अपने दोनों हाथों से कान बंद कर लिए। पिंकी को परेशान देखकर मिंटू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत भोंपू बजाना बंद कर दिया और पिंकी से माफी मांगी।
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जिग्नेश डांगी, 7 वर्ष
एक दिन लक्ष्य और दिव्या अपने मम्मी-पापा के साथ मेला देखने गए। वहां से उसने पंखा, टोपी और पुंगी ली। फिर घर आकर खेलने लगे। लक्ष्य मस्ती करते हुए पुंगी दिव्या के कान में बजाने लगा तो दिव्या ने कान बंद कर लिए और मां को बुलाया। फिर मां ने दोनों को समझाया। उसके बाद दोनों आराम से खेलने लग गए।
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विवान बेदी, 7 वर्ष
गोलू के जन्मदिन के दिन गोलू बहुत ही उदास था क्योंकि उसके मम्मी-पापा को बिजनेस के काम के कारण शहर से बाहर जाना पड़ा। गोलू का मन घर पर नहीं लग रहा था। तभी उसकी बड़ी बहन मुन्नी गोलू को घर के बाहर गार्डन में ले गई ताकि गोलू का मन लग सके। मुन्नी साथ ही गोलू के लिए उसके जन्मदिन पर एक सरप्राइज गिफ्ट भी लाई।
मुन्नी ने गोलू को वो गिफ्ट दिया। गोलू ने जैसे ही वो गिफ्ट खोला, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि उसमें गोलू का पसंदीदा बाजा था जिसे वो अपने मम्मी-पापा से बहुत दिनों से मांग रहा था। वह खुशी के मारे उस बाजे को बहुत जोर-जोर से बजाने लगा। वह उस बाजे को इतनी जोर से बजा रहा था कि पूरे गार्डन में उसकी आवाज आ रही थी, यहां तक कि मुन्नी को उस बाजे की आवाज के कारण अपने कान तक बंद करने पड़े। पर मुन्नी गोलू को खुश देखकर मन ही मन खुश थी।
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रुद्रांश नाग, 9 वर्ष
एक दिन दो बच्चे पार्क में खेल रहे थे। लड़के के पास एक भोंपू था। वह उसे जोर-जोर से बजाने लगा। तेज आवाज सुनकर लड़की ने कान बंद कर लिए। उसे बहुत परेशानी हो रही थी। लड़की ने लड़के से शोर न करने को कहा। लड़के को अपनी गलती समझ आ गई। उसने भोंपू बजाना बंद कर दिया फिर दोनों खुशी-खुशी खेलने लगे। उस दिन उन्होंने सीखा कि शोर नहीं करना चाहिए।
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आर्यन, 10 वर्ष
एक समय की बात है राजस्थान के चूरू जिले के एक गांव रामसरा में 'आर्यन और मीरा' नाम के दो दोस्त रहते थे। वे दोनों ही अच्छे दोस्त थे। आर्यन बहुत ही नटखट और शरारती था। एक दिन आर्यन को मस्ती करने की सूझी। उसने एक कागज का भोंपू बनाया और जोर-जोर से बजाने लगा। मीरा ने जैसे ही भोंपू की तेज आवाज सुनी उसने जल्दी से अपने कान बंद कर लिए और कहा, "आर्यन भोंपू बजाना बंद करो।" आर्यन जोर-जोर से हंसने लगा और उसने और जोर से भोंपू बजाना शुरू कर दिया। मीरा ने उसे कई बार रोका, पर जब उसके बार-बार कहने पर भी वह नहीं रुका तो मीरा ने अपना दिमाग लगाया। उसने घर से एक छोटी सी सीटी लाकर अपने कुछ दोस्तों को बुला लिया। फिर सभी बच्चे मिलकर आर्यन के चारों तरफ घूमने लगे और खेल-खेल में सीटी बजाने लगे।
