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भाजपा के खिलाफ पश्चिम यूपी की सियासत में नया समीकरण, सपा-रालोद और चंद्रशेखर आ सकते हैं साथ

Highlights: -अखिलेश और चंद्रशेखर ने तीन बार की मुलाकात -सपा, आरएलडी के साथ आ सकते हैं कई छोटे दल -भाजपा को टक्कर देने के लिए बनाई जा रही रणनीति

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akhilesh jayant chandrashekhar

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नोएडा। अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां एक तरफ भाजपा नेता जगह-जगह जाकर योगी सरकार के कार्यों का बखान कर रहे हैं तो वहीं विपक्षी पार्टियों ने भी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भाजपा को मात देने के लिए सपा और रालोद जहां खुलकर मंच साझा करते नजर आ रही है तो वहीं अखिलेश यादव अब छोटे दलों को भी अपने साथ जोड़ने में जुट गए हैं। इस कड़ी में अखिलेश भीम आर्मी सुप्रीमो चंद्रशेखर आजाद से तीन बार मुलाकात कर चुके हैं। जिसके चलते राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यह मुलाकात पश्चिमी यूपी में नए समीकरण की ओर इशारा कर रही हैं।

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जानकारों की मानें तो सपा और आरएलडी के साथ यदि चंद्रशेखर भी जुड़ जातेे हैं तो वेस्ट यूपी में भाजपा और बसपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। वहीं इससे पहले अखिलेश यादव महान दल के केशव मौर्य और जनवादी पार्टी के संजय चौहान को भी अपने साथ मिला चुके हैं, जबकि आरएलडी के जयंत चौधरी कई बार मंच से सपा के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। उनकी किसान पंचायतों में भी सपा नेता मंच साझा करते नजर आ रहे हैं। उधर, चंद्रशेखर भी एक चैनल से बातचीत में कह चुके हैं कि बिहार की तरह यूपी में गलती न दोहराई जाए और बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन होना चाहिए।राजनीतिक दलों के नेताओं को इसके लिए अपनी जिद छोड़नी होगी।

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बता दें कि पश्चिम यूपी में जाट, मुस्लिम और दलित काफी अहम भूमिका अदा करते है। इनमें आरएलडी का कोर वोटबैंक जाट माना जाता है तो सपा का मुस्लिम। यहां जाट 20 फीसदी के करीब हैं, मुस्लिम 30 से 40 फीसदी के बीच और दलित 25 फीसदी के ऊपर हैं। पिछले कुछ समय से भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर बहुत तेजी से दलित नेता के तौर पर उभरे हैं। युवाओं में उनकी खासी पकड़ देखी जा रही है। वहीं मायावती का वोट बैंक भी चंद्रशेखर की तरफ छिटक सकता है। माना जा रहा है कि अखिलेश, जयंत और चंद्रशेखर की तिगड़ी आगामी चुनाव में भाजपा और बसपा के लिए मुसीबत बन सकती है।