
Advaita Lok: आचार्य शंकर ने जिस अद्वैत वेदांत का सिद्धांत देकर आत्मा और बह्म के बीच भेद को पाटने का काम किया, उसी का केंद्र बिंदु ओंकारेश्वर अब प्रकृति संरक्षण के सिद्धांत को दोहराने जा रहा है। मोहन सरकार ने 2195 करोड़ के जिस अद्वैत लोक के निर्माण को मंजूरी दी, वह गृह रेटिंग स्टार कॉन्सेप्ट के आधार पर बनेगा। इसमें जीरो वेस्ट पद्धति लागू की जाएगी। इस लोक में उपयोग हर सामग्री अपशिष्ट के रूप में प्रकृति और दुनिया के लिए खतरा पैदा नहीं करेगी।
मठ-मंदिरों के भवनों, कॉरिडोर, परिसरों की डिजाइन ऐसी होगी कि अंदर बिजली की कम जरूरत पड़ेगी। जहां जरूरत होगी, वहां सौर ऊर्जा का प्रयोग होगा। इसके पीछे दुनिया के लिए चुनौती पैदा कर रहे थर्मल पावर प्लांटों में पैदा होने वाली कम से कम बिजली का उपयोग करना है। निर्माण कार्यों में पर्यावरण अनुकूल सामग्रियां उपयोग होंगी। नर्मदा के दोनों तट पर भगवान शिव, वेदव्यास से लेकर सम-सामयिक संतों की मूर्तियां लगेंगी। उनके दर्शन के लिए अद्वैत नौका विहार की सुविधा होगी। सबसे छोटी यात्रा 15 मिनट की होगी।
ओंकारेश्वर में 126 हेक्टेयर में 4 चरण में एकात्म धाम (Ekatma Dham) बन रहा है। पहले चरण का काम 90% हो चुका है। एकात्मता की मूर्ति, अद्वैत लोक, वेदांत संस्थान, सूचना केंद्र व शंकर निलमय परिसर सहित कुल 4000 करोड़ खर्च होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व मंत्रियों ने इंदौर की कैबिनेट बैठक में इस लोक को स्वीकृति देते समय तय किया कि ओंकारेश्वर वर्षों से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है, यहां से दुनिया भर में प्रकृति संरक्षण का संदेश भी जाना चाहिए। इंजीनियरों को लोक के सभी कामों में नर्मदा नदी व प्रकृति के संरक्षण का खास ध्यान रखने को कहा है।
Updated on:
23 May 2025 10:19 am
Published on:
23 May 2025 08:46 am
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