17 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एआइ का बाजार पर वार…ग्वालियर के 250 करोड़ स्वाहा!

शेयर बाजार में पिछले दो माह से जारी उठापटक ने ग्वालियर के निवेशकों की जेब पर भी गहरी चोट की है। क्रूड ऑयल की कीमतों, विदेशी बाजारों की चाल और वैश्विक तनाव के बीच बाजार में एक नया फैक्टर तेजी से उभरा है-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ। कंपनियों के काम करने का तरीका बदलने के साथ एआइ ने बाजार में उनकी भविष्य की कमाई का गणित भी बदल दिया है। खासकर आइटी सेक्टर में एआइ के बढ़ते इस्तेमाल और नौकरियों में कटौती की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। स्थानीय अनुमान के मुताबिक, पिछले छह माह की गिरावट में ग्वालियर के निवेशकों को करीब 250 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
3 min read
Google source verification
शेयर बाजार में पिछले दो माह से जारी उठापटक ने ग्वालियर के निवेशकों की जेब पर भी गहरी चोट की है। क्रूड ऑयल की कीमतों, विदेशी बाजारों की चाल और वैश्विक तनाव के बीच बाजार में एक नया फैक्टर तेजी से उभरा है-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ। कंपनियों के काम करने का तरीका बदलने के साथ एआइ ने बाजार में उनकी भविष्य की कमाई का गणित भी बदल दिया है। खासकर आइटी सेक्टर में एआइ के बढ़ते इस्तेमाल और नौकरियों में कटौती की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। स्थानीय अनुमान के मुताबिक, पिछले छह माह की गिरावट में ग्वालियर के निवेशकों को करीब 250 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

शेयर बाजार पर भी एआइ का असर दिख रहा है। इसके चलते निवेशकों को बड़ी हानि हुई है।

  • दो महीने की उठापटक में निवेशकों को बड़ा झटका, क्रूड और वैश्विक तनाव के बीच एआइ बना बाजार का नया डर
  • आइटी कंपनियों में नौकरियों पर संकट की खबरों से बढ़ी चिंता, भविष्य की कमाई पर भी सवाल

ग्वालियर. शेयर बाजार में पिछले दो माह से जारी उठापटक ने ग्वालियर के निवेशकों की जेब पर भी गहरी चोट की है। क्रूड ऑयल की कीमतों, विदेशी बाजारों की चाल और वैश्विक तनाव के बीच बाजार में एक नया फैक्टर तेजी से उभरा है-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ। कंपनियों के काम करने का तरीका बदलने के साथ एआइ ने बाजार में उनकी भविष्य की कमाई का गणित भी बदल दिया है। खासकर आइटी सेक्टर में एआइ के बढ़ते इस्तेमाल और नौकरियों में कटौती की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। स्थानीय अनुमान के मुताबिक, पिछले छह माह की गिरावट में ग्वालियर के निवेशकों को करीब 250 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

सिर्फ बिकवाली नहीं, भविष्य की कमाई पर सवाल
बाजार की मौजूदा कमजोरी को केवल क्रूड और वैश्विक परिस्थितियों से समझना मुश्किल है। बाजार के आकलन में करीब 30 फीसदी तक असर एआइ से जुड़ी आशंकाओं का माना जा रहा है। एआइ के कारण कंपनियां कम कर्मचारियों में अधिक काम करने की क्षमता विकसित कर रही हैं। इससे कंपनियों की लागत घटने और मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन निवेशकों के सामने दूसरा सवाल भी खड़ा हो गया है-आइटी कंपनियों के पारंपरिक कारोबार और रोजगार की तस्वीर आगे कैसी होगी? अब निवेशक केवल यह नहीं देख रहा कि कंपनी आज कितना कमा रही है, बल्कि यह भी देख रहा है कि एआइ के दौर में पांच साल बाद उसकी कमाई और कारोबार किस स्थिति में होंगे। कर्मचारियों की जरूरत घटने की खबरों को बाजार ने केवल रोजगार के नजरिए से नहीं देखा, बल्कि भविष्य के खर्च, मार्जिन और बिजनेस मॉडल से जोडक़र देखा है।

ग्वालियर के छोटे-बड़े निवेशकों पर असर
आइटी और दूसरे प्रमुख सेक्टरों में लंबी अवधि के नजरिए से पैसा लगाने वाले निवेशकों के पोर्टफोलियो का मूल्य लगातार गिरावट से घटा है। शहर के करीब 20 हजार सक्रिय डीमैट खातों में से लगभग 60 फीसदी खाताधारकों के पास किसी न किसी आइटी कंपनी का शेयर होने का स्थानीय अनुमान है। ऐसे में आइटी शेयरों पर दबाव का असर व्यापक रहा है। कई लोगों ने एसआइपी के साथ आइटी शेयरों में सेवानिवृत्ति और बच्चों की पढ़ाई जैसे भविष्य के लक्ष्यों के लिए पैसा लगाया है।

एआइ चुनौती भी, अवसर भी
एआइ केवल खतरा नहीं है। यह क्लाउड, डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआइ आधारित सेवाओं में नए कारोबार के अवसर भी पैदा कर रहा है। असली सवाल यह है कि कौन-सी कंपनी एआइ को लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन-सी कंपनी इसके कारण अपना कारोबार खो सकती है। इसका असर आइटी के साथ बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, विनिर्माण, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर पर भी पड़ सकता है।

एक्सपर्ट व्यू
एकमुश्त निवेश की बजाय चरणबद्ध निवेश पर जोर

शेयर एक्सपर्ट निखिल सिंघल के मुताबिक, एआइ आने वाले वर्षों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा बदलने वाला महत्वपूर्ण कारक बन सकता है। एआइ से आइटी कंपनियों पर ऑटोमेशन और कीमतों का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन नई तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अवसर भी बढ़ेंगे। निफ्टी 50 कंपनियों की जून तिमाही में करीब 18 फीसदी मुनाफा वृद्धि रही, जो 10 तिमाहियों में सबसे मजबूत थी। घरेलू खपत, कर्ज वृद्धि और निवेश गतिविधियां बाजार को सहारा दे रही हैं। हालांकि महंगा क्रूड, ऊंची बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और एआइ से जुड़े मूल्यांकन जोखिम अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध निवेश पर जोर देना चाहिए। पोर्टफोलियो को केवल आइटी या एआइ शेयरों तक सीमित रखने के बजाय बैंकिंग, खपत, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, डिजिटल-एआइ और चुनिंदा बड़ी कंपनियों में विविधीकरण रखना जरूरी है। बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत बुनियादी वाली कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का अवसर देखा जा सकता है।