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ग्रेटर नोएडा : फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट गिरोह का पर्दाफाश, छह आरोपी गिरफ्तार

सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर कंपनियों को अपने जाल में फंसाने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा है। गिरोह आईएसओ सर्टिफिकेट, वेबसाइट डिजाइनिंग, बारकोड, प्रमोशनल वीडियो, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क आदि का झांसा देकर पैसे वसूलता था।

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नोएडा

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Aman Pandey

Jul 11, 2025

UP crime

ग्रेटर नोएडा में पुलिस ने साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। फोटो- आईएएनएस

ग्रेटर नोएडा में थाना बिसरख पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर कंपनियों को झांसा देकर फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट बनाता था। पुलिस ने इस गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 9 लैपटॉप, एक टैबलेट, 8 मोबाइल फोन, एक स्वाइप मशीन और लगभग 60 फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

अब तक 68 लाख की ठगी कर चुका है गिरोह

जानकारी के मुताबिक, गिरोह अब तक 68 लाख रुपए की ठगी कर चुका है। इस गिरोह के फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब इंडिको रिटेल प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के संचालक ने थाना बिसरख में शिकायत दर्ज कराई कि उसने अपने उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 'ब्रांडौलाजी मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी से संपर्क किया था। आरोपियों ने कंपनी को डिजिटल प्रचार, आईएसओ सर्टिफिकेशन और बिक्री बढ़ाने का झांसा देकर 3.28 लाख रुपए ऐंठ लिए, लेकिन न तो कोई ब्रांडिंग की गई और न ही कोई वैध प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

ऐसे करते थे धोखाधड़ी

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर कंपनियों को अपने जाल में फंसाते थे। आईएसओ सर्टिफिकेट, वेबसाइट डिजाइनिंग, बारकोड, प्रमोशनल वीडियो, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क आदि का झांसा देकर पैसे वसूलते थे। बाद में फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट इंटरनेट से डाउनलोड कर उसमें एडिटिंग करके एक दिन में बना देते थे। ये गिरोह ग्राहकों के बार-बार पूछने पर उनके उत्पाद की गुणवत्ता को खराब बताकर उन्हें आईएसओ प्रमाण पत्र न मिलने का धोखा भी देता था और पैसे भी नहीं लौटाता था।

फर्जी दस्तावेज बनाने में कंपनी की अहम भूमिका

इस पूरे गिरोह का सरगना मयंक तिवारी है और कंपनी का डायरेक्टर भी है। उसकी फर्जी दस्तावेज तैयार करने और योजना बनाने में प्रमुख भूमिका थी। इसके अलावा, विकास शर्मा कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव है, जो लैपटॉप और मोबाइल से सर्टिफिकेट बनाता था। प्रदीप कुमार यादव भी तीन वर्षों से गिरोह से जुड़ा हुआ है और ठगी में शामिल था। इसी गिरोह का अविनाश गिरी एक वेबसाइट डेवलपर है, जो कंपनी की फर्जी वेबसाइट पर गुमराह करने वाला डाटा डालता था।

इन जगहों पर खोला था ऑफिस

गैंग का प्रदीप यादव विज्ञापन संभालता था और केशव इस कंपनी में कस्टमर रिलेशन मैनेजर था, जो फर्जी आईएसओ प्रमाणपत्र बनाकर सत्यता दिखाने के लिए नकली वेबसाइट बनाता था। यह गिरोह पहले सेक्टर-63 में "भारत का डिस्ट्रीब्यूटर" नाम से कंपनी चला रहा था। जब वहां शिकायत दर्ज हुई, तो ऑफिस बंद कर ग्रेटर नोएडा के एनएक्स वन टॉवर में "ब्रांडौलाजी मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड" के नाम से नया कार्यालय खोल लिया।