
छिपाकर लाए पानी को पैंट्री कार में रखता हुआ कर्मचारी। फोटो-पत्रिका
बीना. रेलवे ने ट्रेनों में स्वच्छ और निर्धारित दर पर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रेल नीर की व्यवस्था की गई है, लेकिन बीना स्टेशन पर इसका उल्टा नजारा देखने को मिला। पर्याप्त मात्रा में रेल नीर उपलब्ध होने के बावजूद ट्रेनों में अन्य निजी ब्रांड का पानी खुलेआम बेचा जा रहा है, जो रेलवे के नियमों की सीधी अवहेलना है।
मामला लोकमान्य तिलक से गोरखपुर जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस से जुड़ा है, जहां पैंट्रीकार में बड़ी मात्रा में दूसरे ब्रांड (रेंडेव) की पानी की बोतलें यात्रियों को बेचने के लिए रखी गई थीं। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान कई रेलवे अधिकारी मौके से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने भी इस अनियमितता पर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी। रेलवे के नियमों के अनुसार, जब तक रेल नीर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है, तब तक किसी अन्य ब्रांड का पानी बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल आपूर्ति में कमी होने की स्थिति में ही अधिकृत अनुमति के बाद रेलवे से एप्रूव अन्य ब्रांड का पानी बेचा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल ऐसी कोई कमी नहीं है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। इसके बावजूद वेंडर निजी लाभ के लिए नियमों को दरकिनार कर यात्रियों को महंगे दामों पर पानी बेच रहे हैं। 14 रुपए में मिलने वाली बोतल को 20 रुपए तक में जबरन थोपे जाने की शिकायतें सामने आई हैं, यात्री मजबूरी में अतिरिक्त भुगतान करने को विवश हैं।
छिपाकर लाया गया पानी
इन बोतलों को स्टेशन से ट्रेन तक हाथ ठेला के माध्यम से ढंककर पहुंचाया गया, ताकि किसी की नजर न पड़े। जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। वहीं, पैंट्री संचालक और वेंडर खुलेआम मनमानी कर रहे हैं।
ज्यादा बचत के लिए चल रहा यह खेल
दूसरी कंपनियों का पानी बेचकर ठेकेदार ज्यादा बचत करते हैं। वॉटल पर रुपए ज्यादा बचते हैं और फिर ओवररेट पर इसकी बिक्री करते हैं।
Published on:
19 Mar 2026 11:57 am
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