थोड़ी देर में चारों तरफ इतना शोर हो गया कि आर्यन अपने कान पकड़कर बोला, "अरे बस करो! मेरे कान दुखने लगे।" मीरा मुस्कुराकर बोली, "आर्यन, अब तुम्हें समझ आया कि तेज आवाज से दूसरों को कैसा लगता है।" आर्यन को अपनी गलती का अहसास हो गया। उसने तुरंत भोंपू नीचे रख दिया और कहा, "मुझे माफ कर दो। मैं आगे से किसी को परेशान नहीं करूंगा।" मीरा और बाकी बच्चों ने उसे माफ कर दिया। फिर सभी ने मिलकर बिना शोर किए कबड्डी और पकड़म-पकड़ाई खेली। सब बहुत खुश हुए और खूब मजे किए।
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प्रिया सिंह, 11 वर्ष
एक सुंदर सा हरा-भरा बगीचा था और आज मीनू का जन्मदिन था। वह गुलाबी रंग की फ्रॉक और सिर पर जन्मदिन की सुंदर टोपी पहनकर बहुत खुश थी। पार्टी शुरू होने से पहले, मीनू बगीचे में टहल रही थी। वहीं पास में एक डिब्बे में चॉकलेट्स रखी थीं और जमीन पर एक रंग-बिरंगी बर्थडे कैप भी पड़ी हुई थी। मीनू का छोटा भाई गोलू बहुत नटखट था। उसके मन में एक शरारत सूझी। गोलू ने चुपके से पार्टी वाला लंबा भोंपू उठाया और मीनू के ठीक सामने आकर जोर से फूंक मार दी "पों… पों…!"
भोंपू की अचानक और तेज आवाज सुनकर मीनू बुरी तरह चौंक गई। उसने झट से अपने दोनों हाथ कानों पर रख लिए और आंखें बंद कर लीं। मीनू को इस तरह डरता देख गोलू अपनी शरारत पर जोर-जोर से हंसने लगा। मीनू ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "गोलू, तुम बहुत बदमाश हो!" लेकिन अगले ही पल गोलू ने मुस्कुराते हुए अपनी जेब से एक बड़ी सी चॉकलेट निकाली और मीनू को देते हुए कहा, "हैप्पी बर्थडे, दीदी!" भाई का यह प्यारा अंदाज देखकर मीनू का सारा गुस्सा गायब हो गया। उसने गोलू को गले लगा लिया और दोनों हंसते हुए चॉकलेट खाने लगे।
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जीनल, 13 वर्ष
एक दिन रोहन और मीनू बहुत खुश थे क्योंकि उनके घर में एक जन्मदिन की पार्टी थी। दोनों ने सुंदर रंग-बिरंगे कपड़े पहने और सिर पर पार्टी वाली टोपी लगाई। मीनू खुशी से झूमते हुए ताली बजाने लगी। तभी रोहन ने अपना बड़ा सा भोंपू उठाया और उसे जोर-जोर से बजाना शुरू कर दिया। चारों तरफ 'पों-पों' की तेज आवाज गूंजने लगी। मीनू को पहले बहुत मजा आया और वह खिलखिलाकर हंस पड़ी। दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन कुछ ही देर में वह तेज आवाज मीनू के कानों में चुभने लगी। उसने अपने कान बंद कर लिए और रोहन से कहा, "रोहन तुम्हारी खुशी अपनी जगह ठीक है लेकिन यह शोर अब हमारे कानों को नुकसान पहुंचा रहा है।" रोहन को बात समझ आ गई। उसने तुरंत भोंपू बजाना बंद कर दिया। दोनों ने समझा कि अपनी खुशी मनाने के लिए दूसरों को परेशान करने वाला शोर मचाना सही नहीं है।
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माही अग्रवाल, 12 वर्ष
