
मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में खड़ी एम्बुलेंस
प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं कि किसी भी मरीज की जान बचाने के लिए एयर एंबुलेंस की जरूरत हो तो भेजा जाएगा। चाहे इलाज हो या फिर मरीज को एंबुलेंस सुविधाएं। मरीजों को सुविधाएं नहीं मिलने पर कलेक्टर जिम्मेदार होंगे। लेकिन जिला अस्पताल में एंबुलेंस की व्यवस्था अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई है। ये कहानी आए दिन हाे रही है। एंबुलेंस चालक निश्चित ही मेहनत कर रहे हैं। लेकिन कई ऐसे चालक हैं जो व्यवस्था को पलीता लगा रहे हैं।
प्रसूता ड्रापआउट के लिए एंबुलेंस का इंतजार करती रही
शुक्रवार दोपहर 12 बजे से ढाई बजे तक नवजात शिशु को लेकर प्रसूता ड्रापआउट के लिए एंबुलेंस का इंतजार करती रही। यही नहीं एक दिन पहले जननी ( प्रसूता ) को जननी सेवा एंबुलेंस पर दो बार चढ़ाया और उतारा। इसके बाद में यह कहते हुए ड्रापआउट नहीं किया कि प्रसूता का घर खंडवा ब्लाक की सीमा पर छैगांव माखन ब्लाक छोर में है। इस लिए प्रसूता को उतार दिया। कागज सुधरवाने के बाद भी ड्राप आउट नहीं किया। दूसरे दिन वही एंबुलेंस चालक अपने घर जाने के बहाने पंधाना ब्लाक का मरीज लेकर गया. अस्पताल में अव्यवस्था की भेंट चढ़ी एंबुलेंस व्यवस्था, खंडवा ब्लाक में ड्रापआउट की बजाए पंधाना चला गया एंबुलेंस चालक, नहीं थम रही मनमानी है
अस्पताल से सात किमी दूर नहीं किया ड्रापआउट
खंडवा ब्लाक की मलगांव निवासी ज्योति 12 नवंबर को जिला अस्पताल में सीजर ऑपरेशन से प्रसव हुआ। अस्पताल में दो दिन भर्ती के बाद चिकित्सक ने जच्चा-बच्चा स्वस्थ होने पर 14 नवंबर दोपहर 12 बजे डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों ने एंबुलेंस ( सीजी-04एनडब्ल्यू-6353 ) को डिस्चार्ज पेपर, पहचान पत्र दिखाया। प्रसूता को चढ़ा लिया। डिस्चार्ज पर्चे पर निवास गलत दर्ज था। प्रसूता ने फौरन डाक्टर से सुधार करा लिया। प्रसूता ज्योति के अनुसार एंबुलेंस चालक ने एक घंटे के बीच दो बार चढ़ाया-उतारा। लेकिन सात किमी दूर घर छोडऩे नहीं गया। दर्द से कराहते रहे। प्रसूता के परिजनों ने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की है।
अस्पताल में ढाई घंटे गोद में नवजात को लेकर बैठी रही प्रसूता
मेडिकल कालेज सह अस्पताल में 15 नवंबर दोपहर 12 बजे प्रसूता शीतल को चिकित्सक ने डिस्चार्ज कर दिया। एंबुलेंस की सेवा के इंतजार में प्रसूता ढाई घंटे तक वेटिंग गैलरी में कुर्सी पर बच्चे को गोद में लेकर बैठी रही। पति राकेश ने बताया कि करीब ढाई बजे एंबुलेंस की सेवा मिली। इससे पहले एंबुलेंस चालक ने मना कर दिया था। सूचना के बाद दूसरा एंबुलेंस चालक ने घर पहुंचाया। ये कहानी अकेले इस प्रसूता के साथ नहीं बल्कि अन्य के साथ भी आए दिन हो रहा है।
चालीस एंबुलेंस, शेड्यूल बेपटरी
जिले में मरीजों और गर्भवती महिलाओं के साथ दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए 40 एंबुलेंस लगी हैं। काल अटेंड्स में देरी न हो ऑन द स्पॉट एंबुलेंस की सेवा मिले। इसको लेकर एंबुलेंस की ब्लाक स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। चालीस एंबुलेंस में 22 जननी सेवा में लगी है। शेष 18 एम्बुलेंस एलएस, बीएलएस की श्रेणी में रखा गया है। खंडवा अस्पताल मुख्यालय पर जननी की तीन एंबुलेंस हैं। विभाग के तमाम प्रयास के बाद भी जननी सेवा ड्रापआउट और पी-कअप के बीच अटकी हुई है।
चार को ब्लाक से बाहर की अनुमति
ब्लाक स्तरीय व्यवस्था के बाद शुक्रवार को सीएमएचओ कार्यालय में भोपाल से काल आने पर चार मरीजों को ब्लाक से बाहर जाने व लाने की अनुमति दी गई। इसमें पुनासा, खालवा ब्लाक में चार अलग-अलग ब्लाकों को दी गई। इसके अलावा एंबुलेंस समय से नहीं मिलने की सीएम हेल्पलाइन पर भी बीस से अधिक शिकायतें पहुंची हैं।
इनका कहना, एंबुलेंस एजेंसी जय मां अम्बे के जिला प्रबंधक अरूण यादव हमारी पहली प्राथमिकता किसी भी मरीज को पि-अप करने की रहती है। यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो संबंधित चालक से बात करेंगे और सुधार की कोशिश करेंगे।
Updated on:
16 Nov 2024 12:41 pm
Published on:
16 Nov 2024 12:40 pm
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