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इसरो को बड़ा झटका: PSLV-C62 मिशन विफल, लगातार दूसरी बार तीसरे चरण में आई खराबी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का पीएसएलवी-सी62 मिशन तीसरे चरण में आई तकनीकी खराबी के कारण विफल हो गया। डीआरडीओ के 'अन्वेष' सहित 16 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने का यह वाणिज्यिक मिशन अधूरा रह गया।

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PSLV-C62

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरता इसरो का पीएसएलवी-सी62 रॉकेट। लॉन्चिंग के शुरुआती चरण सफल रहे, लेकिन तीसरे चरण में आई विसंगति ने मिशन को असफल बना दिया। (Photo/ISRO)

PSLV-C62 Failure: देश की सामरिक जरूरतों से जुड़े उच्च-कोटि के रडार तथा हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के प्रयासों के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बड़ा झटका लगा है। इसरो का सबसे भरोसेमंद धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-62 (PSLV-C62) इस वर्ष की पहली लॉन्चिंग में सफल नहीं हो सका। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से रॉकेट ने सेामवार सुबह 10.18 बजे उड़ान भरी। शुरुआत में रॉकेट सही दिखा में बढ़ा, लेकिन प्रक्षेपण के 6 मिनट 20 सेकंड बाद यह निर्धारित प्रक्षेप पथ से भटक गया। 32 वर्ष के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब पीएसएलवी लगातार दूसरे मिशन में विफल रहा है।

इससे पहले 18 मई 2025 को पीएसएलवी-सी61 मिशन भी लगभग इसी समय-सीमा पर विफल हुआ था, जब सी-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार उपग्रह ईओएस-09 को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका था। दोनों ही मामलों में रॉकेट का प्रदर्शन तीसरे चरण तक सामान्य रहा, लेकिन तीसरे ठोस चरण के अंत में आई विसंगति मिशन विफलता का कारण बनी। इस मिशन से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह ईओएस एन-1 (अन्वेष) सहित कुल 16 उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाना था। इनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी उपग्रह शामिल थे। इन उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो की वाणिज्यिक इकाई न्यू-स्पेस इंडिया लिमिटेड (एन-सिल) ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू करार किए थे। यह पहला मौका है, जब भारत का कोई वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन विफल हुआ है।

कई महत्वपूर्ण प्रयोग होने थे

मिशन के तहत भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोग भी प्रस्तावित थे। इनमें कक्षा में मौजूद अंतरिक्षयानों में ईंधन भरकर उनकी कार्य अवधि बढ़ाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने और उनका विश्लेषण करने तथा पीएसएलवी के चौथे चरण पीएस-4 को नियंत्रित तरीके से दक्षिण प्रशांत महासागर में गिराने जैसे परीक्षण शामिल थे। मिशन की असफलता से इन सभी प्रयोगों पर फिलहाल विराम लग गया है।

विफलता की जांच करेंगे : नारायणन

इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है और विफलता निवारण समिति (एफएसी) गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। लगातार दूसरी बार तीसरे चरण में आई विफलता ने पीएसएलवी की विश्वसनीयता और पहले गठित समिति की सिफारिशों पर उठे सवालों को और गहरा कर दिया है।