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3 शुभ योग में मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्योहार, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और विधि

Raksha Bandhan 2022 : इस साल रक्षाबंधन 11 अगस्त को मनाई जा रही है। इस दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं।

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3 शुभ योग में मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्योहार, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और विधि

Rakshabandhan 2022 Rakhi Tying Time: रक्षाबंधन हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है जो भाई-बहन के पवित्र बंधन का प्रतीक है। हर साल ये त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार की तैयारियाां कुछ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। इस साल रक्षाबंधन 11 अगस्त को मनाई जा रही है। इस दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं। ये योग हैं आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और रवि योग। ज्योतिष अनुसार ये तीनों ही योग बेहद शुभ फलदायी माने जाते हैं। जानिए रक्षा बंधन पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त और विधि।

रक्षाबंधन 2022, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: भाई को राखी 11 अगस्त को दोपहर के समय बांधी जा सकेंगी। लेकिन राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त रात 08:51 पी एम से 09:13 पी एम तक रहेगा। भद्रा 05:17 PM से 08:51 PM तक रहेगा।

रक्षा बंधन पूजा विधि:
-रक्षाबंधन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और कुलदेवी या देवता का आशीर्वाद लें।
-इसके बाद राखी, सिंदूर, अक्षत और रोली आदि पूजा सामग्री को एक थाली में रख लें।
-अब इस थाली को पूजा स्थल में रखें।
-इसके बाद भाई को राखी बांधने की तैयारी शुरू करें। राखी बांधते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके भाई का मुंह पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
-बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनके दाहिने हाथ पर राखी बांधें।
-राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाकर उनका मुँह मीठा कराएं।
-इसके बाद भाई अपनी बहन को कुछ न कुछ उपहार दें।

रक्षाबंधन से जुड़ी श्री कृष्ण और द्रौपदी की कहानी: रक्षाबंधन से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक कथा श्री कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी है। एक बार जब शिशुपाल का वध करने के लिए श्री कृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया था तो उससे उनकी उंगली कट गई थी जिससे काफी खून बहने लगा था। भगवान श्री कृष्ण की उंगली से खूब बहते देख द्रौपदी ने बिना सोचे-समझे अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर भगवान कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। ये देखकर श्री कृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वो उनकी हमेशा रक्षा करेंगे। भगवान कृष्ण ने अपना वचन निभाते हुए द्रौपदी की रक्षा की थी।