एक बार की बात है, दो भाई-बहन थे। उन दोनों का जन्मदिन था तो उनकी मां ने और पिता ने उन्हें उपहार दिया। उस उपहार के डिब्बे के अंदर बहुत सारी टॉफियां थीं और उसके अंदर कई सारी तुरही भी थीं। तो उन्होंने सोचा कि वे दोनों जाकर पार्क में खेलेंगे। सोनू और मीना दोनों पार्क में गए और वहां जाकर उन उपहारों से खेलने लगे। सोनू ने सोचा कि वह मीना के साथ एक मजाक करेगा। यह सोचकर सोनू ने डिब्बे में से एक गुलाबी रंग की तुरही निकाली और एकदम से मीना के सामने बहुत जोर से बजाई पों-पों-पों। मीना एकदम से चौंक गई और अपने दोनों हाथों से कानों को बंद किया और कहा, "सोनू यह तुम क्या कर रहे हो, मेरे कानों में दर्द हो रहा है, तुम इसे बजाना बंद करो।"
सोनू ने उसे बजाना बंद किया। मीना ने कहा, "सोनू तुमने यह क्या किया, मेरे कान बहुत तेज दुख रहे हैं।" यह कहकर मीना सोनू से गुस्सा हो गई और दूसरी तरफ मुड़ गई। सोनू को अब अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने उपहार में से एक टॉफी निकाली और मीना को दे दी। सोनू ने कहा, "सॉरी मीना, मुझे माफ कर दो, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।" फिर सोनू और मीना दोनों ही खुशी-खुशी खेलने लगे।
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राहुल, 11 वर्ष
मेरा नाम राहुल है। पिछले रविवार को मेरी मित्र रिया का जन्मदिन था। हम सभी बच्चे पार्क में उसकी जन्मदिन पार्टी में गए थे। वहां रंग-बिरंगे गुब्बारे, मिठाइयां और खेलों का बहुत अच्छा इंतजाम था। हम सब बहुत खुश थे। पार्टी में एक मजेदार खेल रखा गया था। हमें कागज से बने भोंपू और पार्टी टोपी दी गई थीं। रिया ने गुलाबी रंग की सुंदर पोशाक और टोपी पहन रखी थी। मैं भी नारंगी रंग के कपड़ों में था। खेलते-खेलते मेरे मन में एक शरारत सूझी। मैंने अपना भोंपू रिया के कान के पास ले जाकर जोर से बजा दिया।
अचानक तेज आवाज सुनकर रिया घबरा गई। उसने तुरंत अपने कान बंद कर लिए। उसके चेहरे पर परेशानी साफ दिखाई दे रही थी। तभी मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। मैंने सोचा कि मेरी इस शरारत से उसे तकलीफ हुई है। मैंने तुरंत रिया से माफी मांगी और कहा कि मेरा उसे परेशान करने का कोई इरादा नहीं था। रिया ने मुस्कुराकर मुझे माफ कर दिया। इसके बाद हमने मिलकर केक काटा, खेल खेले और खूब आनंद लिया। उस दिन मैंने एक महत्वपूर्ण सीख सीखी कि हमें कभी भी ऐसी शरारत नहीं करनी चाहिए जिससे किसी को परेशानी या चोट पहुंचे। मजाक वही अच्छा होता है जिससे सबको खुशी मिले। तभी एक पार्टी सचमुच यादगार बनती है।
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काव्या खेड़े, 12 वर्ष
एक शाम चिंटू और मीना पार्क में खेलने गए थे। चिंटू बहुत नटखट था और उसके हाथ में एक प्लास्टिक की तेज आवाज वाली पुंगी थी। वह पूरे रास्ते उसे बजाकर सबको परेशान कर रहा था। पार्क के कोने में लगे एक बड़े और घने पेड़ के नीचे मीना चुपचाप खड़ी थी। चिंटू दबे पांव मीना के पीछे पहुंचा। उसने बिना कुछ सोचे-समझे अपनी पुंगी मीना के ठीक कान के पास ले जाकर जोर से बजा दी "पों… पों…!" अचानक हुए इस तेज धमाके जैसी आवाज से मीना बुरी तरह चौंक गई। डर और घबराहट के मारे उसने तुरंत अपने दोनों हाथों से अपने कान बंद कर लिए। चिंटू की इस हरकत पर मीना को बहुत गुस्सा आया। उसने चिल्लाते हुए कहा, "चिंटू! यह क्या बकवास है? तुम जानते हो इससे मेरे कान के पर्दे फट सकते थे!"
