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शिरडी वाले साईंबाबा…एक मूर्ति , एक राज, जिसे आप नहीं जानते

यह वाकया 1954 है, जब साईं बाबा की मूर्ति को बनाने के लिए मुंबई के बंदरगाह पर इटली से मार्बल आया था...

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Dilip Chaturvedi

Mar 28, 2018

SHIRDI WALE SAI BABA

SHIRDI WALE SAI BABA

साईंबाबा के प्रति लोगों की आस्था दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। नतीजन, जगह-जगह पर साईंबाबा के मंदिर बनाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां आस्था बढ़ रही है, वहीं इसके साथ एक विवाद भी सालों से चला आ रहा है कि साईं वाकई ईश्वर थे या नहीं? इस पर गाहे-बगाहे चर्चाएं भी होती रहती हैं। लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं कि साईं बाबा का जन्म हुआ था। वे हमेशा साधारण जीवन जीते रहे और साधारण लोगों के बीच ही रहे। यह भी सत्य है कि उन्होंने समाधि ली थी। खास बात यह है कि साईं बाबा की पूजा-अर्चना सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में होती है और उनके चमत्कारों के ग्ुणगान भी गाए जाते हैं।

सबसे खास बात है कि शिरडी के साईं बाबा को छोड़ दें, तो इसके अलावा जहां-जहां भी साईं बाबा के मंदिर बने हैं, वहां उनकी मूर्ति एक ही छवि वाली है। वह भी सगमरमर की मूर्ति। मान्यता है कि साईं के इस आसन वाली मूर्ति को शिरडी में ही बनाया गया था, जहां उन्होंने अपनी समाधि ली थी। इस मूर्ति की पूजा साल 1954 से लगातार की जा रही है ऐसी मूर्ति के पीछे एक गहरा राज भी छिपा हुआ है, जिसके बारे में उनके भक्तों को शायद ही पता हो।

दरअसल, लोगों का मानना है कि साईं अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने के लिए खुद आते हैं। यह बात इसलिए दावे के कही जाती है, क्योंकि जिस शिल्पकार को साईं बाबा की मूर्ति बनाने के लिए कहा गया, तो उसके सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि वो मूर्ति को किस तरह बनाए। ऐसी दुविधा में उससे कहा गया कि वो साईं बाबा को याद करके मूर्ति बनाए।

यह वाकया 1954 है, जब साईं बाबा की मूर्ति को बनाने के लिए मुंबई के बंदरगाह पर इटली से मार्बल आया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज तक यह नहीं पता चल सका कि उस मार्बल को किसने भेजा था। हां, मार्बल पर सिर्फ इटली लिखा था इससे पता चला कि वो वहां से आया है। इसके बाद साईं की मूर्ति को बनाने क काम वसंत तालीम को सौंपा गया। मूर्ति बनाते समय जब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब वो निराश होकर बैठ गया और कहने लगा कि बाबा मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं ऐसी प्रतिमा बनाऊं, जो मनमोहक हो। इसके बाद साईं बाबा ने खुद दर्शन दिए और जिसके बाद ये आसन वाली मूर्ति बनी। वैसे तो इसके बाद इस आसन वाली अब तक लाखों-करोड़ों मूर्तियां बन चुकी हैं, लेकिन शिरडी में विराजी मूर्ति की बात ही अलग है। इस मूर्ति की खासियत यह है कि जब आप साईं बाबा की ओर गौर से देखेंगे, तो लगता है कि वे हमें देख रहे हैं।