24 अप्रेल 2015 को शुक्रवार है। इस दिन शुभ वि.सं.- 2072, संवत्सर नाम- कीलक, अयन- उत्तर,
शाके- 1937, हिजरी- 1436, मु. मास- रज्जब-4, ऋतु- ग्रीष्म, मास- वैशाख, पक्ष- शुक्ल है।
शुभ तिथि षष्ठी नंदा संज्ञक तिथि अपराह्न 3.35 तक, तदन्तर सप्तमी भद्रा संज्ञक तिथि रहेगी। षष्ठी तिथि में पितृकर्म, काष्ठकर्म, उबटन व यात्रा को छोड़कर विवाहादि मांगलिक कार्य, वास्तु और युद्ध सम्बंधी कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं।
सप्तमी तिथि में यथाआवश्यक विवाह, संगीत, नृत्य, यात्रा, गृह प्रवेश, उपनयन, वधू-प्रवेश, उपनयन, वधू-आमंत्रण, प्रतिष्ठा और गृहारम्भ आदि कार्य शुभ रहते हैं। षष्ठी तिथि में जन्मा जातक कुछ-कुछ अहंकारी, फिसादी, पर सुन्दर, ऐश्वर्य का भोक्ता, विद्यावान व कीर्तिवान होता है।
नक्षत्रआर्द्रा नक्षत्र दोपहर 12.06 तक, तदुपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा। आर्द्रा नक्षत्र में शत्रुमर्दन, छेदन, बन्धन, मिलाप, उच्चाटन आदि कार्य सिद्ध होते हैं और विद्यादि कार्य शुभ रहते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र में शांति, पुष्टता, गमन, अलंकार, घर, व्रत-उपवास तथा कृषि सम्बंधी समस्त कार्य शुभ रहते हैं।
जरूर पढ़िए- ये हैं चुटकी भर सिंदूर से जुड़े 5 रहस्यआर्द्रा नक्षत्र में जन्मा जातक नम्र स्वभाव, बुद्धिमान, साहसी, अर्थाभाव में रहने वाला, अल्पधनी, थोड़ा क्षुब्ध, क्षुद्र व संकीर्ण विचारधारा वाला, धार्मिक कार्यों का व्यर्थ प्रदर्शन करने वाला, क्रय-विक्रय में निपुण और थोड़ा उग्र प्रकृति वाला होता है। इनका भाग्योदय लगभग 25 वर्ष की आयु के बाद होता है।
योगसुकर्मा नामक योग सायं 6.29 तक, तदन्तर धृति नामक योग रहेगा। दोनों ही नैसर्गिक शुभ योग हैं।
विशिष्ट योगदोष समूह नाशक रवियोग नामक शक्तिशाली शुभ योग दोपहर 12.05 तक, इसके बाद अगले दिन सूर्योदय तक सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग तथा अपराह्न 3.35 तक कुमार योग नामक शुभ योग रहेगा।
करणतैतिल नामकरण अपराह्न 3.35 तक, तदन्तर गरादि करण रहेंगे।
चंद्रमाचंद्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि मिथुन राशि में रहेगा।
व्रतोत्सवशुक्रवार को श्रीरामानुजाचार्य जयंती, चन्दन छठ (बंगाल) तथा मानव एकता दिवस है।
शुभ कार्यों के मुहूर्तउक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार शुक्रवार को देवप्रतिष्ठा, द्विरागमन, मुण्डन, कर्णवेध, अन्नप्राशन आदि के पुनर्वसु नक्षत्र में, गृहप्रवेश का यथा आवश्यक आर्द्रा व पुनर्वसु नक्षत्र में (नक्षत्र त्याज्य) अशुद्ध और विद्यारम्भ का आद्र्रा नक्षत्र में शुभ मुहूर्त है।
वारकृत्य कार्यशुक्रवार को सामान्य तौर से नृत्य-वाद्य-गीत-कलारम्भ, सांसर्गिक कार्य, धन व भूमि सम्बंधी कार्य, नवीन वस्त्राभूषण धारण व कृषि सम्बंधी कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं।
दिशाशूलशुक्रवार को वैसे पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है, पर चन्द्रमा मिथुन राशि में रहेगा। मिथुन राशि के चन्द्रमा का वास पश्चिम दिशा में रहेगा। जो पश्चिम की यात्रा में सम्मुख होगा। यात्रा में सम्मुख चन्द्रमा धनलाभ कराने वाला व दाहिना चन्द्रमा सुखदायक माना गया है।
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