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बच्चों की नजर से प्रकृति, प्यार और अच्छी सीख की कहानियां

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 83 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (17 जून 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 83 में भेजी गई सराहनीय कहानियां दी जा रही हैं।
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जयपुर

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Tasneem Khan

Jun 24, 2026

प्रेरणादायक कहानियां, नैतिक कहानियां, children's moral

stories in Hindi, short stories for kids,

सुबह की सैर

रिभव चौधरी, उम्र: 8 वर्ष
रानी एक प्यारी बच्ची थी। एक दिन वह सुबह-सुबह सैर करने निकली। आसमान में सूरज चमक रहा था और चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। ठंडी हवा चल रही थी, जिससे रानी बहुत खुश हुई। रास्ते में उसने चिड़ियों की मीठी आवाज सुनी और सुंदर पेड़ों को देखा। वह खुशी से गुनगुनाते हुए बगीचे में घूमने लगी। तभी उसकी नजर रास्ते पर पड़े कचरे पर पड़ी। रानी ने उसे उठाकर कूड़ेदान में डाल दिया। घर लौटकर उसने अपने माता-पिता को यह बात बताई। वे उसकी समझदारी और स्वच्छता की आदत से बहुत खुश हुए।
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सफलता की कुंजी

कृति भाटिया, उम्र: 8 वर्ष
लता एक बहुत समझदार, होशियार और मेहनती लड़की है। वह रोज सुबह जल्दी उठती है और पास के बगीचे में सैर करने जाती है। वहां की ताजी हवा, हरे-भरे पेड़ और रंग-बिरंगे फूल उसे बहुत अच्छे लगते हैं। सुबह की शुद्ध हवा से उसके शरीर को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। सुबह की सैर से लता का शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है। वह हमेशा सकारात्मक सोच रखती है और पूरे उत्साह से पढ़ाई करती है। इसी कारण वह विद्यालय में सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त करती है और अपनी कक्षा में प्रथम आती है। लता अपने मित्रों से भी कहती है, "स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है।"
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छोटी गुड़िया की सैर

जसवीर मेहरा, उम्र: 13 वर्ष
एक सुंदर सुबह थी। आसमान में सूरज चमक रहा था और सफेद बादल तैर रहे थे। गांव में एक छोटी लड़की रहती थी, जिसका नाम गुड़िया था। वह गुलाबी रंग की सुंदर फ्रॉक पहनकर घर से बाहर घूमने निकली। गुड़िया बहुत खुश थी। चलते-चलते उसने एक तितली को फूलों पर मंडराते देखा। वह तितली के पीछे दौड़ी, लेकिन तितली उड़कर दूर चली गई। रास्ते में उसे एक छोटा सा पौधा दिखाई दिया, जो सूख रहा था। गुड़िया ने पास के नल से पानी लाकर उस पौधे में डाला। पानी पाकर पौधा ताजा और हरा-भरा दिखाई देने लगा। थोड़ी दूर जाने पर उसे एक घायल चिड़िया मिली। उसने प्यार से चिड़िया को उठाया और सुरक्षित जगह पर रख दिया। चिड़िया धीरे-धीरे ठीक होने लगी और उड़ गई।
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प्रकृति की सुंदरता

हर्षिता सुमन, उम्र: 12 वर्ष
एक दिन सुबह का समय था। आसमान में सूरज चमक रहा था और हल्के-हल्के बादल तैर रहे थे। चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। फूल खिले हुए थे और उनकी खुशबू वातावरण को सुगंधित बना रही थी। गांव में रहने वाली एक छोटी लड़की रानी बहुत खुश थी। रानी अपने घर से बाहर निकली और घूमने के लिए रास्ते पर चल पड़ी। रास्ते में उसे एक बड़ा हरा-भरा पेड़ दिखाई दिया। पेड़ पर कई चिड़ियां चहचहा रही थीं। थोड़ी दूर पर गांव के छोटे-छोटे घर दिखाई दे रहे थे, जिनकी चिमनियों से धुआं निकल रहा था। रानी ने सोचा कि प्रकृति कितनी सुंदर होती है। हमें पेड़-पौधों और फूलों की रक्षा करनी चाहिए।
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खुशियों का सफर