चिंटू मीना को डरा हुआ देखकर जोर-जोर से हंसने लगा। जमीन पर उनके खेलने का सामान, एक खाली डिब्बा और कुछ मिठाइयां बिखरी पड़ी थीं। मीना ने चिंटू को समझाया कि मजाक वहीं तक अच्छा होता है जिससे किसी को चोट या परेशानी न पहुंचे। तेज आवाज से किसी के सुनने की क्षमता भी जा सकती है। मीना की बात सुनकर और उसका लाल चेहरा देखकर चिंटू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने हंसना बंद किया और तुरंत मीना से माफी मांगी।
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दिव्यांका चौधरी, 9 वर्ष
टीना और रोहन दोनों अच्छे दोस्त हैं। एक दिन दोनों मेले घूमने गए, मेले में उन्होंने खूब आनंद लिया और कुछ सामान जैसे भोंपू, टोपी और चॉकलेट भी खरीदी। फिर दोनों वापस घर की ओर चल दिए। रास्ते में रोहन ने टीना के पास जोर से भोंपू बजाया। भोंपू बजते ही टीना ने अपने कान पर हाथ रख लिया क्योंकि भोंपू की आवाज टीना के कानों को बहुत तेज लगी। रोहन को भोंपू से मजा आ रहा था, फिर रोहन ने देखा कि भोंपू से टीना को परेशानी हो रही है। तभी रोहन ने भोंपू बजाना बंद कर दिया और टीना से माफी मांगी। टीना ने मुस्कुराकर उसे माफ कर दिया और दोनों साथ में खेलने लगे। इस तरह रोहन ने सच्चे दोस्त का परिचय दिया।
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रोयेशा जैन, 7 वर्ष
एक बार की बात है, दो भाई-बहन एक शहर में रहते थे। बहन का नाम पिंकी एवं भाई का नाम अंकित था। पिंकी का जन्मदिवस जल्दी आने वाला था, अंकित ने पहले से ही जन्मदिवस की तैयारी कर रखी थी। उसने एक हरे-भरे बगीचे में जन्मदिवस की तैयारी की थी क्योंकि पिंकी को हरियाली बहुत पसंद थी। फिर क्या था, जन्मदिवस का दिन आ गया और अंकित पिंकी को लेकर बगीचे में गया। वहां उसने जोर-जोर से पीपड़ी बजानी शुरू कर दी। पिंकी ने अपने कान बंद कर लिए, उसके बाद दोनों ने धूमधाम से जन्मदिवस मनाया। भाई-बहन का प्यार एवं बचपन बहुत अनमोल होता है।
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लाव्यांश जलुथरिया, 10 वर्ष
एक समय की बात है। खुले आसमान के नीचे राम और स्नेहा खेल रहे थे। हरी-भरी घास में दोनों साथ-साथ खेलते, दौड़ते और घूमते थे। खेलते समय वे अपने साथ खिलौनों का एक डिब्बा लाए थे, जिसमें कुछ टोपियां, टॉफियां तथा अन्य खेलने का सामान रखा हुआ था। तभी राम ने स्नेहा को तंग करने की सोची। उसने एक कागज को लपेटकर स्नेहा के पास जाकर जोर से आवाज निकाली, जिससे स्नेहा डर गई और उसने अपने कान बंद कर लिए। स्नेहा बोली, "अरे राम, यह तुम क्या कर रहे हो?"
