
नोएडा. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में मासूम की हत्या के बाद बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंता अब हर तरफ दिखाई देने लगी है। एआरटीओ भी सड़क पर उतर आए हैं। फिटनेस और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को लागू कराने के लिए स्कूलों में चल रही बसों की जांच की गई और बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर बिना फिटनेस के दौड़ रही 70 निजी स्कूलों की 111 बसें के संचालन पर रोक लगा दी। इनमें मोटी फीस वसूलने वाले नामी स्कूल भी शामिल हैं। स्कूलों से पूछा गया है कि बसों की फिटनेस क्यों नहीं कराई गई है। साथ ही जल्द से जल्द फिटनेस कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना फिटनेस दौड़ती पाई जाने वाली स्कूल बसें सीज कर दी जाएंगी।
जिले में निजी स्कूलों के लिए 1176 वाहन रजिस्टर्ड हैं। जिनमें से 111 बसों की फिटनेस खत्म हो चुकी है। मंगलवार को परिवहन विभाग की टीम ने शहर के तीन स्कूलों का दौरा कर वहां मौजूद बसों की पड़ताल भी की। परिवहन विभाग के एआरटीओ (प्रवर्तन) हिमेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मौजूद निजी स्कूलों की 111 बसों की फिटनेस खत्म गई है। जिन्हें स्कूल द्वारा रिन्यू तक नहीं कराया गया है। इनमें कई नामी स्कूलों की बसें भी शामिल हैं। इन स्कूलों को जल्द से जल्द फिटनेस कराने के निर्देश देते हुए पूछा गया है कि बसों की फिटनेस क्यों नहीं कराई गई है। इसके अलावा सभी स्कूलों को चेतावनी भी दी गई है कि यदि कोई भी बस बिना फिटनेस सड़कों पर दौड़ती पाई गई तो उसे सीज कर दिया जाएगा।
शहर की तीन स्कूलों में पहुंची परिवहन विभाग की टीम
मंगलवार को एआरटीओ (प्रवर्तन) हिमेश तिवारी और एआरटीओ (प्रवर्तन) द्वितीय एसके सिंह अपनी टीम के साथ शहर के तीन स्कूलों में निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान टीम सेक्टर-61 स्थित सिटी स्कूल में पहुंची। जहां एक अन्य स्कूल की बस खड़ी मिली। जांच के दौरान इस बस की फिटनेस खत्म पाई गई। जिसके बाद एआरटीओ ने स्कूल के परिवहन इंचार्ज को जमकर फटकार लगाई। इसके अलावा परिवहन विभाग की टीम सेक्टर-52 स्थित नॉडी प्ले स्कूल और सेक्टर- 50 स्थित कोठारी इंटरनेशनल स्कूल में भी बसों का निरीक्षण करने पहुंची।
इस दौरान एआरटीओ एसके सिंह ने बताया कि नॉडी प्ले स्कूल की वैन की फिटनेस का भी नवीनीकरण नहीं कराया गया है, इसके लिए स्कूल प्रबंधन ने उन्हें बताया कि स्कूल ने वैन बेच दी है। एआरटीओ ने स्कूल से वैन को खरीदने वाले के बारे में जानकारी मांगी है।
इधर अभिभावक इस कार्रवाई को अच्छा, लेकिन नाकाफी कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि परिवहन अधिकारियों को स्कूल जाने की बजाए सड़कों पर दौड़ रही स्कूल बसों की जांच करनी चाहिए। स्कूल में बसें खड़ी होने पर स्कूल संचालक यह तर्क दे सकते हैं कि यह बसें बच्चों को लाने ले जाने में इस्तेमाल नहीं होती हैं। सड़कों पर जांच से बिना फिटनेस दौड़ती बसें मिलेंगी और इन्हें तुरंत सीज कर देना चाहिए।
Published on:
13 Sept 2017 10:07 am
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