अनुष्का नागर, उम्र: 11 वर्ष
सुबह की ताजी हवा में अनुष्का बहुत उत्साहित थी। आज स्कूल की छुट्टियां शुरू हो गई थीं, इसलिए उसने अपनी मनपसंद गुलाबी फ्रॉक पहनी और दौड़ते हुए बगीचे की ओर निकल पड़ी। आसमान में सूरज दादा मुस्कुरा रहे थे और ठंडी हवा चल रही थी। रास्ते के दोनों तरफ लगे लाल और पीले फूलों को देखकर अनुष्का का मन खुशी से झूम उठा। वह तितलियों के पीछे भागते हुए खिलखिलाकर हंस रही थी। हरी-भरी घास और छोटे-छोटे मिट्टी के घरों के बीच से गुज़रते हुए उसे ऐसा लगा जैसे वह किसी परियों की कहानी की दुनिया में आ गई हो।
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जादुई बीज

कृष्णा चौधरी, उम्र: 12 वर्ष
एक दिन गुड़िया गांव में घूम रही थी। चलते-चलते उसे रास्ते में एक चमकदार बीज मिला। उसने उसे खेत के किनारे बो दिया और रोज पानी देने लगी। कुछ दिनों बाद वहां एक अनोखा पौधा उग आया। उस पर रंग-बिरंगे फूल खिले थे। जब हवा चलती, तो फूल मीठी धुन सुनाते थे। गांव के बच्चे रोज उस पौधे के पास खेलने आने लगे। सबको बहुत आनंद आता था। गुड़िया खुश थी कि उसके छोटे से प्रयास ने पूरे गांव के चेहरों पर मुस्कान ला दी।
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मीनू की जादुई सुबह

लक्ष्यराज बैरागी, उम्र: 7 वर्ष
एक प्यारे से गांव में मीनू नाम की एक नटखट और खुशमिजाज लड़की रहती थी। उसे सुबह-सुबह प्रकृति के बीच घूमना बहुत पसंद था। एक दिन जैसे ही पूरब से सूरज निकला, चारों तरफ सुनहरी धूप बिखर गई। मौसम को सुहाना देखकर मीनू ने अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनी और खुशी-खुशी घर से बाहर निकल पड़ी। गांव का पगडंडी वाला रास्ता बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। रास्ते के दोनों ओर लाल फूल खिले थे। सुबह की ताजी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट ने मीनू के मन को जोश और उमंग से भर दिया।
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चिंकी और अनोखा रास्ता

निमिषा जैन, उम्र: 9 वर्ष
एक दिन सात साल की चिंकी अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनकर घूमने निकली। सुबह का मौसम बहुत सुहाना था। चलते-चलते चिंकी एक ऐसे रास्ते पर पहुंची, जहां उसने पहले कभी नहीं देखा था। उस रास्ते पर पत्थरों की एक सुंदर कतार बनी हुई थी। चिंकी ने जैसे ही पहले पत्थर पर कदम रखा, बगीचे के पेड़-पौधे और फूल खुशी से झूमने लगे। रास्ते के दोनों तरफ छोटे-छोटे सुंदर घर बने हुए थे। तभी चिंकी को रास्ते पर एक सूखा हुआ छोटा पौधा दिखा। चिंकी रुकी और उसने पास पड़े एक लोटे से उस पौधे में पानी डाल दिया। पानी मिलते ही पौधा खिल उठा।
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नन्ही गुड़िया का सुंदर गांव

यथार्थ तिवारी, उम्र: 8 वर्ष
एक सुंदर गांव में गुड़िया नाम की एक छोटी बच्ची रहती थी। वह बहुत खुशमिजाज और प्रकृति प्रेमी थी। एक दिन सुबह-सुबह वह घर से बाहर घूमने निकली। आगे बढ़ते हुए उसने एक छोटे पौधे को सूखता हुआ देखा। उसे लगा कि यदि समय पर पानी नहीं मिला तो पौधा मर जाएगा। वह तुरंत घर गई और एक छोटी बाल्टी में पानी भरकर लाई। उसने पौधे को पानी दिया और उसके आसपास की मिट्टी भी ठीक कर दी। कुछ दिनों बाद वह पौधा हरा-भरा हो गया और उस पर सुंदर फूल खिल गए। गांव के बच्चों ने भी उससे प्रेरणा लेकर पौधे लगाना शुरू कर दिया।
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पर्यावरण का संकल्प

