
एमोरी यूनिवर्सिटी की रिसर्च में नींद की समस्या और हल्के संज्ञानात्मक विकार वाले वयस्कों में विटामिन D सेवन और बेहतर संज्ञानात्मक स्कोर के बीच संबंध मिला। (फोटो:AI)
Cognitive Function : विटामिन D को आम तौर पर हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन नई रिसर्च में इसका संबंध संज्ञानात्मक क्षमता यानी याददाश्त, ध्यान और सोचने की क्षमता से भी सामने आया है। एमोरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि नींद की समस्या और हल्के संज्ञानात्मक विकार (MCI) वाले बुजुर्गों में रोजाना 5,000 IU या उससे अधिक विटामिन D लेने की जानकारी देने वालों का संज्ञानात्मक परीक्षण स्कोर, विटामिन D नहीं लेने वालों की तुलना में 13% से अधिक रहा। ज़्यादा डोज़ वाले विटामिन D का संबंध उन बुज़ुर्गों में बेहतर कॉग्निटिव स्कोर से पाया गया, जिनमें पहले से ही डिमेंशिया और नींद की समस्याओं के शुरुआती लक्षण दिख रहे थे।
यह अध्ययन सिरुई झोउ, पॉल सुदेशना, लिन मैरी ट्रोटी, डोनाल्ड ब्लिवाइज और विक्टोरिया पाक की शोध टीम ने किया। रिसर्च में एमोरी यूनिवर्सिटी के नेल हॉजसन वुड्रफ स्कूल ऑफ नर्सिंग और स्कूल ऑफ मेडिसिन से जुड़े शेयरधारक शामिल थे। विक्टोरिया पाक इस अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका और एमोरी यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह नहीं कहा कि विटामिन D लेने से याददाश्त सीधे 13% बेहतर हो जाती है। अध्ययन में केवल विटामिन D सेवन और बेहतर संज्ञानात्मक स्कोर के बीच संबंध पाया गया है।
अध्ययन में 54 वयस्कों को शामिल किया गया। इन सभी में हल्का संज्ञानात्मक विकार (MCI) और नींद से जुड़ी समस्या थी। प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 67 वर्ष थी।
शोधकर्ताओं ने उनकी संज्ञानात्मक क्षमता जांचने के लिए Montreal Cognitive Assessment यानी MoCA का इस्तेमाल किया। यह एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिससे याददाश्त, ध्यान, भाषा, सोचने और समस्या सुलझाने जैसी क्षमताओं का आकलन किया जाता है।
प्रतिभागियों से उनके विटामिन D सप्लीमेंट लेने की जानकारी भी ली गई। इसके बाद शोधकर्ताओं ने अलग-अलग समूहों के संज्ञानात्मक स्कोर की तुलना की।
नतीजे में पाया गया कि रोजाना 5,000 IU या उससे अधिक विटामिन D लेने की जानकारी देने वाले प्रतिभागियों का MoCA स्कोर उन लोगों से बेहतर था, जिन्होंने विटामिन D नहीं लिया था।
समायोजित विश्लेषण में दोनों समूहों के बीच 3.78 अंक का अंतर सामने आया। एमोरी विश्वविद्यालय के अनुसार यह अंतर 13% से अधिक बेहतर संज्ञानात्मक स्कोर के बराबर था।
रिसर्च का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि विटामिन D की कम दैनिक खुराक लेने वालों में बेहतर संज्ञानात्मक स्कोर का ऐसा महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।
इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा विटामिन D हर व्यक्ति की याददाश्त बेहतर कर सकता है। शोधकर्ताओं ने केवल अध्ययन में शामिल इस विशेष समूह के आंकड़ों में यह संबंध देखा है।
इसलिए रिसर्च के आधार पर किसी व्यक्ति को खुद से विटामिन D की अधिक मात्रा लेना शुरू नहीं करना चाहिए।
शोधकर्ताओं ने विटामिन D के अलग-अलग रूपों को भी देखा। अध्ययन में विटामिन D2 और D3 लेने वाले प्रतिभागियों के संज्ञानात्मक प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला।
विटामिन D2 आमतौर पर कुछ पौधों और कवक से प्राप्त होता है, जबकि D3 शरीर में सूर्य के संपर्क के दौरान बनता है और कुछ खाद्य पदार्थों से भी मिल सकता है।
इससे संकेत मिलता है कि इस अध्ययन में विटामिन D का प्रकार संज्ञानात्मक स्कोर में अंतर का प्रमुख कारण नहीं था।
इस रिसर्च में नींद को खास महत्व दिया गया, क्योंकि अध्ययन में शामिल सभी प्रतिभागियों को नींद से जुड़ी समस्या थी।
हल्का संज्ञानात्मक विकार सामान्य उम्र बढ़ने और डिमेंशिया के बीच की स्थिति हो सकता है। इसमें व्यक्ति को याददाश्त, ध्यान या सोचने से जुड़ी हल्की परेशानियां हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे डिमेंशिया है।
दूसरी ओर, नींद की खराब गुणवत्ता भी दिमागी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक नींद की समस्या रहने पर ध्यान, याददाश्त और मानसिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
