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सांप्रदायिक सौहार्द की अलख जगा रही गीता गर्ल

गीता गर्ल मरियम सिद्दीकी ने कहा- गीता व कुरान का संदेश फैलाकर सामाजिक सद्भाव कायम करना ही मेरा उद्देश्य

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नोएडा

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lokesh verma

Jan 01, 2018

Noida

नोएडा. जहां देशभर में धर्म के नाम पर आए दिन राजनीतिक रोटियां सेकी जाती हैं। सांप्रदायिक तनाव के मामले सामने आते हैं। वहीं मरियम सिद्दीकी देशभर में सांप्रदायिक सद्भाव कायम कर मिसाल पेश कर रही हैं। मरियम की माने तो सभी धर्म इंसानियत और नेकी का संदेश देते हैं। इसलिए हमें उनका अध्ययन कर आदर करना चाहिए। गीता व कुरान का संदेश फैलाकर सामाजिक सद्भाव कायम करना ही उनका उद्देश्य है। उक्‍त बातें मरियम ने पत्रिका से हुई खास बातचीत के दौरान कहीं। बता दें कि 14 वर्षीय मरियम को श्रीमद्भागवत गीता के पूरे श्लोक के साथ कुरान की आयतें भी कंठस्थ हैं। वे वर्ष 2015 में गीता गर्ल का खिताब हासिल कर चुकी हैं।

मरियम के पिता आसिफ सिद्दीकी ने बताया कि वे बचपन से ही प्रतिभाशाली रही हैं। उन्‍होंने कहा कि ये बात करीब छह साल पुरानी है, जब मरियम 8 साल की थी। उसने मुझसे पूछा कि अब्‍बा ये हिंदू क्‍या होता? बालमन द्वारा पूछे गए इस सवाल ने उन्‍हें अंदर तक हिलाकर रख दिया। मरियम के इस सवाल के बाद वे उसी दिन श्रीमद्भागवत गीता घर ले आए और मरियम को बुलाकर श्रीमद्भागवत गीता और कुरान दोनों ग्रंथ उसके सामने रख दिए। साथ ही कहा कि बेटी इन दोनों को पढ़ोगी तो तुम्‍हे तुम्‍हारे सवाल का जवाब मिल जाएगा। फिर क्‍या था मरियम ने उसी दिन से गीता पढ़ना शुरू कर दिया और मात्र 12 वर्ष की आयु में उसे दोनों ग्रंथ कंठस्‍थ हो गए। वह संस्कृत के श्लोकों को धाराप्रवाह बोलने लगी, जो आजकल के लोग आसानी से नहीं पढ़ पाते हैं। बता दें 2015 में इस्कॉन द्वारा श्रीमद्भागवत गीता को लेकर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। जिसमें मरियम ने देश में प्रथम स्थान हासिल कर गीता गर्ल का खिताब हासिल कर किया था। इतना ही नहीं मरियम उत्तरप्रदेश पुलिस चाइल्ड विंग गुडविल की ब्रांड एंबेसडर भी रह चुकी हैं।

कर्म करो और फल की इच्छा मत रखो

मरियम कहती हैं कि गीता और कुरान दोनों एक ही बात सिखाते हैं कि कर्म करो और फल की इच्छा मत रखो। मरियम के अनुसार सभी धर्मों का संदेश इंसानियत और नेकी का है और सबका हमें आदर करके उनका अध्ययन कर अमल में लाना चाहिए। गीता व कुरान का संदेश फैलाकर सामाजिक सद्भाव कायम करना ही उनका उद्देश्य है। उन्‍होंने बताया कि एक बार लखनऊ भ्रमण के दौरान जब वे मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मिली तो उन्‍होंने पूछा था हम आपके लिए क्या कर सकते हैं तो मैंने कहा कि उन्हें अयोध्या घूमना है। इसके बाद सीएम योगी ने मेरे अयोध्या घूमने का इंतजाम किया और अवधि भाषा की एक रामायण भी भेंट की, जिसे मैं आजकल पढ़ रही हूं।

सामाजिक सद्भाव कायम करना ही मेरा उद्देश्य

मरियम ने कहा कि उनका उद्देश्य पूरी दुनिया में नेकी का संदेश देना है। क्योंकि नेकी ही है जो इस दुनिया को सही रास्ता दिखा सकती है। दुनिया में जिस भी जगह खून-खराबा हो रहा है, वहां के लोगों को मैं बताना चाहती हूं कि गीता व कुरान बंदे को नेकी की राह दिखाते हैं। यह संदेश पूरी दुनिया में फैलाकर सामाजिक सद्भाव कायम करना ही मेरा उद्देश्य है। मरियम कहती हैं कि रामायण जीवन का आदर्श है, जिसने इन्हें जान लिया, वह अपने जीवन का मूल अस्तित्व जान जाएगा।

राजनीति में आकर करूंगी देश की सेवा

मूलरूप से कानपुर निवासी मरियम के पिता असिफ सिद्दीकी के पिता और मरियम के बाबा नसीमुद्दीन सिद्दीकी वर्ष 1970 में कानपुर से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। जिसके चलते मरियम राजनीति में आकर देश की सेवा करना चाहती है। ऐसा उन्होंने पत्रिका को दिए साक्षात्कार में बताया। उनसे जब पूछा गया कि वे किस पार्टी से जुड़ना चाहती हैं तो मरियम ने कहा कि बीजेपी उनकी पसंदीदा राजनीतिक पार्टी है। वे उसी से जुड़ना पसंद करेंगी।