पहली पत्नी की शादी के 12 साल बाद हो गया निधन, उसकी शादी की 50 वीं सालगिरह पर दूसरी पत्नी संग की देहदान की घोषणा
जिले में अब तक 108 हुए देहदान
बाड़मेर। थार में देहदान का कारवां चल पड़ा है। कभी कोई जन्म दिन कर करता है। तो कभी कोई तीन पीढी एक साथ देहदान संकल्प लेते है। मंगलवार को भी एक प्रेमकथा के साथ दम्पत्ति ने देहदान किया। कहते है कि मरने के बाद कोई याद नहीं रखता, लेकिन सच्चे प्रेम का रिश्ता कभी भी भुला नहीं पाता। ऐसा ही उदाहरण शहर के राय कॉलोनी निवासी नानगाराम जीनगर ने दिया। जिसने पहली शादी पच्चास साल पहले अंतरी देवी से हुई थी। लेकिन शादी के बारह वर्ष बाद ही वे अपने जीवन साथी को खो बैठे। ऐसे में उन्हें दूसरी शादी करनी पड़ी। लेकिन पहली पत्नी की याद में पचासवीं शादी की सालगिरह पर देहदान की घोषणा की।
नानकराम जीनगर ने बताया कि हमारा शरीर मरने के बाद कोई काम का नहीं है। लेकिन यह मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए काम का है। मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं कई रिर्चस कर आगे बढ़ेगें। यही सोच कर आज धर्म पत्नी सरस्वती संग देहदान की घोषणा का निर्णय लिया। पहली पत्नी अंतरी देवी की यादें आज भी साथ है। परिवार पूरा उनको आज भी याद कर रहा है। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देहदान के रूप में दे रहे है। इसके लिए हमें हमारे बच्चों ने प्रेरित किया।
इस मौके उनके राजकीय अस्पताल पीएमओ बीएल मंसूरिया के साथ जीनगर परिवार सदस्य नारायण दास डाबी, चम्पालाल डाबी, दिनेश कुमार डाबी, हरीश कुमार डाबी, प्रेरणा, मीना, इंद्र, कुम मौजूद रहे।
अब तक हुए 108 देहदान घोषणा
थार में देहदान घोषणा का आंकड़ा बढता जा रहा है। पहले 106 लोगों ने देहदान की घोषणा की थी। बुधवार को दम्पत्ति के घोषणा करने के साथ ही यह आंकड़ा 108 पहुंच गया है।