एमोरी विश्वविद्यालय के अनुसार, अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों में नींद संबंधी समस्याएं आम हैं। ऐसे में नींद और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझना शुरुआती स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका Victoria Pak का कहना है कि नींद की गड़बड़ी और हल्के संज्ञानात्मक विकार दोनों वाले बुजुर्गों में ऐसा समय हो सकता है, जब संज्ञानात्मक बदलाव शुरू हो रहे हों और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को समर्थन देने के लिए संभावित उपायों पर विचार किया जा सके।
विटामिन D शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह कैल्शियम के इस्तेमाल, हड्डियों और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तंत्रिका तंत्र और शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में भी इसका योगदान माना जाता है।
विटामिन D की कमी को लेकर पहले भी कई अध्ययन हो चुके हैं। कुछ रिसर्च में कम विटामिन D स्तर और संज्ञानात्मक गिरावट के बीच संबंध पाया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति में विटामिन D का स्तर कम होना और बाद में संज्ञानात्मक समस्या होना, अपने-आप यह साबित नहीं करता कि विटामिन D की कमी ही समस्या का कारण थी।
मौजूदा अध्ययन भी यह साबित नहीं करता कि विटामिन D सप्लीमेंट लेने से डिमेंशिया या अल्जाइमर का खतरा कम हो जाता है।
रिसर्च में 5,000 IU या उससे अधिक विटामिन D लेने वाले लोगों में बेहतर स्कोर देखा गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 5,000 IU की खुराक सभी के लिए सुरक्षित या जरूरी है।
विटामिन D की अधिक मात्रा लंबे समय तक लेने से शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है। इससे मतली, कमजोरी, अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं और गंभीर स्थिति में किडनी पर भी असर पड़ सकता है।
हाई डोज डॉक्टर की सलाह के बिना लेना उचित नहीं
इसलिए विटामिन D की हाई डोज डॉक्टर की सलाह के बिना लेना उचित नहीं है। खासकर लंबे समय तक सप्लीमेंट लेने से पहले रक्त जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।
इस अध्ययन की सबसे बड़ी सीमा प्रतिभागियों की संख्या है। इसमें सिर्फ 54 लोग शामिल थे। इतनी छोटी संख्या के आधार पर पूरी बुजुर्ग आबादी के लिए निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन में विटामिन D लेने की जानकारी प्रतिभागियों ने खुद दी थी। साथ ही यह अध्ययन इस तरह का था जिसमें एक समय पर मौजूद आंकड़ों के आधार पर संबंध देखा गया। इसलिए इससे यह साबित नहीं किया जा सकता कि विटामिन D ने संज्ञानात्मक प्रदर्शन को बेहतर किया।
यह भी संभव है कि विटामिन D लेने वाले और नहीं लेने वाले लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य, खान-पान या अन्य आदतों में कुछ अंतर रहे हों।
इसी वजह से शोधकर्ताओं ने आगे बड़े और बेहतर नियंत्रित अध्ययनों की जरूरत बताई है।
इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह नहीं है कि ज्यादा विटामिन D लेने से याददाश्त बढ़ती है। इसका महत्व इस बात में है कि नींद की समस्या और MCI वाले बुजुर्गों में विटामिन D सेवन और बेहतर संज्ञानात्मक प्रदर्शन के बीच एक संबंध सामने आया है।
अब बड़े अध्ययनों में यह जांचना जरूरी होगा कि क्या विटामिन D वास्तव में संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित करता है या यह संबंध किसी अन्य कारण से दिखाई देता है।
फिलहाल इस अध्ययन को शुरुआती वैज्ञानिक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि अल्जाइमर या डिमेंशिया के इलाज या बचाव के प्रमाण के रूप में।
यह रिसर्च स्लीप मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है। अध्ययन का शीर्षक विटामिन डी पूरक का सेवन नींद की गड़बड़ी और हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्तियों में बेहतर अनुभूति से जुड़ा है।
रिसर्च को अमेरिकन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) से वित्तीय सहायता मिली।
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Updated on:
23 Aug 2026 03:31 pm
Published on:
23 Aug 2026 03:30 pm
