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भीलवाड़ा के यूआईटी के माॅडल मेंं घपलों का ‘शॉर्ट सर्किट

भीलवाड़ा। नगर विकास न्यास की इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग टीम की लापरवाही ने शहर की तिरंगा लाइट का बंटाधार करने के साथ ही मांडल कस्बे को विनाश की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। मांडल को ‘मॉडल कस्बा’ बनाने का सपना दिखाकर पांच साल पहले शुरू की गई भूमिगत बिजली लाइन परियोजना आज क्षेत्र के लोगों […]

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bhilwara uit...mandal..

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भीलवाड़ा। नगर विकास न्यास की इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग टीम की लापरवाही ने शहर की तिरंगा लाइट का बंटाधार करने के साथ ही मांडल कस्बे को विनाश की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। मांडल को 'मॉडल कस्बा' बनाने का सपना दिखाकर पांच साल पहले शुरू की गई भूमिगत बिजली लाइन परियोजना आज क्षेत्र के लोगों के लिए 'जी का जंजाल' बन चुकी है। आलम यह है कि करोड़ों स्वाहा करने के बाद भी बाजारों और गलियों में तारों का जाल बरकरार है, जो कभी भी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी गुणवत्ता: न गहराई मिली, न डबलिंग हुई

पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि न्यास के अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। नियमानुसार केबलों को जितनी गहराई में दबाना चाहिए था, वह नहीं किया गया। लागत बचाने के चक्कर में डबलिंग के बजाय सिंगल केबल का ही उपयोग किया गया। घटिया निर्माण का ही नतीजा है कि जगह-जगह सेट बॉक्स टूट चुके हैं और नंगी केबलें सड़कों पर खुली पड़ी हैं, जिनसे राहगीरों और व्यापारियों में हर पल दहशत बनी रहती है।

घरों में दौड़ रहा करंट, दहशत के साए में लोग

5 सितंबर 2024 को तालाब की पाल चौपा वार्ड में भूमिगत लाइन के फॉल्ट के कारण कई घरों में करंट दौड़ गया था। लोग आज भी उस मंजर को याद कर कांप उठते हैं। लापरवाही का स्तर यह है कि गणगौर घाट क्षेत्र में 11 केवी की लाइन 'जीरो' हो गई है। कई इलाकों में केबलें जल चुकी हैं और बॉक्स करंट मार रहे हैं, जिससे मासूम बच्चों और मवेशियों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।

एवीएनएल पर बढ़ा बोझ, न्यास ने झाड़ा पल्ला

पूर्व मंत्री रामलाल जाट की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए न्यास ने दो चरणों में लगभग एक करोड़ रुपए (67 लाख और 35 लाख) स्वीकृत किए थे। कुल 11 हजार मीटर लंबी लाइन बिछाने का दावा किया गया, लेकिन आज रख-रखाव और देखरेख के अभाव में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। अब अजमेर विद्युत वितरण निगम को ग्राम पंचायत की मदद से भीमरोड, रेगर मोहल्ला और बलाई चौक जैसे क्षेत्रों में खराब केबिलें बदलनी पड़ रही हैं। न्यास की इस कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, जो इसे सीधे तौर पर सरकारी धन की बर्बादी और जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ बता रहे हैं।

सरकारी खजाने को लगाया चूना

स्थानीदलय बांशिदों का कहना है कि यह स्पष्ट है कि मांडल को तारों से मुक्ति दिलाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। नगर विकास न्यास की इलेक्ट्रिकल टीम ने न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया है, बल्कि आमजन के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है।

इनका है कहना......

परिवार करंट से आशांकित

विदुयत तारों के जाल से लिपटा हुआ है। अकसर करंट बना रहता है। परिजनों के साथ ही आने जाने वाले किसी अनहोनी से आंशिकत रहते है। न्यास के साथ बिजली विभाग को शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।

राजेश तिवाड़ी, नृसिंहद्वारा

टेलीफोन के पोल पर टांग दिए तार

मठ मंदिर क्षेत्र में ओझा मंदिर की गली पहले से काफी सिकुड़ी हुई है, यहां भूमिगम लाइन डाले जाने के दौरान गली को खोद कर रख दिया गया। जिसकी अभी तक मरम्मत नहीं हो सकी। यहां बिजली के तार टेलीफोन के पोलों पर ही न्यास के ठेकेदार ने लटका रखे है।

मंजू पाटोदिया, ओझा मंदिर गली

योजना की नए सिरे से हो समीक्षा

नगर विकास न्यास की यह महत्वकांक्षी योजना है, लेकिन इस पर असरकार तरीके से काम नहीं हुआ। भूमिगत जालों को जमीन में गहराई में दबाए जाने की जरूरत थी, केबल भी डबलिंग होनी चाहिए थी।

संजय भंडिया, प्रशासक, ग्राम पंचायत मांडल