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अखिलेश यादव को फिर लगा एक और तगड़ा झटका, अब इस सपा संस्थापक सदस्य ने दिया पार्टी से इस्तीफा

सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक व आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ चुके एहसान खान ने दिया पार्टी से इस्तीफा

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नोएडा

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lokesh verma

Oct 22, 2018

akhilesh yadav

अखिलेश यादव को फिर लगा एक और तगड़ा झटका, अब इस सपा संस्थापक सदस्य ने दिया पार्टी से इस्तीफा

नोएडा. लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को प्रदेश में एक और बड़ा झटका लगा है। अखिलेश यादव पर हिंदुत्व की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सपा के संस्थापक सदस्यों में गिने जाने वाले व आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ चुके एहसान खान ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। यह घोषणा एहसान खान ने नोएडा के सेक्टर-66 में स्थित ऑरेंज पाई होटल में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान की। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे सबकुछ भूल गए हैं कि उनके चाचा और नेता जी भी हैं।

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इस दौरान समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता एहसान खान ने कहा कि उन्होंने अखिलेश को बहुत समझाया कि वे नेता जी यानि मुलायम सिंह के विचारों पर चलें, ताकि हम सब एक रहें और परिवार एक रहे। लेकिन, उन्होंने एक नहीं सुनी, जिसके कारण आज समाजवादी पार्टी बर्बाद होने की कगार पर आ गई है। यह आप साफ देख और महसूस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिवपाल और नेता जी ने जिस उम्मीद से अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया था। उस उम्मीद को अखिलेश ने मटियामेट कर दिया है। अब सपा का अब कोई अस्तित्व नहीं रहा है। अखिलेश ने नेता जी को पार्टी से बेदखल करने के साथ राजनीतिक और सामाजिक रूप से समाप्त करने की जो योजना बनाई है। उससे नेता जी को घुट-घुट कर जीना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने पार्टी बनाने समेत नेता जी की जीवन रक्षा करने वाले चाचा को इस कदर अपमानित किया कि उन्हें अलग रास्ता बनाने को मजबूर होना पड़ा।

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एहसान खान ने बताया कि अखिलेश सपा पार्टी पर गुंडों के टैग को हटाने के लिए डीपी यादव, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, रमाकांत यादव समेत तमाम लोगों को पार्टी से हटाकर 2014 में हुए चुनाव में 5 सीटों पर ही सिमट कर रह गए थे। वहीं 2017 में समाजवादी पार्टी से यादव परस्ती और मुस्लिम परस्ती के टैग को हटाने के चक्कर में 224 में से 47 सीटों पर संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव गठबंधन का सपना तो देख रहे हैं, लेकिन मायावती या देश का 35 करोड़ दलित कैसे भुला सकता है कि अखिलेश के निर्देश पर उनके सांसदों ने आरंक्षण के बिल को फाड़कर लोकसभा में पारित नहीं होने दिया तो इस स्थिति में गठबंधन कैसे संभव हो सकता है। वहीं उन्होंने कहा कि परिस्थितिओं को देखते हुए आगे आने वाले समय में यदि हमें समाजवादी सर्कुलर मोर्चा का हांथ थामना पड़ा तो मोर्चे में मुस्लिम चेहरे के रूप में आ सकते हैं।

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