आयुषी, उम्र: 9 वर्ष
एक छोटी सी बच्ची रानी अपने गांव की पगडंडी पर खुशी-खुशी घूमने निकली। चारों ओर हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और सुंदर घर थे। आसमान में चमकता सूरज देखकर रानी बहुत खुश हुई। वह चलते-चलते फूलों को निहारती और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेती रही। रास्ते में रानी ने सोचा कि प्रकृति हमें कितनी सुंदर चीजें देती है। उसने निश्चय किया कि वह पेड़-पौधों की देखभाल करेगी और अपने दोस्तों को भी पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करेगी।
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सैर का आनंद

हितांशी चौबीसा, उम्र: 8 वर्ष
एक सुंदर सुबह थी। आसमान में सूरज चमक रहा था और हल्के-हल्के बादल तैर रहे थे। रानी नाम की एक छोटी लड़की गुलाबी फ्रॉक पहनकर सैर करने निकली। वह गांव की पगडंडी पर खुशी-खुशी चल रही थी। रास्ते के दोनों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले थे। पेड़ों पर पक्षी मधुर गीत गा रहे थे। रानी फूलों की सुंदरता देखकर मुस्कुरा रही थी। उसने तितलियों को उड़ते हुए देखा और उनके पीछे थोड़ी दूर तक दौड़ी। ठंडी हवा चल रही थी, जिससे मौसम सुहावना लग रहा था।
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मीरा की सुहानी सुबह

मिनाक्षी कारगवाल, उम्र: 11 वर्ष
एक बहुत ही प्यारा सा गांव था, जहां चारों तरफ हरियाली और शांति थी। उसी गांव में मीरा नाम की एक छोटी और चुलबुली बच्ची रहती थी। एक दिन सुबह-सुबह जब सूरज अपनी सुनहरी किरणें बिखेर रहा था, मीरा बहुत खुश थी। वह अपने घर से बाहर निकलकर बगीचे के रास्ते पर टहलने के लिए निकल पड़ी। रास्ते के दोनों तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले थे और ठंडी हवा चल रही थी। मीरा अपनी दोस्त की जन्मदिन पार्टी में जाने के लिए बहुत उत्साहित थी। मीरा के चेहरे की मुस्कान यह बता रही थी कि उसका दिन बहुत ही शानदार बीतने वाला है।
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नन्ही रिद्धि और फूलों का बगीचा

शान्वी गुप्ता, उम्र: 10 वर्ष
रिद्धि एक प्यारी और खुशमिजाज लड़की थी। वह अपने गांव में रहती थी। एक दिन सुबह-सुबह वह घर के पास बनी पगडंडी पर घूमने निकली। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। घूमते-घूमते उसकी नजर एक छोटे पौधे पर पड़ी, जो सूखने लगा था। वह तुरंत घर गई और पानी लेकर आई। उसने पौधे को पानी दिया और उसकी देखभाल करने लगी। कुछ दिनों बाद पौधा हरा-भरा हो गया और उस पर सुंदर फूल खिल गए। यह देखकर रिद्धि बहुत खुश हुई।
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नन्ही आर्वी और फूलों वाला रास्ता

वैदेही गर्ग, उम्र: 8 वर्ष
एक छोटे से गांव में आर्वी नाम की 8 साल की प्यारी बच्ची रहती थी। वह बहुत खुशमिजाज और मददगार थी। एक सुबह आर्वी अपने घर से निकलकर गांव के रास्ते पर घूमने लगी। चलते-चलते उसने देखा कि रास्ते के किनारे लगे फूल थोड़े मुरझाए हुए हैं। आर्वी को फूलों से बहुत प्यार था। वह जल्दी से घर गई, एक छोटी बाल्टी में पानी भरकर लाई और सभी पौधों को पानी देने लगी। कुछ दिनों तक वह रोज ऐसा करती रही। धीरे-धीरे फूल फिर से खिल उठे।
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वादियों के बीच

