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ऐसा मंदिर, जहां निवास करती हैं धरती की सबसे जागृत महाकाली! पूरी होती से सारी मनोकामनाएं

: ऊंची पहाड़ी में स्थित सिद्धपीठ... : भगवान शिव शंकर ने दिए थे साक्षात दर्शन...

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Earth's most awakened Mahakali

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पहाड़ों वाली माता का जयकारा तो आप सभी ने लगाए या सुने होंगे। पर क्या आप जानते हैं, देश में देवी मां के हजारों लाखों मंदिरों में से कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि देवी मां यहां साक्षात रहती हैं। ये इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इन स्थानों पर समय समय पर चमत्कार देखने को मिलते हैं।

वहीं सप्ताह के दिनों की बात करें तो मंगलवार के कारक देव जहां हनुमान जी हैं, वहीं इस दिन देवी मां को पूजने का भी विधान है। सप्ताह के दिनों में केवल देवी मां ही हैं, जिन्हें हफ्ते के तीन दिनों में खास पूजने का विधान है, ये दिन हैं मंगलवार, शुक्रवार व शनिवार। जबकि सोमवार को भगवान शिव, मंगलवार व शनिवार को हनुमान जी, बुधवार को श्री गणेश, गुरुवार को भगवान विष्णु व मां सरस्वती, शुक्रवार को देवी मां के साथ ही मां लक्ष्मी, शनिवार को शनिदेव व रविवार को सूर्य देव का दिन माना जाता है।

ऐसे में आज मंगलवार होने के चलते आज हम आपको एक ऐसी देवी मां के मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें धरती की सबसे जागृत महाकाली मंदिर में से एक माना जाता है।


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दरअसल चार सौ वर्ष पूर्व हुए इस मंदिर की स्थापना गढ़वाल के राजा ने की थी। यहां पर देवी दो रूप में भक्तों को दर्शन देती है। एक तो वैष्णव रूप में और दूसरी भद्रकाली यानी काली के रूप में।

मान्यता के अनुसार जो भी भक्त इस शक्ति पीठ में आता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इस स्थान पर मठियाणा माई को भगवान शिव शंकर ने साक्षात दर्शन दिए थे। लोगों की आस्था है कि इस मंदिर में देवी के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

जी हां हम बात कर रहे हैं देवभूमि उत्तराखंड के जनपद रुद्रप्रयाग के जखोली विकासखंड के भरदार क्षेत्र की ऊंची पहाड़ी में स्थित सिद्धपीठ मठियाणा मां मंदिर की...

मठियाणा मां का यह मंदिर सिद्धपीठों में शामिल है। चैत्र व शारदीय नवरात्रों में यहां विशेष पूजा होती है। कालरात्रि को पूरी रात जागरण होता है। यहां पर अस्सी के दशक में बली प्रथा का प्रचलन था, लेकिन अब नहीं है। भक्त श्रीफल लेकर माता के दरबार में आते हैं।

पूरे वर्ष श्रृद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। नवरात्रों पर यहां विशेष पूजा होती है। रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली क्षेत्र के तीन सौ गांवों की कुल देवी है। यहां दूर-दराज क्षेत्रों से दर्शनों को बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

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ऐसे पहुंचे यहां...
ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे रुद्रप्रयाग तक-130, रुदप्रयाग से गौरीकुंड हाईवे पर तिलवाड़ा तक 9 किमी। तिलवाड़ा सौराखाल मोटर मार्ग पर 32 किलोमीटर मैठाणागड़ तक का सफर। यहां से दो किमी पैदल मार्ग।

मां मठियाणा माता का मन्दिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सिलीगों गांव में स्थित है, यहां आने के लिए रुद्रप्रयाग से तिलवाड़ा, घेघड़ होते पंहुचा जा सकता है। सड़क मार्ग से मंदिर कि दूरी लगभग 2 किलोमीटर पैदल तय करनी पड़ती है। एक दूसरा रास्ता श्रीनगर से कीर्तिनगर ,बडियार गढ़ सौरखाल होते हुए डोंडा, चौरिया तक जाता है । इसके बाद भरदार सिलिगों से थोडा पैदल चलकर आप यहां पहुंच सकते है।

ये है देवी मां की कथा...
मां मठियाणा भरदारी राजवंशों कि कुल देवी है। प्राचीन लोक कथाओं के अनुसार मां मठियाणा सिरवाड़ी गढ़ के राजवंशों की धियान थी। जिसका विवाह भोट यानि तिब्बत के राजकुमार से हुआ था।

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सौतेली मां द्वारा ढाह वश के कुछ लोगों की मदद से उसके पति कि हत्या कर दी जाती है। पति के मरने की आहत सहजा तिलवाड़ा सूरज प्रयाग में सती होने गई। तब यहीं से मां प्रकट हुईं। देवी सिरवादी गढ़ में पहुंचकर दोषियों को दंड दिया और जन कल्याण के निमित यहीं वास कर लिया।

हर तीसरे साल सहजा मां के जागर लगते हैं। जिसमें देवी कि गाथा का बखान होता है, यहां देवी का उग्र रूप है, बाद मैं यही रूप सौम्य अवस्था में मठियाणा खाल में स्थान लेता है। यहीं से मां मठियाणा का नाम जगत प्रसिद्ध होता है।

मां मठियाणा का दरबार अत्यंत पवित्र और नैसर्गिक आभा लिए जाना जाता है। मां के दर्शन कर पुण्य लाभ आप भी अर्जित करें। मठियाणा देवी माता शक्ति का काली रूप हैं और ये स्थान देवी का सिद्धि-पीठ है। ये अपने आप में आस्था और विश्वास का प्रतीक है।

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कुछ अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि माता के अग्नि में सती होने पर भगवान शिव जब उनके शरीर को लेकर भटक रहे थे तब माता सती का शरीर का एक भाग यहां गिरा, बाद में इस भाग माता मठियाणा देवी कहा गया। दर्शन के लिए आप रुद्रप्रयाग से तिलबाड़ा होते हुए यहां आसानी से सड़क के मार्ग से पहुंच सकते हैं।

ग्राम पंचायत जखोली में ब्राह्मणों के द्वारा राज राजेश्वरी मां मठियाणा मूर्ति की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा कराई जाती है। जिसमें क्षेत्रीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। ब्राह्मण वैदिक मंत्रोच्चारण एवं ढोल नगाड़ों के साथ राज राजेश्वरी मां मठियाणा की पूजा करते हैं और प्राण प्रतिष्ठा करते हैं। कुल मिलाकर कहें तो जब आप खुद को इस धरा पर पाएंगे तो दुनिया से अलग खुद को महसूस करेंगे। बताया जाता है कि मां मठियाणा सबसे जागृत देवियों में से एक हैं।

मान्यता है जो भी भक्त इस शक्ति पीठ में आता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इस स्थान पर मठियाणा माई को भगवान शिव शंकर ने साक्षात दर्शन दिए थे।

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