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नरसिंहपुर शहरी क्षेत्र में ही रोड के गड्ढों में फंस रहे वाहन, जिम्मेदार बेखबर, रेलवे ब्रिज के धीमे निर्माण से डायवर्ट रूट ने बढ़ाई परेशानी

दोपहिया वाहनों के पहिए पानी से भरे गड्ढों में समा जाते हैं। बड़े वाहन भी हिचकोले खाते हुए निकलने को मजबूर हैं। वाहनों के लिए सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
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नरसिंहपुर

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Prakash Choubey

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Updated: 6 Sep 2026, 1:05 PM IST

नरसिंहपुर शहर से लगे रौंसरा रेलवे ब्रिज के निर्माण की धीमी गति के साथ ही वाहनों के लिए बनाए गए डायवर्ट रूट की बदहाल स्थिति अब आमजन के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं,

फाटक तरफ से आने वाले वाहन इस तरह कीचड़ में फसते हैं।

The slow pace of construction on the Raunsara railway bridge नरसिंहपुर. शहर से लगे रौंसरा रेलवे ब्रिज के निर्माण की धीमी गति के साथ ही वाहनों के लिए बनाए गए डायवर्ट रूट की बदहाल स्थिति अब आमजन के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं, जिनमें थोड़ी सी बारिश होते ही पानी भर जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता और दोपहिया वाहनों के पहिए पानी से भरे गड्ढों में समा जाते हैं। बड़े वाहन भी हिचकोले खाते हुए निकलने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि ब्रिज निर्माण एजेंसी द्वारा वाहनों के लिए सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। मौजूदा डायवर्ट रूट पर बने बड़े गड्ढों को भरवाने और सडक़ को समतल कराने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके चलते रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को दचकों और दुर्घटना के जोखिम के बीच आवागमन करना पड़ रहा है।

रात्रिकालीन कई बसें बस स्टैंड तक नहीं पहुंचतीं
स्थानीय लोगों व वाहन चालकों का कहना है कि सडक़ की खराब हालत और रेलवे फाटक की समस्या का सामना आम वाहन चालकों को ही करना पड़ रहा है। अधिकारियों और नेताओं के वाहन खराब रास्ते और फाटक की परेशानी से बचने के लिए दूसरे रूट से निकल जाते हैं, लेकिन आमजन, यात्री वाहन चालकों और खासकर बड़े वाहनों के चालकों के पास इसी मार्ग से निकलने के अलावा विकल्प नहीं है। संकरे और गड्ढेदार रास्ते पर दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही होने पर स्थिति और कठिन हो जाती है। इसका असर यात्री परिवहन पर भी पड़ रहा है। सडक़ की खराब हालत के कारण रात्रिकालीन कई बसें बस स्टैंड तक नहीं पहुंचतीं। इससे रात में आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है और उन्हें वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है।


फाटक बंद होने पर बढ़ जाती है मुश्किल
रेलवे फाटक बंद होने के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है। हाइवे की ओर से वाहनों के आने पर स्टेशन की ओर से जाने वाले वाहनों को किनारे खड़े होकर रास्ता देने की मजबूरी रहती है। फाटक बंद होने पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है और डायवर्ट रूट पर पहले से प्रभावित यातायात व्यवस्था और बिगड़ जाती है।


विद्यार्थी वर्ग की मुश्किलें ज्यादा
इस मार्ग से रोजाना स्टेशन क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के अलावा बाइक और साइकिल से स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं तथा मंडी आने वाले किसान गुजरते हैं। खराब सडक़ के कारण छुटपुट दुर्घटनाएं भी सामने आ रही हैं। नागरिकों की मांग है कि ब्रिज निर्माण पूरा होने तक निर्माण एजेंसी तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार कराए, गड्ढों की भराई कर सडक़ को समतल कराए और आवागमन को सुरक्षित बनाए।