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बिना गावों के स्थापन के तैयार होगा ओंकारेश्वर अभयारण्य

ओंकारेश्वर अभयारण्य का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। इंदिरा सागर से लगे वन क्षेत्र में 61407.9 हैक्टेयर में अभयारण्य तैयार होगा। बरसों के इंतजार के बाद अब कहीं जाकर जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दी है। अब वन विभाग द्वारा ओंकारेश्वर अभ्यारण्य का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।ओंकारेश्वर अभयारण्य बनाने को लेकर […]

खंडवाJul 08, 2024 / 11:06 am

Deepak sapkal

Omkareshwar Sanctuary: ओंकारेश्वर अभयारण्य का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। इंदिरा सागर से लगे वन क्षेत्र में 61407.9 हैक्टेयर में अभयारण्य तैयार होगा।

ओंकारेश्वर अभयारण्य का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। इंदिरा सागर से लगे वन क्षेत्र में 61407.9 हैक्टेयर में अभयारण्य तैयार होगा।

ओंकारेश्वर अभयारण्य का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। इंदिरा सागर से लगे वन क्षेत्र में 61407.9 हैक्टेयर में अभयारण्य तैयार होगा।

बरसों के इंतजार के बाद अब कहीं जाकर जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दी है। अब वन विभाग द्वारा ओंकारेश्वर अभ्यारण्य का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।ओंकारेश्वर अभयारण्य बनाने को लेकर शनिवार को वन विभाग के कार्यालय में विशेष बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी वानखेडे, मांधाता विधायक नारायण पटेल, पंधाना विधायक छाया मोरे, कलेक्टर अनूप कुमार सिंह और डीएफओ राकेश डामोर मौजूद रहे।
अभ्यारण का प्रेजेंटेशन टीवी स्क्रीन के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को दिखाया गया और विस्तार से चर्चा की गई। डीएफओ डामोर ने बताया कि प्रेजेंटेशन के साथ ही अभ्यारण को लेकर सभी बातें जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखी। सभी जन प्रतिनिधियों ने अभयारण्य बनाने जाने को लेकर सहमति प्रदान की है। अब इसमें ग्राम सभा की सहमति भी प्राप्त की जाकर आगे की कार्य योजना तैयार की जाएगी। शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव के रूप में तीर्थ नगरी ओमकारेश्वर में साक्षात विराजमान है। ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की आदम कद विशाल प्रतिमा विराजमान होने के पश्चात लगातार श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ रही है, इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से भी तैयार किया जा रहा है, वन विभाग द्वारा बैक वॉटर स्थित वन क्षेत्र में अभ्यारण का निर्माण इस क्षेत्र के विकास को गति देगा वही बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

काली-सिंघ लिंक परियोजना ने रो रखी थी राह

ओंकारेश्वर अभयारण्य की राह काली-सिंघ लिंक परियोजना ने रोक रखी थी। परियोजना के तहत पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा था। पाइप लाइन प्रस्तावित ओंकारेश्वर अभ्यारण्य से ही होकर गुजर रही है। इसके चलते अभ्यारण्य की कार्रवाई कागजों के बाहर नहीं आ पाई थी।

नहीं करना पड़ेगा विस्थापन

ओंकारेश्वर अभयारण्य जो नक्शा बनाया गया है। इसे गांवों से दो से चार किमी दूर रखकर बनाया गया है। एक भी गांव इस अभयारण्य के विकसित होने के समय बीच में नहीं आएगा। गांव विस्थापित नहीं होंगे। इसमें पुनासा रेंज, चांदगढ़ वन परिक्षेत्र के अलावा देवास जिले का वनक्षेत्र शामिल है। ओंकारेश्वर अभयारण्य की दो किमी की परिधि में 20 वनग्राम व राजस्व ग्राम हैं। इसी तरह से पांच किमी की परिधि में 33 गांव हैं।

21 साल से अभयारण्य नहीं बन पाया

नर्मदा नदी पर साल 1984 में इंदिरा सागर परियोजना की मंजूरी के साथ ही ओंकारेश्वर अभ्यारण्य बनना था। अभ्यारण्य बनाने की शर्त पर ही डेम बनाने को मंजूरी दे दी गई थी। लाखों पेड़ों की बली लेकर इंदिरा सागर डेम साल 2003 में तैयार तो हो गया लेकिन अभ्यारण्य अब तक नहीं बन पाया। इस बीच कई बैठके हुई प्रस्ताव भी बने लेकिन यह सब कागजों तक ही सीमित होकर रह गया। करीब 21 साल से अभ्यारण्य केवल चर्चा में ही बना हुआ हैं।
प्रस्तावित ओंकारेश्वर अभ्यारण्य का वन परिक्षेत्र
आरक्षित वन 277851.66 हेक्टेयर

संरक्षित वन 4764.80 हेक्टेयर

अवर्गीकृत वन 1156.77 हेक्टेयर

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