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आरुषि-हेमराज हत्याकांडः तलवार दंपती की रिहाई पर पड़ोसियों ने जताई खुशी

पड़ोसियों का कहना है कि आरुषि बहुत अच्छी लड़की थी। उसका कत्ल उसके माता-पिता नहीं कर सकते थे।

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arushi hemraj murder

नोएडा. सेक्टर-25 के एल-32 नंबर फ्लैट में रहने वाले तलवार दंपत्ति के पड़ोसी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि आरुषि बहुत अच्छी लड़की थी। उसका कत्ल उसके माता-पिता नहीं कर सकते थे। न जाने किस बिना पर सीबीआई कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट से उन्हें न्याय मिला है। दरअसल, तलवार दंपती ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मामले पर फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद काईकोर्ट ने गुरुवार को आरुषि-हेमराज मर्डर केस से तलवार दंपती को बरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कर दिया कि आरुषि-हेमराज की हत्या तलवार दंपती ने नहीं की है।

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देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री का रहस्य सुलझाने में CBI भी नाकाम
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई भी आरुषि-हेमराज के बहुचर्चित हत्याकांड से पर्दा उठाने में नाकाम साबित हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आरुषि-हेमराज मर्डर केस के आरोपी तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया। कोर्ट ने साफ कह दिया कि आरुषि की हत्या तलवार दंपत्ति ने नहीं की है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि आखिर आरुषि और हेमराज की हत्या किसने की थी और इस रहस्य से पर्दा कभी उठेगा या नहीं। लेकिन, हाईकोर्ट के फैसले पर आरुषि के पड़ोसियों का कहना है कि आरुषि बहुत अच्छी लड़की थी। उसका कत्ल उसके माता-पिता नहीं कर सकते थे।

देश के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस को जानने के लिए अब से करीब साढ़े नौ साल पीछे चलना होगा। 15-16 मई 2008 की रात सेक्टर-25 के एल-32 नंबर के फ्लैट में डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार की 14 वर्षीय बेटी आरुषि तलवार की हत्या हो गई थी। 16 मई की सुबह उसका शव उसके बेडरूम में मिला था। उस समय घर में काम करने वाला हेमराज नहीं मिला। तब इस बात के कयास लगाए जाने लगे कि हेमराज ने ही आरुषि की हत्या कर दी और फरार हो गया। लेकिन, 17 मई को एल-32 नंबर के फ्लैट की छत पर हेमराज की भी लाश मिल गई। इसके बाद मामला पूरी तरह से उलझ गया।

घटना के बाद इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस ने की। मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण जांच एसटीएफ के हवाले कर दिया गया। आखिर, पुरजोर मांग के चलते सरकार ने जून-2008 के पहले ही हफ्ते में आरुषि-हेमराज मर्डर केस की जांच सीबीआई के हवाले कर दी। जांच के बाद सीबीआई ने अपने फाइनल रिपोर्ट में कहा था कि आरुषि-हेमराज मर्डर केस में परिस्थितिजन्य साक्ष्य डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार के खिलाफ है, लेकिन पुख्ता सबूत न होने के कारण उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। इस रिपोर्ट पर सीबीआई की विशेष अदालत ने जांच अधिकारियों को फटकार लगाई और जो भी साक्ष्य उपलब्ध है, उसे कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। आखिर, सीबीआई की विशेष अदालत ने तलवार दंपत्ति को बेटी और नौकर हेमराज के कत्ल के आरोप में उम्रकैद की सजा सुना दी।

आरुषि-हेमराज की हत्या के साढ़े नौ साल का समय बीत गया, लेकिन रहस्य अब भी बरकरार है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई भी इस बहुचर्चित हत्याकांड से पर्दा उठाने में नाकाम रही है। अब सवाल यही है कि आखिर आरुषि और हेमराज को न्याय कैसे मिलेगा और कौन दिलाएगा।