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सुप्रीम कोर्टः एनसीएलएटी न्यायिक सदस्य के गंभीर आरोप पर जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के न्यायिक सदस्य जस्टिस शरद कुमार शर्मा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस शर्मा ने दावा किया कि उन्हें देश की उच्च न्यायपालिका के एक सम्मानित सदस्य द्वारा एक लंबित मामले में पक्ष विशेष के पक्ष में आदेश देने के […]

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भारत

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Nitin Kumar

Aug 28, 2025

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neet pg result 2025 controversy indore students supreme court (फोटो- विकिपीडिया)

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के न्यायिक सदस्य जस्टिस शरद कुमार शर्मा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस शर्मा ने दावा किया कि उन्हें देश की उच्च न्यायपालिका के एक सम्मानित सदस्य द्वारा एक लंबित मामले में पक्ष विशेष के पक्ष में आदेश देने के लिए संपर्क किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सेक्रेटरी जनरल को सौंपी है। उनके निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

चेन्नई पीठ में 13 अगस्त को सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया था। अपने आदेश में उन्होंने लिखा, 'हम व्यथित हैं कि हममें से एक को उच्च न्यायपालिका के सदस्य द्वारा प्रभावित करने का प्रयास किया गया। अतः मैं इस मामले की सुनवाई से अलग होता हूं।' इसके बाद पीठ ने मामले को किसी अन्य उपयुक्त बेंच को सौंपने का अनुरोध किया।

यह विवाद हैदराबाद स्थित 'केएलएसआर इंफ्राटेक' के निलंबित निदेशक ए.एस. रेड्डी की अपील से जुड़ा है। कंपनी के खिलाफ जुलाई 2023 में हैदराबाद एनसीएलएटी ने कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू की थी। एनसीएलएटी ने इस अपील पर सुनवाई के बाद जून 2024 में फैसला सुरक्षित रखा था और 13 अगस्त को निर्णय सुनाया जाना था। उसी दिन जस्टिस शर्मा ने खुद को मामले से अलग कर लिया।

जस्टिस शर्मा, जो 31 दिसंबर 2023 को उत्तराखंड हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे, फरवरी 2024 में एनसीएलएटी में शामिल हुए। उन्होंने इससे पहले भी कई चर्चित मामलों — जैसे बायजूस, जेप्पियार सीमेंट्स और रामलिंगा मिल्स — से खुद को अलग किया था।