scriptपोलारिस डॉन :पहली बार निजी स्पेसवॉक मिशन की तैयारी, इसी महीने हो सकता है लॉन्च | Preparations underway for the first private spacewalk mission, may launch this month Polaris Dawn: Preparations underway for the first private spacewalk mission, may launch this month | Patrika News
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पोलारिस डॉन :पहली बार निजी स्पेसवॉक मिशन की तैयारी, इसी महीने हो सकता है लॉन्च

पोलारिस डॉन को स्पेस में इंसानों के लंबे समय तक रहने के अनुरूप डिजाइन किया गया है। यह एक साइंस-फिक्शन जैसा प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद इंसानों को पृथ्वी की कक्षा, चांद और मंगल ग्रह तक ले जाना है।

जयपुरJul 06, 2024 / 11:54 pm

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वाशिंगटन. अब तक नासा के अभियानों में अंतरिक्ष यात्री स्पेसवॉक करते रहे हैं, लेकिन अब यह आम आदमी के लिए भी संभव होगा। एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स पहली कमर्शियल स्पेसवॉक फ्लाइट लॉन्च करने जा रही है। मिशन ‘पोलारिस डॉन’ के तहत यात्री अपने खर्चे पर अंतरिक्ष में स्पेसवॉक का आनंद ले सकेंगे। स्पेसवॉक का मतलब इंसानों का स्पेसक्राफ्ट से बाहर निकलकर अंतरिक्ष में चहलकदमी करना है। इस मिशन का ऐलान 2022 में किया गया था। पोलारिस डॉन को स्पेस में इंसानों के लंबे समय तक रहने के अनुरूप डिजाइन किया गया है। यह एक साइंस-फिक्शन जैसा प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद इंसानों को पृथ्वी की कक्षा, चांद और मंगल ग्रह तक ले जाना है। पोलारिस डॉन मिशन को 31 जुलाई के बाद लॉन्च किया जाना है, जो लगभग 1400 किमी की ऊंचाई पर ऑर्बिट में पहुंचेगा। इस मिशन में अरबपति बिजनेसमैन और पायलट जेरेड इसाकमैन ने पैसा लगाया है। मिशन के जरिए सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट के लिए टेस्टिंग भी की जाएगी।
स्पेस का इंसानों पर असर समझेगा मिशन
पोलारिस मिशन के जरिए अंतरिक्ष का इंसानों पर होने वाले असर को समझना भी है। इनमें एक है न्यूरो ओकुलर सिंड्रोम या एसएएनएस। इसमें जब कोई अंतरिक्ष यात्री माइक्रो ग्रेविटी में होता है, तो उसके स्पाइनल फ्लूइड का दबाव दिमाग और रीढ़ और आंखों की नसों के आसपास हो जाता है, जिससे कई तरह की परेशानियां पैदा होती हैं।
रेडिएशन का खतरा भी
चार सदस्यीय क्रू टीम स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल से अंतरिक्ष में जाएगी। ये टीम पृथ्वी के चारों ओर ऑर्बिट में पांच दिन बिताएगी। कैप्सूल धरती से इतनी ऊंचाई पर उड़ेगा कि इसे रेडिएशन बेल्ट से होकर गुजरना पड़ेगा। 1970 के दशक की शुरुआत में अपोलो प्रोग्राम खत्म होने के बाद कोई भी यान इस बेल्ट से होकर नहीं गुजरा।
50 साल बाद इतनी दूर जाएगा स्पेसक्राफ्ट
बीते 50 सालों में कोई मानव मिशन इतनी दूर तक नहीं गया है। 52 साल पहले 1972 में अपोलो 17 मून मिशन चांद पर गया था और नील आर्मस्ट्रॉन्ग चांद की सतह पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति बने थे। उसके बाद यह पहला मिशन है जो स्पेस में सबसे दूर जाएगा। पहला स्पेस वॉक 1965 में जेमिनी-4 पर अंतरिक्ष यात्री एड व्हाइट ने किया था। उन्होंने 21 मिनट स्पेसक्राफ्ट से बाहर बिताए थे। इसके बाद आइएसएस पर नियमित स्पेसवॉक किया जाता है।

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