मितांश मेनारिया, उम्र: 9 वर्ष
शहर की तपती गर्मी से दूर, चार्वी इस बार पहाड़ों की वादियों में पहुंच चुकी थी। वह इतनी उत्साहित थी कि जैसे ही गाड़ी रुकी, वह अपनी गुलाबी फ्रॉक लहराते हुए बाहर दौड़ पड़ी। सामने पहाड़ों के ऊपर चमकता सूरज, रुई जैसे तैरते बादल और ढलानों पर बने छोटे-छोटे लकड़ी के घर किसी जादुई दुनिया जैसे लग रहे थे। ठंडी हवा के झोंकों ने उसकी सारी थकान मिटा दी।
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स्वच्छ गांव

अयान बेनीवाल, उम्र: 8 वर्ष
एक दिन बच्चों ने देखा कि रास्ते पर कचरा फैला हुआ है। उन्होंने मिलकर सफाई अभियान शुरू किया। सभी बच्चों ने कचरा इकट्ठा करके डस्टबिन में डाला। कुछ बड़े लोग भी उनकी मदद करने लगे। थोड़ी ही देर में पूरा रास्ता साफ हो गया। गांव के लोग बच्चों की सराहना करने लगे। बच्चों ने समझा कि स्वच्छता से स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों बढ़ते हैं।
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नेतल की सुहानी सुबह

जीविका शेखावत, उम्र: 8 वर्ष
एक प्यारे से छोटे गांव में नेतल नाम की एक मासूम और चुलबुली बच्ची रहती थी। उसे प्रकृति के बीच समय बिताना बहुत पसंद था। एक दिन सुबह-सुबह, जब आसमान बिल्कुल साफ था, नेतल की आंखें खुलीं। बाहर का नजारा देखकर उसका मन मयूर हो उठा। उसने झटपट अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनी और खुशी से झूमती हुई घर के रास्ते पर निकल पड़ी। रास्ते के दोनों ओर हरी-भरी घास और ऊंचे पेड़ इस दृश्य को और भी खूबसूरत बना रहे थे।
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मीनू की खुशी

रक्षिता चौधरी, उम्र: 9 वर्ष
एक सुंदर गांव में मीनू नाम की एक छोटी चुलबुली लड़की रहती थी। मीनू को सुबह का समय बहुत पसंद था। एक दिन जैसे ही आसमान में चमकीला सूरज निकला, मीनू अपनी सुंदर बैंगनी फ्रॉक पहनकर घर से बाहर आ गई। चारों तरफ हरी-भरी घास बिछी थी और सुंदर फूल खिले थे। सुबह की ताजी हवा और इस खूबसूरत नजारे को देखकर मीनू का मन खुशी से भर गया। वह अपने चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान लेकर रास्ते पर मस्ती में दौड़ने लगी।
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खुशी की अनोखी सैर

वैष्णवी गर्ग, उम्र: 7 वर्ष
एक दिन पिंकी ने अपनी पसंदीदा गुलाबी पोशाक पहनी और अपने बालों में एक सुंदर रिबन लगाया। चमकीला सूरज आसमान में मुस्कुरा रहा था और ठंडी हवा चल रही थी। पिंकी अपने घर के पास के बगीचे में टहलने निकली। बगीचे का रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा और सुंदर था। रास्ते के दोनों तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले थे। फूलों को देखकर पिंकी का मन खुशी से झूम उठा और वह तितलियों के पीछे दौड़ने लगी।
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पिंकी की सुबह की सैर

