1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘वापसी’ ने झकझोर दी संवेदनाएं: सरहद की जंग और अमन की पुकार की मार्मिक दास्तां

कालिदास अकादमी के अभिरंग नाट्य गृह में दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुई इस शाम ने दर्शकों को युद्ध के उस चेहरे से रूबरू कराया
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

उज्जैन

•

image

Lalit Saxena

•

Updated: 6 Feb 2026, 11:08 PM IST

अभिनव रंगमंडल के 40वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह के पांचवें दिन नाटक 'वापसी' का मंचन हुआ।

मंच पर साजन कोहिनूर का जीवंत अभिनय: जब दुश्मन की गोली ने खामोश कर दी शांति की आवाज़

अभिनव रंग मंडल के 40वें समारोह: डॉ. अमरजीत ग्रेवाल और केवल धालीवाल की कलात्मक जुगलबंदी

युद्ध की विभीषिका के बीच मानवता की तलाश

उज्जैन. भारत सरकार के संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित अभिनव रंगमंडल के 40वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह के पांचवें दिन नाटक 'वापसी' का मंचन हुआ। कालिदास अकादमी के अभिरंग नाट्य गृह में दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुई इस शाम ने दर्शकों को युद्ध के उस चेहरे से रूबरू कराया, जो अक्सर हेडलाइंस में दब जाता है। प्रख्यात निर्देशक केवल धालीवाल के निर्देशन में तैयार यह नाटक महज एक कहानी नहीं, बल्कि सरहदों के पार छिपी इंसानी दया की एक चीख है। डॉ. अमरजीत ग्रेवाल के सशक्त लेखन और पद्मश्री सुरजीत पातर के गीतों ने इस नाटक को एक कालजयी अनुभव बना दिया।

भावुक कर देने वाला सिपाही का संघर्ष

नाटक की कहानी एक जांबाज आर्मी जवान और उसके घायल ऑफिसर के इर्द-गिर्द बुनी गई है। जवान अपने अधिकारी को दुश्मन के घेरे से निकाल कर जंगल के रास्ते घर लाने की जद्दोजहद करता है। मुख्य कलाकार साजन कोहिनूर ने अपने अभिनय से ऐसा समां बांधा कि हर दर्शक की आंखें नम हो गईं। नाटक का सबसे प्रभावशाली मोड़ वह था, जब जवान अमन का लोकगीत गाना चाहता है ताकि दुश्मन भी हथियार डाल दे, लेकिन शांति की वह पुकार निकलने से पहले ही एक गोली उसे खामोश कर देती है। आकाशदीप ने घायल ऑफिसर के रूप में शानदार साथ दिया, वहीं गायक कुशाग्र कालिया की आवाज़ ने माहौल को और भी गमगीन और गहरा बना दिया।

कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय

लगभग 75 मिनट तक चले इस नाटक को तकनीकी रूप से भी सराहा गया। हरिंदर सोहल के संगीत और युवनीश शर्मा के लाइट डिजाइन ने मंच पर जंगल और युद्ध के तनाव को जीवंत कर दिया। वरिष्ठ रंगकर्मी शरद शर्मा ने बताया कि समारोह की अगली कड़ी में 7 फरवरी को गोरखपुर की टीम द्वारा कॉमेडी नाटक 'चोर! कौन चोर?' की प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं, 8 फरवरी को समापन संध्या पर अभिनव रंगमंडल द्वारा निर्मल वर्मा की रचनाओं 'धूप का टुकड़ा' और 'डेढ़ इंच ऊपर' का मंचन किया जाएगा। 'वापसी' जैसी प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि रंगमंच आज भी समाज के सामने सबसे जरूरी सवाल उठाने का सामर्थ्य रखता है।