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Karva Chauth 2020 : करवा चौथ के दिन महिलाएं क्यों करती हैं चंद्रमा की पूजा

करवा चौथ Karva Chauth 2020 देशभर में बड़े उल्लास से मनाई जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं। पति की लंबी उम्र के साथ उसकी सफलता, समृद्धि की भी चौथ माता से प्रार्थना करती हैं। इस व्रत में चांद का बहुत अधिक महत्व हैं।

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Karva Chauth 2020

Karva Chauth 2020

नई दिल्ली। करवा चौथ Karva Chauth 2020 देशभर में बड़े उल्लास से मनाई जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं। पति की लंबी उम्र के साथ उसकी सफलता, समृद्धि की भी चौथ माता से प्रार्थना करती हैं। इस व्रत में चांद का बहुत अधिक महत्व हैं। ऐसी मान्यता है कि जो सुहागन स्त्री करवा चौथ का निर्जला व्रत करती हैं और व्रत पूर्ण होने पर चौथ के चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं उनके पति की लंबी उम्र होती है। यह व्रत रात को चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है। इससे एक खास परंपरा भी जु़डी है। करवा चौथ का चांद हमेशा छलनी से ही देखा जाता है।

क्यों देखते है छलनी से चांद
करवा चौथ व्रत की कथा के अनुसार, एक बार किसी बहन को उसके भाइयों ने भोजन कराने के लिए छल से चांद की बजाय छलनी की ओट में दीपक दिखाकर भोजन करवा दिया था। ऐसा करने से उसका व्रत खंडित हो गया। इसके पश्चात उसने पूरे साल चतुर्थी का व्रत किया। एक साल बाद जब पुन: करवा चौथ आई तो उसने विधिपूर्वक व्रत किया और उसे सौभाग्य की प्राप्त हुई। उस करवा चौथ पर उसने हाथ में छलनी लेकर चांद के दर्शन किए। छलनी का एक रहस्य यह भी है कि कोई छल से उनका व्रत भंग न कर दे, इसलिए छलनी के जरिए बहुत बारीकी से चंद्रमा को देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है।

धार्मिक आधार
धार्मिक आधार ऐसा कहा जाता है कि चंद्रमा भगवान ब्रह्मा का रूप है। एक मान्यता यह भी है कि चांद को दीर्घायु का वरदान प्राप्त है और चांद की पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है। इसके अलावा चद्रंमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक भी होता है। यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं छलनी से चांद को देखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। ऐसी मान्यता है कि जो सुहागन स्त्री करवा चौथ का निर्जला व्रत करती हैं और व्रत पूर्ण होने पर चौथ के चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं उनके पति की लंबी उम्र होती है।

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पूजा की थाली
चंद्रमा के दर्शन के लिए थाली सजाएं। थाली में दीपक, सिन्दूर, अक्षत, कुमकुम, रोली तथा चावल की बनी मिठाई या सफेद मिठाई रखें। संपूर्ण श्रृंगार करें और करवे में जल भर लें। मां गौरी और गणेश की पूजा करें। चंद्रमा के निकलने पर छलनी से या जल में चंद्रमा को देखें। अर्घ्य दें, करवा चौथ व्रत की कथा सुनें. उसके बाद अपने पति की लंबी आयु की कामना करें। अपनी सास या किसी वयोवृद्ध महिला को श्रृंगार का सामान दें तथा उनसे आशीर्वाद लें।

करवा चौथ के ना करें ये काम
करवा चौथ व्रत के दिन व्रती स्त्रियों को इस व्रत के नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। कहा जाता है कि करवा चौथ व्रत के दिन सिलाई-कढ़ाई नहीं करनी चाहिए। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस दिन व्रती स्त्री को सब्जी नहीं काटने चाहिए और ना ही कटे हुए फल, सब्जी या दाल का सेवन करना चाहिए। इस व्रत में धारदार वस्तुओं का प्रयोग करना मना होता है। इन वस्तुओं में चाकू, कैंची, सूई, तलवार और चौपर शामिल हैं। कहते हैं कि इनका प्रयोग करने से पति का अमंगल हो सकता है। इसलिए प्रयास करें कि आप यह कार्य ना करें।