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नोएडा में जज की कार चोरी करने वाला गैंग गिरफ्तार, पुलिस मुठभेड़ में 50 हजार का इनामी घायल

नोएडा में जज की कार चोरी करने वाले गिरोह की पुलिस से मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में 50 हजार का इनामी चोर घायल भी हो गया। घटना के समय नोएडा सेक्टर 113 थाना पुलिस पर्थला डूब क्षेत्र में कब्रिस्तान सर्विस रोड पर चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ हुई।

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नोएडा और एनसीआर में चार से पांच मिनट में लग्जरी कारों की इलेक्ट्रॉनिक चाबी डिवाइस से तैयार करने वाले को पुलिस ने दबोच लिया। चोरी करने वाले गिरोह के तीन शातिर अपराधियों को सेक्टर 113 थाना पुलिस ने पर्थला डूब क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया।

इस गिरोह का सरगना और 50 हजार रुपये का इनामी अपराधी गोली लगने से घायल हो गया, जिसका इलाज अस्पताल में कराया गया। पुलिस ने इन बदमाशों की निशानदेही पर नोएडा से चोरी की गई करीब एक करोड़ रुपये कीमत की पांच लग्जरी कारें, तमंचा, चोरी में इस्तेमाल किए गए उपकरण, लॉक तोड़ने वाली किट, कनेक्टिंग तार सहित अन्य सामान बरामद किया। यह गिरोह मई माह में सेक्टर 24 थाना क्षेत्र से दिल्ली कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात एक जज की कार भी चोरी कर चुका था।

घटना के समय नोएडा सेक्टर 113 थाना पुलिस पर्थला डूब क्षेत्र में कब्रिस्तान सर्विस रोड पर चेकिंग कर रही थी। इस दौरान एक स्विफ्ट कार सवार तीन संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें घेरने की कोशिश की, लेकिन वे भागने लगे। कुछ दूरी पर खुद को घिरा हुआ देख एक बदमाश ने पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया।

डीसीपी नोएडा, यमुना प्रसाद ने बताया कि घायल बदमाश की पहचान मेरठ के फतेउल्लपुर रोड स्थित शिव मंदिर के पीछे रहने वाले फरमान उर्फ छोटे के रूप में हुई। पुलिस ने उसे और उसके दो अन्य साथी असलम और मकसूर उर्फ रिहान उर्फ राहुल को गिरफ्तार किया। असलम बुलंदशहर के शिकारपुर आचरूकला गांव का और मकसूर हापुड़ के सिभावली स्थित बैट गांव का निवासी है।

पूछताछ में यह सामने आया कि ये अपराधी पार्किंग, सड़क किनारे और होटलों के बाहर खड़ी कारों की रेकी करते थे। फिर कार के साइड शीशे को तोड़कर टैबलेट के माध्यम से कार के लॉक सिस्टम को हैक कर डुप्लीकेट इलेक्ट्रॉनिक चाबी बना लेते थे। कुछ ही मिनटों में वे कार चुरा लेते और शीशा और नंबर प्लेट बदलकर उसे बेच देते थे।

एडीसीपी नोएडा, सुमित कुमार शुक्ला ने बताया कि यह गिरोह पुलिस से बचने के लिए 'जंगी एप' का इस्तेमाल करते थे, जिससे वे आपस में संपर्क साधते थे और पुलिस के सर्विलांस से बचते थे। तीनों बदमाश पहले से ही शातिर अपराधी थे, जिन पर फरमान पर 33 और असलम व मकसूर पर पांच-पांच मुकदमे दर्ज थे। चोरी की रकम से वे अपना खर्चा चलाते थे और लग्जरी जीवन जीते थे, साथ ही अपने मुकदमों की पैरवी भी करते थे।

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