
धरने पर बैठे समाजसेवी को 15 दिन में व्यवस्था सुधारने का दिया था लिखित आश्वासन
धरने पर बैठे समाजसेवी को 15 दिन में व्यवस्था सुधारने का दिया था लिखित आश्वासन
पन्ना. अव्यवस्थाओं और मंदिर प्रबंध समिति से जुड़े लोगों की मनमानी को लेकर सुर्खियों में चल रहे भगवान जुगल किशोर सहित अन्य मंदिरों की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ही लापरवाह बना हुआ है। भगवान जुगल किशोर मंदिर प्रबंध समिति को भंग करने, थाल भोग की पारदर्शी व्यवस्था करने और अनाधिकृत लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने के विरोध में नौ माह पहले समाजसेवी योगेंद्र भदौरिया मंदिर के सामने धरने पर बैठे थे। तब जिला प्रशासन की आरे से तत्कालीन तहसीलदार ने 15 दिन में व्यवस्थाओं में सुधार का लिखित आश्वासन दिया था, जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। गौरतलब है कि बगैर अनुमति मंदिर के द्वार पर फाइनेंस कंपनी के प्रचार का ग्लो साइन बोर्ड लगवाने पर एसडीएम सतीश नागवंशी ने कंपनी के मैनेजर और मंदिर के मुसद्दी संतोष कुमार तिवारी को नोटिस जारी किया है।
दिया था लिखित आश्वासन
मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार लाने के लिए योगेंद्र भदौरिया आठ माह पूर्व धरने पर बैठे थे। वे मंदिर में आरती के दौरान मोबाइलों के उपयोग से बुजुर्ग श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानी, भगवान के दर्शन में वीआईपी कल्चर को खत्म करने, थाल भोग की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, मंदिर प्रबंध समिति को तुरंत भंग करने, मंदिर के अंदर पॉलीथन के उपयोग को सख्ती से प्रतिबंधित करने सहित अन्य मांगों को लेकर धरना दे रहे थे। इस पर जिला प्रशासन ने आठ सितंबर 2023 को सभी मांगों का 15 दिन में विधि अनुसार निराकरण करने लिखित में आश्वासन दिया था।
शांति समिति की बैठक में भी उठा मामला
मंदिर के अव्यवस्थाओं का मामला एक दिन पूर्व कलेक्ट्रेट में हुई शांति समिति की बैठक में भी उठा। बैठक में योगेंद्र भदौरिया ने कलेक्टर को बताया, मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए उन्हें नौ माह पहले लिखित आश्वासन मिला था, उसके बाद भी किसी प्रकार का सुधार नहीं हो पाया। मंदिर के जगमोहन की चाबियां अनाधिकृत लोगों के पास हैं, जिससे मनमानी तरीके से लोगों को दर्शन के लिए वीआईपी की सुविधा दी जाती है। शाम और रात को होने वाली भगवान की आरती निर्धारित समय से न करके मनमानी तरीके से की जा रही है।
एडीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने भी नहीं किया काम
भगवान जुगल किशोर सहित अन्य मंदिरों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए तत्कालीन कलेक्टर अरङ्क्षजदर ङ्क्षसह द्वारा एडीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसमें कलेक्ट्रेट के धर्मार्थ शाखा प्रभारी सदस्य सचिव बनाए गए। जबकि सदस्यों में संबंधित अनुभाग के एसडीएम व एसडीओपी, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग और संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार को शामिल किया गया था। इसको एक माह के अंदर अपनी ङ्क्षबदुवार सुझाव रिपोर्ट प्रस्तुत करना था। समिति को शासनाधीन मंदिरों के पुजारी व मुसद्दी के दायित्वों के निर्वहन, मंदिर में दर्शन की व्यवस्था, अन्य किसी प्रकार की परंपराओं व व्यवस्थााओं के संदर्भ में उत्पन्न व प्राप्त समस्याओं व शिकायतों के निराकरण संबंधी आवयश्क जांच व सुझाव संबंधित संयुक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था।
कैमरों की निगरानी निजी लोग कर रहे
लोगों का दावा है कि मंदिर के कैमरों में यहां होने वाली चोरी के कई मामले रिकॉर्ड हैं। जिनकी निगरानी अधिकृत लोगों द्वारा नहीं किए जाने के कारण मामले पकड़ में नहीं आ रहे हैं। अभी मंदिर के कैमरों की मॉनीटङ्क्षरग के लिए उसके ङ्क्षलक मंदिर समिति की ओर अनाधिकृत लोगों को उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि प्रशासन के पास उसका ङ्क्षलक नहीं हैं जिससे वे यहां के व्यवस्थाओं की समुचित निगरानी कर सकें।
मंदिरों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए तत्कालीन कलेक्टर ने छह सदस्यीय कमेटी बनाई थी। चुनावी व्यस्तता के कारण कमेटी उस मामले में कुछ नहीं कर पाई थी। अब चुनाव से फुर्सत मिली है तो अब इस दिशा में काम किया जाएगा। नीलांबर मिश्रा, अपर कलेक्टर
Updated on:
13 Jun 2024 06:26 pm
Published on:
13 Jun 2024 06:25 pm
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