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GOOD NEWS: गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में इस वर्ष नहीं बढ़ेंगे जमीन के सर्किल रेट

Highlights -संपत्ति पुनरीक्षण मूल्यांकन समिति की सिफारिश पर लिया फैसला -प्राधिकरण जमीन की आवंटन दरें नहीं बढ़ाने का फैसला ले चुके हैं -बिलडरोंं और प्रॉपर्टी खरीददारों ने ली राहत की सांस

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नोएडा/गाजियाबाद। कोरोना महामारी और रियल एस्टेट में मंदी के मद्देनजर गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में इस वर्ष प्रॉपर्टी के सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाएंगे। संपत्ति पुनरीक्षण मूल्यांकन समिति की सिफारिश पर दोनों जिलों के जिलाधिकारी ने यह फैसला लिया है। हालांकि इससे पहले नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण समेत उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण जमीन की आवंटन दरें नहीं बढ़ाने का फैसला ले चुके हैं।

गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि जनपद में 30 दिसंबर तक जमीन के सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाएंगे। जिले की प्रॉपर्टी के पुनरीक्षण मूल्यांकन के लिए 30 जुलाई को रजिस्ट्रार और उप जिलाधिकारियों की संपत्ति पुनरीक्षण मूल्यांकन समिति का गठन किया गया था। समिति ने निर्णय लिया है कि फिलहाल बाजार दर और सर्किल दरों में कोई फर्क नजर नहीं आता है। जिसके चलते अभी सर्वे करके यह जानकारी हासिल करना संभव नहीं है। लिहाजा, इस वर्ष 31 दिसंबर तक जिले में जमीन के सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाएंगे।

वहीं गाजियाबाद के जिलाधिकारी डॉ अजय शंकर पांडे ने भी सर्किल रेट में वृद्धि नहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ी हुई हैं। इसके चलते संपत्तियों की मांग बहुत अधिक नहीं है। जिसके चलते सर्किल रेट और रजिस्ट्रेशन रेट में कोई फर्क नजर नहीं आता। लिहाजा, इस वक्त प्रॉपर्टी की कीमतों में वृद्धि करना उचित नहीं होगा। अग्रिम आदेशों तक प्रचलित सर्किल दरें ही सभी श्रेणियों में लागू रहेंगी।

गुरुवार को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक हुई है। जिसमें प्राधिकरण ने भी 31 मार्च 2021 तक अपनी प्रॉपर्टी की आवंटन दरें नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। उधर, गौतमबुद्ध नगर की तीनों विकास प्राधिकरणों ने पहले ही साफ कर दिया था कि आवंटन दरों में कोई इजाफा नहीं किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण भी इस साल अपनी आवंटन दरें नहीं बढ़ाएगा।

गौरतलब है कि दोनों जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरणों के इस फैसले से प्रॉपर्टी बाजार ने राहत की सांस ली है। बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों की मानें तो पिछले 5 वर्षों से रियल एस्टेट सेक्टर का बुरा हाल है। दिल्ली एनसीआर में सबसे महंगी संपत्तियां गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जिले में होती थीं, लेकिन पिछले 3 वर्षों में प्रॉपर्टी की दरें बढ़ना तो दूर, गिर रही हैं। नोटबंदी और उसके बाद आर्थिक गिरावट ने प्रॉपर्टी बाजार व रियल एस्टेस्ट सेक्टर की कमर तोड़कर रख दी है। दूसरी ओर पिछले 3 महीनों से कोरोना के कारण फैली महामारी ने हालात और ज्यादा बिगाड़ दिए हैं।

विशेषज्ञों ने फैसले का स्वागत किया

दोनों जनपदोंं के विकास प्राधिकरण और जिलाधिकारियों के प्रॉपर्टी की दरों को न बढ़ाने के फैसले का प्रॉपर्टी विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। प्रॉपर्टी मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट ओमकार शर्मा की मानें तो पिछले 3 वर्षों के दौरान लगातार प्रॉपर्टी की कीमतें गिरी हैं। पहली बार देखने में आया है जब आवासीय भूखंडों की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। लोग फ्लैट और बनी हुई दुकानें खरीदने के लिए तो बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। ऐसे में अगर जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण सर्किल रेट व आवंटन दरों में इजाफा करते तो हालत और ज्यादा खराब हो सकती थी।