प्रारब्ध नामा, उम्र: 7 वर्ष
पिंकी को सुबह-सुबह उठना और घूमना बहुत पसंद था। एक दिन सुबह पिंकी अपनी गुलाबी फ्रॉक पहनकर घर से बाहर निकल पड़ी। आसमान में छोटे-छोटे सफेद बादल तैर रहे थे और ठंडी हवा चल रही थी। पिंकी अपने गांव के सुंदर रास्ते पर खुशी से दौड़ने लगी। रास्ते के दोनों तरफ हरे-भरे घास के मैदान थे, जहां रंग-बिरंगे लाल और गुलाबी फूल खिले हुए थे। चिड़ियों की चहचहाहट और सुंदर नजारे को देखकर पिंकी का मन खुशी से झूम उठा।
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पाखी और फूलों का बगीचा

पाखी, उम्र: 12 वर्ष
एक गांव में पाखी नाम की एक प्यारी लड़की रहती थी। एक दिन वह सुबह-सुबह घूमने निकल गई। रास्ते के दोनों ओर हरी घास और रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। चलते-चलते वह एक छोटे से बगीचे तक पहुंच गई। वहां उसने देखा कि कुछ बच्चे फूल तोड़ रहे हैं। उसने उन्हें समझाया कि फूल तोड़ने से पौधों को नुकसान होता है। हमें फूलों की सुंदरता का आनंद लेना चाहिए, लेकिन उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। बच्चों ने पाखी की बात समझी और फूल तोड़ना बंद कर दिया।
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सूरज की दोस्त

पवन गुर्जर, उम्र: 11 वर्ष
रिया नाम की एक छोटी लड़की थी। वह रोज सुबह पगडंडी पर नाचते-कूदते चलती। रिया को लगता था कि सूरज सिर्फ उसे देखकर मुस्कुराता है। रिया के पास खिलौने या दोस्त नहीं थे। उसके दोस्त तो लाल फूल, हरे पेड़ और सूरज थे। एक दिन मां ने पूछा, "बेटा, तुम अकेले भी इतनी खुश कैसे रहती हो?" रिया ने कहा, "मां, मेरे पास दुनिया का सबसे बड़ा दोस्त है। वह रोज सुबह मुझसे मिलने आता है और मुझे गर्माहट देता है।"
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गुड़िया की खुशी

अहाना जैन, उम्र: 9 वर्ष
एक सुंदर गांव में गुड़िया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। वह हमेशा खुश रहती और सबकी मदद करती थी। एक दिन सुबह-सुबह वह अपने घर से बाहर निकली। रास्ते में उसे एक बुजुर्ग दादी मां उदास बैठी दिखाई दी। गुड़िया उनके पास गई और प्यार से उनका हाल पूछा। गुड़िया कुछ देर उनके साथ बैठी और उन्हें हंसाने लगी। आगे बढ़ते हुए गुड़िया ने एक छोटे बच्चे को रोते देखा। उसका खिलौना टूट गया था। गुड़िया ने उसे अपना एक खिलौना दे दिया।
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सुंदर सुबह

भूविक देव, उम्र: 7 वर्ष
एक दिन सुबह-सुबह राधा अपने घर के बाहर घूमने निकली। आसमान साफ था, सूरज चमक रहा था और हल्की-हल्की हवा चल रही थी। चारों तरफ हरी-भरी घास, रंग-बिरंगे फूल और पेड़ बहुत सुंदर लग रहे थे। राधा खुशी-खुशी पगडंडी पर चल रही थी। रास्ते के दोनों ओर छोटे-छोटे घर थे। चलते-चलते उसने सोचा, "कितनी सुंदर है यह प्रकृति! हमें पेड़-पौधों और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।" वह मुस्कुराई और आगे बढ़ गई।
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मीरा का सुहाना सफर

निवीका बायती, उम्र: 7 वर्ष
एक सुंदर गांव में मीरा नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। एक दिन मौसम बहुत सुहाना था। मीरा ने अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनी और घूमने निकल पड़ी। रास्ते के दोनों तरफ हरे-भरे खेत और सुंदर घर थे। किनारे लाल और गुलाबी रंग के प्यारे फूल खिले हुए थे। तभी उसे याद आया कि आज उसके पक्के दोस्त रोहन का जन्मदिन है। वह उसी की बर्थडे पार्टी में जा रही थी। वह तेजी से अपने दोस्त के घर की तरफ बढ़ने लगी।
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मीरा का सुहाना सफर

