
देश भर में हवा की ताकत से मिल रही ऊर्जा को बांट रहे मरुस्थल के बीच बसे बाड़मेर व जैसलमेर जिलों में नई ऊर्जा नीति घोषित होने के बाद से उम्मीदें परवान पर है। यहां आगामी समय में नए निवेशक आने की उम्मीद जताई जा रही है। यहां की आंधी, तूफ़ान व बवंडर डराती जरूर है, लेकिन इन्हीं के कारण ऊर्जा के क्षेत्र में उम्मीदों का सागर उफान पर चढ़ता है। दोनों सरहदी जिले पवन ऊर्जा और इसमें शामिल हाईब्रिड ऊर्जा को देश भर में लुटा रहे हैं। मौजूदा समय में बाड़मेर के शिव व जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र सहित समीपवर्ती क्षेत्रों में 233 पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने की कवायद चल रही है। पंखे लगाने के लिए कुल राशि का एक चौथाई हिस्सा सम्बंधित व्यक्ति या संस्था को लगाने की व्यवस्था करनी पड़ती है और शेष तीन चौथाई राशि लोन के रूप में निवेशित की जाती है। पवन ऊर्जा के संयंत्र लगाने के लिए सरकार की ओर से जमीन भी बहुत ही कम दरों पर उपलब्ध करवाई जाती है। पवन ऊर्जा संयंत्रों से जो बिजली उत्पादित होती है, वह यहां से नेशनल ग्रिड को भेजी जाती है। बताते हैं कि नेशनल ग्रिड कंपनियों से बिजली की खरीद कर आगे वह उसका वितरण करता है। बाड़मेर जिले में वर्ष 2012 से क्षेत्र के कोटड़ा, रामपुरा, मेहरान की ढाणी, शिव, गूंगा, अंबावाड़ी, हुक्मसिंह की ढाणी, हड़वा, राजडाल, भिंयाड़ और धारवी क्षेत्र में पवन चक्कियां लगी है। प्रदेश में 4338 मेगावाट उत्पादन, अकेले बाड़मेर-जैसलमेर से 4000 मेगावाट देश भर में राजस्थान राज्य पवन ऊर्जा की लिहाज से चौथे स्थान है। राजस्थान में सर्वाधिक पवन ऊर्जा संयंत्र जैसलमेर में लगे हुए है। वैसे, प्रदेश में वर्तमान में 4338 मेगावाट विद्युत उत्पादन वन ऊर्जा से हो रहा है, जिसमें 4000 मेगावाट का अकेले बाड़मेर व जैसलमेर में ही उत्पादन हो रहा है। देश भर में भारत में 39691 मेगावाट बिजली पवन ऊर्जा से उत्पादित हो रही है। गौरतलब है की दुनिया भर में भारत पांचवा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक देश है, वहीं सर्वाधिक पवन ऊर्जा उत्पादक राज्य तमिलनाडु है।
प्रदेश में प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना जैसलमेर जिले के अमरसागर में 10 अप्रैल 1999 में स्थापित हुई। भारत का दूसरा पवन ऊर्जा पार्क राजस्थान में जैसलमेर जिले के लौद्रवा में स्थापित किया गया है।
सरहदी जिलों में रिण इलाके का खारेपन औद्योगिक विकास के लिहाज से अनुकूल नहीं हैं। ऐसी जमीन को ऊर्जा उद्योग के हितों के ठीक विपरीत माना जाता है। हकीकत यह भी है कि यहां निवेश करने वाले उद्योगपतियों ने गत वर्षों के दौरान अन्य राज्यों का रुख किया है। इसके अलावा एक बड़ी समस्या जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में कुशल श्रमिकों की कमी होने के तौर पर सामने आ रही है।
एक बड़ी पवन चक्की 3.4 मेगावाट बिजली उत्पादन करने में सक्षम है, जो करीब 1900 घरों में विद्युतापूर्ति के लिए पर्याप्त मानी जाती है। वैसे, पवन ऊर्जा संयंत्र की लंबाई 90 मीटर होती है। जानकारों के अनुसार यदि इसकी लंबाई 30 मीटर तक अधिक होने की स्थिति में इसका उत्पादन भी करीब 15 प्रतिशत बढ़ जाएगा। हर पंखे पर करोड़ से अधिक निवेश ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से हवा की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटा की स्थिति पवन ऊर्जा संयंत्र के लिए आदर्श मानी जाती है। एक पवन चक्की के फाउंडेशन पर एक करोड़ का खर्च आता है, वहीं पूरी पवन चक्की की लागत 15 से 16 करोड़ तक आंकी जाती है। माना जाता है कि 20 वर्ष में संबंधित संयंत्र अपनी लागत निकाल लेता है और काफी लाभ अर्जित कर लेता है।
Published on:
15 Jun 2024 07:55 am
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