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गरीबों के आशियानों में भ्रष्टाचार की दरारें, नेता-अधिकारियों को निरीक्षण में नजर नहीं आईं

हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम के तहत किशोर न्यायालय के पीछे की ओर तैयार हो रहे गरीबों के आशियाने में भ्रष्टाचार की दरारें आ गई हैं। आवासों का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, उसके पहले ही उसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं तो कई जगह प्लास्टर टपकने लगा है।

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सागर

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Madan Tiwari

Jun 30, 2024

गरीबों के आशियानों में भ्रष्टाचार की दरारें

गरीबों के आशियानों में भ्रष्टाचार की दरारें

नौ साल पहले शुरू हुआ था निर्माण आज भी अधूरा, किशोर न्यायालय के पास बन रहे पीएम आवास का मामला

सागर. हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम के तहत किशोर न्यायालय के पीछे की ओर तैयार हो रहे गरीबों के आशियाने में भ्रष्टाचार की दरारें आ गई हैं। आवासों का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, उसके पहले ही उसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं तो कई जगह प्लास्टर टपकने लगा है। लेटलतीफी में ब्लैक लिस्टेड होने के बाद दूसरी एजेंसी ने काम शुरू किया और अब इस घटिया निर्माण को लीपापोती कर ढकने का प्रयास किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन अवासों की गुणवत्ता देखने के लिए कई बार नेता, अधिकारी गए, लेकिन इन्हें यहां कुछ भी गलत नजर नहीं आया, या यूं कहें कि उन्होंने जानबूझकर इस घटिया निर्माण पर गौर नहीं किया। हमेशा की तरह वही रटे-रटाए डायलॉग मारकर मीडिया में निरीक्षण और चेतावनी भरी विज्ञप्ति जारी कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया।

जानकारी के अनुसार किशोर न्यायालय के पीछे पहाड़ी पर गरीबों के लिए 540 आवास तैयार किए जा रहे हैं। पत्रिका टीम ने जब मौके पर पहुंचकर देखा तो इनमें तोडफ़ोड़ चल रही थी। पीछे की ओर के दरवाजे को बंद कर दूसरी तरफ से निकासी दे दी गई है। इन मल्टी को पास में जाकर देखा तो ऐसा कोई मकान नहीं था जिसकी दीवारों में दरारें न हों। यह बात भी सामने आई है कि आवासों में आ रहीं दरारों को छिपाने के लिए कुछ ही समय पहले रंग-रोगन किया गया है जो स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

- नौ साल पहले शुरू हुआ था काम

नगर निगम के अनुसार आवास योजना के तहत तैयार हो रहे इन मकानों का काम करीब नौ साल पहले वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। पहले जिस निर्माण एजेंसी को यह काम सौंपा गया था वह काम में देरी कर रही थी, जिसके चलते तत्कालीन अधिकारियों ने करीब दो करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई थी। निर्माण एजेंसी ने पेनाल्टी की राशि भरने की जगह काम ही छोड़ दिया, जिसके बाद दूसरी एजेंसी को काम सौंपा गया, लेकिन न तो गुणवत्ता में सुधार आया और न ही समय-सीमा में काम पूरा हो सका, उल्टा पूर्व की एजेंसी द्वारा किए गए घटिया निर्माण को लीपापोती कर ढका जा रहा है।

- बात सुनते ही काटा फोन

पत्रिका ने इस मामले में जब नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री से बात की और पूछा कि 9 साल से किशोर न्यायालय पर चल रहे आवासों का निर्माण कब तक पूरा होगा तो वे हक्के-बक्के हो गए। उन्होंने यह सुनते ही फोन काट दिया। बड़ी बात यह है कि गरीबों के लिए बनाए जा रहे आवासों में शासन-प्रशासन भ्रष्टाचार का खेल खेलने में लगा है, जिनमें न तो गुणवत्ता है और न ही कोई समय-सीमा। वहीं अधिकारी भी हकीकत से दूर भाग रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि इन अवासों की गुणवत्ता देखने के लिए कई बार नेता, अधिकारी गए, लेकिन इन्हें यहां कुछ भी गलत नजर नहीं आया, या यूं कहें कि उन्होंने जानबूझकर इस घटिया निर्माण पर गौर नहीं किया। हमेशा की तरह वही रटे-रटाए डायलॉग मारकर मीडिया में निरीक्षण और चेतावनी भरी विज्ञप्ति जारी कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया।