24 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नोएडा में महंगा हुआ जमीन खरीदना, 15 साल में चार गुना बढ़ी कीमत

Noida: उत्तर प्रदेश में पिछले 15 साल में जमीन की कीमत चार गुना बढ़ गई है, बल्कि मार्केट में इससे भी ज्यादा रेट हैं।

2 min read
Google source verification
Noida

Noida

Noida: नोएडा में आशियाना खरीदने की चाह रखने वालों की राह कठिन होती जा रही है। यहां संपत्ति की दरें लगातार ऊंचाइयां छू रही हैं। सरकारी आंकड़ों में ही पिछले 15 सालों में संपत्ति की दरें चार गुना तक महंगी हो चुकी हैं। बाजार की कीमतें तो इससे भी एक से डेढ़ गुणा अधिक हैं।

नोएडा प्राधिकरण की शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में आवासीय संपत्तियों की दरों में छह प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। पिछले साल भी अलग-अलग श्रेणी में छह से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि साल 2008-9 में सबसे पहले ए श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 39600 और सस्ते यानि ई श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 14400 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी।

साल 2015-16 में सबसे महंगे ए श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 81400 और सस्ते सेक्टरों की आवंटन दर 29600 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। प्राधिकरण ने साल 2019-20 में सेक्टरों की नई ए प्लस श्रेणी बना दी, जिसमें सेक्टर-14ए, 15ए, 44 के ए और बी ब्लॉक तय किए गए। अब इन सेक्टर की आवंटन दर 175000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है। ए श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर भी अब बढ़कर 125340 हो गई है। इनके अलावा सबसे सस्ते यानि ई श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 48110 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है।

यह भी पढ़ें: योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 10 IPS अफसरों का ट्रांसफर, 6 जिलों के SP भी बदले गए

ई-नीलामी में 30 प्रतिशत अधिक दरें प्राप्त हुईं

अधिकारियों का कहना है कि आवासीय भूखंडों की ई-नीलामी के माध्यम से निकाली गई योजनाओं में औसतन करीब 30 प्रतिशत अधिक दरें प्राप्त हुई तथा आवंटन के लिए उपलब्ध भूखंडों के मुकाबले कई गुना अधिक आवेदन आए। प्राधिकरण के पास इस समय करीब 50 आवासीय भूखंड खाली पड़े हैं। काफी सुविधाएं और दिल्ली से सटा होने की वजह से नोएडा में संपत्ति के रेट में बीते चार-पांच वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में इसी रफ्तार से रेट बढ़ेंगे, इसकी उम्मीद कम है। अब यहां पर खाली संपत्ति का दायरा सीमित रह गया है।