तभी राम मजाक में बोला, "मैं तो बस तुम्हें डराने के लिए ऐसा कर रहा था।" फिर वे दोनों वापस साथ-साथ उस डिब्बे में रखे सामान से खेलने लगे। काफी देर बाद दोनों को भूख लगने लगी, तो उन्होंने कुछ टॉफियां खाईं और फिर खेलने लगे। इतनी देर तक खेलने के बाद दोनों थोड़ी देर के लिए कुर्सी पर बैठ गए। दोनों को प्यास लग रही थी, इसलिए उन्होंने अपनी-अपनी बोतलों से पानी पी लिया। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को अलविदा कहा और अपने-अपने घरों की ओर निकल गए।
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शिवांश, 9 वर्ष
रिया का जन्मदिन था। वह सुबह से ही बहुत खुश थी क्योंकि वह कई दिनों से इस दिन का इंतजार कर रही थी। उठते ही मम्मी ने कहा, "जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं!" रिया ने कहा, "धन्यवाद मम्मी!" जैसे ही वह अपने भाई के कमरे में गई, उसके भाई ने उस पर ध्यान नहीं दिया। यह देखकर रिया काफी उदास हुई, लेकिन वह इस बात से अनजान थी कि उसके भाई चीटू ने उसके लिए एक बड़ा सरप्राइज प्लान किया था। जब रिया मोहल्ले में घूमने के लिए निकली, तो सभी लोगों ने उसे बधाई दी। रिया के बाहर होने का फायदा उठाते हुए उसके भाई ने घर के बगल वाले बड़े से पार्क में खूब तैयारी की। उसने सजावट की और फिर एक बास्केट में उसके लिए उपहार रखे।
रिया किराने की दुकान से घर का सामान लेकर वापस आ रही थी और उसके भाई ने सारी तैयारी कर ली थी। रिया ने घर का सामान रखकर जैसे ही पार्क में कदम रखा, वैसे ही भोंपू की तेज आवाज आई और उसके भाई ने धूमधाम से उसका स्वागत किया। रिया चौंक गई। उसके भाई को रिया का जन्मदिन याद था। दोनों ने मिलकर टॉफी खाई और नाच-गाना भी किया। रिया का यह जन्मदिन अब तक का सबसे शानदार जन्मदिन था।
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प्रीति जोद, 10 वर्ष
एक दिन रीना और मोहन पार्क में खेल रहे थे। मोहन को एक भोंपू मिला। उसने उसमें जोर-जोर से बोलना शुरू कर दिया। तेज आवाज सुनकर रीना ने अपने कान बंद कर लिए। उसे बहुत परेशानी हो रही थी। रीना ने मोहन से कहा, “इतना शोर मत करो।” लेकिन मोहन नहीं माना। कुछ देर बाद उसका गला दुखने लगा। तब उसे अपनी गलती समझ में आई। मोहन ने रीना से माफी मांगी और भोंपू रख दिया। दोनों फिर शांति से खेलने लगे। उन्होंने निश्चय किया कि वे कभी अनावश्यक शोर नहीं करेंगे।
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रोहन दहमीवाल, 12 वर्ष
आज मीरा का जन्मदिन था, और उसने अपने भाई राहुल के साथ बगीचे में एक छोटी सी पार्टी रखी थी। दोनों ने अपनी पसंदीदा पार्टी टोपियां पहनी थीं। खेलते-खेलते उनकी नजर कोने में रखे एक पुराने लकड़ी के स्टैंड पर पड़ी। "देखो राहुल! क्या इसमें कोई गुप्त संदेश छिपा है?" मीरा ने उत्सुकता से पूछा। राहुल ने तुरंत अपनी खिलौना दूरबीन उठाई और जासूसों की तरह चारों ओर देखने लगा। "सावधान मीरा! हो सकता है कि हम किसी बड़े खजाने की खोज करने वाले हों।" वे दोनों कल्पना की दुनिया में खो गए। उन्हें लगा कि वह लकड़ी का डिब्बा किसी जादुई पक्षी का घर है जो केवल जन्मदिन के दिन ही दिखाई देता है।
काफी देर तक गौर से देखने के बाद उन्हें समझ आया कि वह कोई खजाना नहीं, बल्कि चिड़ियों के लिए बनाया गया एक छोटा सा 'बर्ड फीडर' था। हालांकि उन्हें सोना-चांदी नहीं मिला, लेकिन उन्होंने सीखा कि अपनी कल्पना और जिज्ञासा से हम साधारण सी चीजों को भी रोमांचक बना सकते हैं, दुनिया वैसी ही दिखती है जैसा हम उसे देखना चाहते हैं।
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दानियाल सामी, 9 वर्ष
एक दिन रीना और सीमा पार्क में खेल रही थीं। रीना के हाथ में एक खिलौना मेगाफोन था। उसने मजाक करने के लिए अचानक मेगाफोन में जोर से आवाज निकाली। तेज आवाज सुनकर सीमा घबरा गई और अपने कान बंद कर लिए। सीमा ने कहा, "इतनी तेज आवाज से किसी को डराना अच्छी बात नहीं है।" रीना को अपनी गलती का एहसास हुआ, उसने तुरंत माफी मांगी और आगे से शरारत न करने का वादा किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर खेला और खूब आनंद लिया।
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Published on:
11 Jun 2026 02:20 pm
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