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मध्यान्ह भोजन : बच्चों को पसंद नहीं सेंट्रल किचन का एमडीएम, लंच बाक्स लेकर पहुंच रहे स्कूल

मध्यान्ह भोजन : बच्चों को पसंद नहीं सेंट्रल किचन का एमडीएम, लंच बाक्स लेकर पहुंच रहे स्कूल

खंडवाJul 08, 2024 / 11:15 am

Rajesh Patel

Midday meal: Children do not like MDM of Central Kitchen, reaching schools with lunch boxes.

सेंट्रल किचन के भोजन की गुणवत्ता कमजोर, बच्चों के थाली में खराब हो रहा 50 फीसदी भोजन, रसोइया घर ले जा रही या फिर मवेशी खा रहे

शहरी क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन पसंद नहीं
शहरी क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन पसंद नहीं आ रहा है। ज्यादातर स्कूलों में बच्चे लंच बाक्स लेकर पहुंच रहे हैं। बच्चे सेंट्रल किचन के भोजन से पहले ही लंच बाक्स फिनिश कर रहे। बच्चों की थाली में 50 फीसदी से ज्यादा भोजन खराब हो रहा या फिर मवेशी खा रहे हैं। इसमें कुछ बच्चे अपने हिस्से का भोजन लंच बाक्स लेकर घर भी ले जाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि बच्चे मंगलवार को विशेष भोजन में खरी, पूडी की तुलना में सामान्य दिनों में मध्याह्न भोजन का उपयोग कम करते हैं। शुक्रवार को सेंट्रल किचन से खिचड़ी की आपूर्ति की गई थी। ज्यादातर बच्चों ने थाली में भोजन छोड दिए।
60 में 35 बच्चे लंच बाक्स लेकर पहुंच रहे

शासकीय कमला नेहरू कन्या विद्यालय में कक्षा एक से 5 वीं में 60 बच्चे अध्ययनरत है। शुक्रवार 45 से ज्यादा बच्चे पहुंचे थे। इसमें 35 से अधिक बच्चे लंच बाक्स लेकर पहुंचे थे। पूछने पर बच्चों ने एक स्वर में कहा कि स्कूल के भोजन से अच्छा हमारा लंच बाक्स आता है। इसी तरह रामेश्वर पुलिस चौकी के निकट स्थित शासकीय विद्यालय में 126 बच्चों में से 70 बच्चे स्कूल आए थे। इसमें 40 से अधिक बच्चे लंच बाक्स लेकर आए थे। पूछने पर भोजन परोसने वाली रसोइया ने बताया कि थाली में बच्चे भोजन खराब करते हैं। मवेशी को देना पड़ता है। मंगलवार को खीर, पूड़ी आती है। विशेष भोजन वाले दिन ज्यादातर बच्चे भोजन करते हैं। अन्य दिनों में लंच बाक्स का उपयोग अधिक करते हैं। सेंट्रल किचन का भी भोजन करते हैं। लेकिन लंच बाक्स की तुलना में उपयोग कम करते हैं। कुछ स्कूलों में तो शिक्षक मध्याह्न भोजन बच्चों को देने से पहले नहीं चख रहे हैं।
50 फीसदी बच्चे थाली में छोड़ रहे भोजन

शुक्रवार को सेंट्रल किचन से शहरी क्षेत्र के स्कूलों में मूंग की खिचडी़ और पानीदार आलू मिक्स मटर की सब्जी आपूर्ति की गई । दोपहर लंच के समय बच्चों को थाली में भोजन दिया गया। ज्यादातर बच्चे ने भोजन कम मात्रा चखा। स्कूलों में शेष बचे भोजन को रसोईया ले जा रही है या फिर मवेशी खिलाया जा रहा है।
शहर में साढ़े चार हजार से अधिक बच्चे दर्ज

खिचडी़ की आपूर्ति शहर में पहली से 8 वीं तक 28 शासकीय स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब साढ़े चार हजार बच्चे दर्ज है। इन बच्चों को भोजन सेंट्रल किचन से आपूर्ति किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर बच्चे मध्याह्न भोजन का उपयोग कर रहे हैं। कुछ ही बच्चे लंच बाक्स लेकर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहर में अधिक बच्चे लंब बाक्स लेकर पहुंच रहे हैं। अकेले खंडवा ब्लाक क्षेत्र में 17 हजार से अधिक बच्चे स्कूलों में दर्ज है।
स्कूलों में बॉटल में पानी लेकर पहुंच रहे बच्चे

शहर के ज्यादातर स्कूलों में हैंडपंप या फिर नल सप्लाई का पानी रहता है। ज्यादातर बच्चे घर से पानी की बाटल लेकर पहुंच रहे हैं। गांधी भवन में प्राथमिक शाला समेत शहर के ज्यादातर स्कूलों में बच्चे पानी की बाटल लेकर पहुंच रहे हैं। स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था भगवान भरोसे है। हैंडपंप है, नलों का पानी टंकी में रहता है। लेकिन बच्चों को रास नहीं आता है।
वर्जन

नगरीय क्षेत्र के स्कूलों में सेंट्रल किचन से भोजन की आपूर्ति की जा रही है। किचन के भोजन की गुणवत्ता ठीक रहती है। फिर भी अगर ऐसा है तो भोजन की गुणवत्ता चैक कराएंगे। स्कूलों का बीओ, बीआरसी रेगुलर निरीक्षण कर रहे हैं।
पीएस सोलंकी, जिला शिक्षा अधिकारी

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