निवीका बायती, उम्र: 7 वर्ष
एक सुंदर गांव में मीरा नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। एक दिन मौसम बहुत सुहाना था। मीरा ने अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनी और घूमने निकल पड़ी। रास्ते के दोनों तरफ हरे-भरे खेत और सुंदर घर थे। किनारे लाल और गुलाबी रंग के प्यारे फूल खिले हुए थे। तभी उसे याद आया कि आज उसके पक्के दोस्त रोहन का जन्मदिन है। वह उसी की बर्थडे पार्टी में जा रही थी। वह तेजी से अपने दोस्त के घर की तरफ बढ़ने लगी।
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धुएं की चिंता

उमंग जोशी, उम्र: 8 वर्ष
एक लड़की है जिसका नाम खुशबू है। जब वह एक दिन सुबह-सुबह बाहर सैर करने के लिए उठी तो आसपास हरियाली, फूल, पौधे और पहाड़ देखकर बहुत खुश हुई। पर तभी उसे कुछ धुआं दिखाई दिया जो एक कारखाने से आ रहा था। जिसे देखकर वह सोचने लगी कि क्या यह हरियाली इसी प्रकार रहेगी या यह धुआं इसकी जगह ले लेगा?
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जादुई फूलों की खोज

चेष्टा गुप्ता, उम्र: 10 वर्ष
प्यारी सी मीनू सुबह-सुबह बगीचे में टहलने निकल पड़ी। अचानक उसे रास्ते में दो रंग-बिरंगे चमकदार फूल दिखे। मीनू को लगा कि फूल उसे पुकार रहे हैं। वह फूलों को छूने वाली थी कि वे उड़ने लगे। मीनू उनके पीछे-पीछे भागी और एक ऐसे बगीचे में पहुंची जहां हर तरफ जादुई फूल खिले थे। उसने महसूस किया कि प्रकृति के यह उपहार कितने सुंदर और मनमोहक हैं।
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खुशियों की राह

रूही कुशवाह, उम्र: 7 वर्ष
एक छोटे से गांव में रिया नाम की एक प्यारी लड़की रहती थी। एक दिन सुबह रिया अपने घर से घूमने निकली। चलते-चलते रिया ने देखा कि रास्ते के किनारे लगे पौधे सूख रहे हैं। वह तुरंत अपने घर गई और एक छोटी बाल्टी में पानी भरकर ले आई। उसने सभी पौधों को पानी दिया। कुछ दिनों बाद वही पौधे हरे-भरे हो गए और उन पर सुंदर फूल खिल उठे। गांव के लोगों ने रिया की प्रशंसा की और पौधे लगाने शुरू कर दिए।
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एक सुंदर दिन और रानी की खुशी

सृष्टि पारीक, उम्र: 9 वर्ष
एक बहुत प्यारी लड़की थी, जिसका नाम रानी था। सूरज चमक रहा था और आकाश में हल्के-हल्के बादल तैर रहे थे। रानी खुशी से अपने घर से बाहर निकल पड़ी। रास्ते के किनारे रंग-बिरंगे फूल खिले थे। रानी ने सोचा कि यदि वह यह सुंदर फूलों का गुलदस्ता अपनी मां को जाकर देगी तो उसे कितनी खुशी मिलेगी। रानी ने घर पहुंचकर फूल अपनी मां को दिए तो मां के चेहरे पर मुस्कान देखकर रानी बहुत खुश हुई।
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ईमानदारी की मिसाल

अर्नव जैन, उम्र: 13 वर्ष
एक छोटे से गांव में रानी नाम की एक समझदार लड़की रहती थी। सुबह-सुबह वह अपनी दादी के घर जाने के लिए निकली। चलते-चलते उसे सड़क के किनारे एक छोटा-सा बटुआ दिखाई दिया। उसमें कुछ पैसे और एक पहचान पत्र था। पहचान पत्र पर लिखे पते को देखकर रानी उस व्यक्ति के घर पहुंची और बटुआ एक बुजुर्ग को लौटा दिया। बुजुर्ग ने इनाम देना चाहा, लेकिन रानी ने मना कर दिया।
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कीमती दिन

