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नोएडा प्राधिकरण को सुपरटेक एमराल्ड केस में सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- आपके अंग-अंग से टपकता है भ्रष्टाचार

Supertech Emerald Case में बिल्डर का पक्ष लेने और फ्लैट बायर्स की कमियां बताने पर Supreme Court ने Noida Authority को सुनाई खरी-खरी।

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नोएडा

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lokesh verma

Aug 05, 2021

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नोएडा. सुपरटेक एमराल्ड मामले (Supertech Emerald Case) में बिल्डर का पक्ष लेने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप बिल्डर की भाषा बोल रहे हैं, आपके अंग-अंग से भ्रष्टाचार (Corruption) टपकता है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा एक्सप्रेसवे स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट केस में नोएडा प्राधिकरण द्वारा अपने अधिकारियों का बचाव करने और फ्लैट बायर्स (Flat Buyers) की कमियां बताने पर की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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जस्टिस डीवाई चंद्रयूड और जस्टिस एमआर शाह की पीठ के सामने सुनवाई में नोएडा अथॉरिटी के अधिवक्ता रविंदर कुमार ने प्राधिकरण के साथ ही उसके अधिकारियों का बचाव किया और कहा कि सुपरटेक एमराल्ड मामले में सभी नियमों का पालन किया गया है। इसके साथ ही अधिवक्ता ने फ्लैट बायर्स की कमियां भी गिनानी शुरू कर दीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यह दुख की बात है कि आप पब्लिक अथॉरिटी होते हुए डेवलपर्स की ओर से बोल रहे हैं, आप कोई निजी अथॉरिटी नहीं हैं।

जबकि सुपरटेक की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने पीठ से कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर टावरों को गिराने में नियमों की अनदेखी नहीं की है। सिंह ने भी फ्लैट बायर्स पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 2009 में टावरों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था। इसके बाद भी महज तीन साल बाद ही वे हाईकोर्ट क्यों गए? इस पर जस्टिस शाह बोले कि प्राधिकरण को तटस्थ की भूमिका निभानी चाहिए थी। ऐसा लगता है कि आप बिल्डर की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अथॉरिटी फ्लैट बायर्स से लड़ाई लड़ रही है। इस पर अधिवक्ता रविंदर कुमार ने कहा कि वह तो अथॉरिटी का पक्ष रख रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई थी रोक

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2014 में हाउसिंग सोसायटी में नियमों के उल्लंघन पर दो टावर गिराने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद सुपरटेक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई थी।

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