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लंबी कानूनी लड़ाई का अंत: पिता देगा 20 लाख गुजारा भत्ता, ब्याज से बेटे का होगा भरण पोषण

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मेंटेनेंस विवाद के एक मामले में बड़ा आदेश देते हुए बेटे के भरण पोषण के लिए 20 लाख रुपए की एकमुश्त राशि दो महीने के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं।

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लंबी कानूनी लड़ाई का अंत: पिता देगा 20 लाख गुजारा भत्ता, ब्याज से बेटे का होगा भरण पोषण


ग्वालियर. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मेंटेनेंस विवाद के एक मामले में बड़ा आदेश देते हुए बेटे के भरण पोषण के लिए 20 लाख रुपए की एकमुश्त राशि दो महीने के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता द्वारा पारित किया गया। बैंक ब्याज से जो राशि आएगी, उससे बेटे का भरण पोषण होगा। बेटा दिव्यांग है और वह खुद से अपना भरण पोषण नहीं कर सकता है। कोर्ट ने यह फैसला वीरेंद्र कुमार बनाम उत्सव जैन के मामले में दिया है।
दरअसल उत्सव जैन दिव्यांग है। शारीरिक रूप से कमजोर होने की वजह से खुद भरण पोषण नहीं कर सकता है। भरण पोषण के लिए उत्सव ने पिता के खिलाफ वाद पेश किया। शिवपुरी के पिछोर न्यायालय ने साक्ष्य एवं तथ्य के आधार पर वर्ष 2022 में फैसला सुनाते हुए यह माना कि उत्सव जैन शारीरिक और मानसिक विकार की स्थिति में स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ है। इसलिए आवेदक को 10 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए दोनों पक्षों ने अपराध पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। एक ओर आदेश को हटाने की मांग और दूसरी ओर भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट में समझौते की राह
हाईकोर्ट ने पक्षकारों को 28 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए। पेशी के दौरान दोनों पक्ष इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के स्थान पर एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाए। हाईकोर्ट ने सहमति को स्वीकार करते हुए आदेश सुनाया।
वीरेंद्र कुमार को 20 लाख रुपए की राशि डिमांड ड्राफ्ट के रूप में जमा करनी होगी।
डीडी उत्सव जैन के संरक्षक नवीन कुमार के नाम से बनेगी।
राशि दो माह में ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।
बैंक में जमा राशि से होने वाला ब्याज प्रति माह उत्सव जैन के भरण-पोषण पर खर्च किया जा सकेगा।
मूल राशि बिना ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बैंक द्वारा जारी नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए आदेश की प्रति संबंधित ट्रायल कोर्ट को भेजी जाएगी। आदेश के साथ ही मामला निपटारा योग्य मानते हुए याचिका को डिस्पोज कर दिया गया।