प्रनवी अग्रवाल, उम्र: 11 वर्ष
एक दिन रिया घर पर बैठे बोर हो रही थी। तभी उसके दिमाग में एक विचार आया कि उसके पास दस रुपये पड़े हैं जिससे वह आइसक्रीम खा सकती है। वह पास वाली दुकान पर गई और आइसक्रीम खाकर गार्डन में खेलने लगी। तभी थोड़ी दूर उसे उसके पापा दिखे। रिया खुशी-खुशी अपने पापा के साथ घर चली गई।
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सोनल और नाना जी

गर्वित पानेरी, उम्र: 8 वर्ष
सोनल बहुत दिनों के बाद अपने नाना जी से मिलने जा रही थी। वह दौड़ते-दौड़ते जा रही थी। रास्ते में उसे भूख लगी तभी उसने देखा कि वहां पेड़ पर फल लग रहे थे। वहां आम और तरबूज के फल थे। उसने उन्हें खाया। उसके बाद वह नाना जी के घर गई। नाना जी के घर जाते ही उसने नाना जी का आशीर्वाद लिया और उनके साथ खुशी से खेलने लगी।
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मीना का जन्मदिन

आरना भारद्वाज, उम्र: 9 वर्ष
रविवार का दिन था और मीना का जन्मदिन था। उसके दोस्तों ने उसे बहुत सारे उपहार दिए। लेकिन उसकी सबसे अच्छी दोस्त ने उसे केवल एक सुंदर पुस्तक भेंट की। मीना को यह बात अच्छी नहीं लगी। उसकी दोस्त मुस्कुराते हुए बोली, "मीना, मैं एक गरीब परिवार से हूं, इसलिए महंगा उपहार नहीं ला सकी। लेकिन यह पुस्तक तुम्हारे लिए बहुत उपयोगी होगी।" मीना को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माफी मांगी।
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रिया का नया सवेरा

चेतन, उम्र: 12 वर्ष
रिया आज बहुत खुश थी। वह अपने नाना-नानी के गांव आई थी। शहर में तो ऊंची बिल्डिंग और गाड़ियों का शोर था, पर यहां हरियाली थी। रास्ते में रिया ने देखा कि एक छोटा पपीते का पेड़ आंधी में झुक गया है। उसने मिट्टी इकट्ठी की और पेड़ के तने के पास लगा दी, ताकि वह सीधा खड़ा हो जाए। तभी पीछे से नाना की आवाज आई, "शाबाश बिटिया!"
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सुनहरे दिन की सुंदर सैर

योगेश छींपा, उम्र: 9 वर्ष
एक प्यारी और नटखट लड़की थी, जिसका नाम मीनू था। एक सुबह, जब आसमान में सूरज दादा अपनी सुनहरी किरणें बिखेर रहे थे, मीनू ने बाहर घूमने जाने का फैसला किया। मीनू ने अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनी और खुशी से अपने घर से बाहर निकली। चारों ओर हरियाली छाई हुई थी। रंग-बिरंगे फूल खिले थे। मीनू पक्के रास्ते पर दौड़ते हुए प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले रही थी।
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मिन्नी की समझ

सौम्या गर्ग, उम्र: 12 वर्ष
मिन्नी के वार्षिक पेपर खत्म होने के बाद वह गर्मी की छुट्टियों में बहुत आलसी हो गई थी। वह देर रात तक टीवी देखती और सुबह लेट उठती थी, जिससे उसकी सेहत खराब होने लग गई। उसकी मां ने उसे सुबह की सैर के फायदे समझाए। मिन्नी अनमने मन से सुबह घूमने गई तो उगते सूरज, ठंडी हवा और पेड़-पौधों की खुशबू ने उसे खुश कर दिया। मिन्नी की सेहत दोबारा सही हो गई और वह रोज सुबह सैर पर जाने लगी।
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