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खत्म हुई इंतजार की घड़ी: Noida International Airport के लिए स्विस कंपनी से कल होगा करार

Highlights - देश में सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने की कवायद तेज - 7 अक्टूबर को दोपहर एक बजे Noida International Airport लिमिटेड के कार्यालय पर होगा करार - Zurich Airport International AG कंपनी के सात प्रतिनिधि भारत पहुंचे

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नोएडा

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lokesh verma

Oct 06, 2020

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नोएडा. देश में सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने की कवायद तेज हो गई है। कल यानी 7 अक्टूबर को दोपहर एक बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के कार्यालय में करार पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। एयरपोर्ट का निर्माण करने वाली कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट एंटरनेशनल एजी (Zurich Airport International AG) के प्रतिनिधि भारत पहुंच चुके हैं। करार से पहले यमुना प्राधिकरण और नियाल के कार्यालयों का सजाने का कार्य चल रहा है। यहां बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर हवाई अड्डा) प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 29,500 करोड़ रुपए है।

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दरअसल, नोएडा इंटरनेशनल एयपोर्ट के करार के लिए ज्यूरिख कंपनी के सात प्रतिनिधि भारत पहुंच चुके हैं, जिन्हें गुरुग्राम के एयरो सिटी में ठहराया गया है। 7 अक्टूबर को एक बजे से पहले कंपनी के प्रतिनिधि ग्रेटर नोएडा स्थित नियाल के कार्यालय पहुंचेंगे। जहां 29,500 करोड़ के प्रोजेक्ट पर करार किया जाएगा। इस करार के लिए कंपनी ने यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. के नाम से स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) कंपनी भी गठित की है। उसके सीईओ और नियाल के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह करार पर हस्ताक्षर करेंगे।

यहां बता दें कि ज्यूरिख कंपनी के साथ होने वाला यह करार करीब छह माह पहले ही होना था, लेकिन कोरोना वायरस का असर योगी सरकार के इस महत्वाकांक्षी प्राजेक्ट पर भी पड़ा। इस महामारी के कारण जहां दुनियाभर की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद रहीं। वहीं भारत के साथ ही स्विट्जरलैंड ने भी विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध लगा रखा था। इस कारण ज्यूरिख कंपनी के अधिकारी जेवर एयरपोर्ट के लिए करार पर हस्ताक्षर करने नहीं आ पा रहे थे।

योगी सरकार मात्र तीन साल में पहुंची करार तक

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की घोषणा 2004 में की गई थी, लेकिन उसके बाद कोई काम नहीं हुआ। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2012 में इस परियोजना को रद्द कर दिया था। मार्च 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आते ही फिर से जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए प्रयास शुरू हो गए। इसके बाद केवल तीन साल में यह प्रोजेक्ट करार तक जा पहुंचा है। बता दें कि जिस तेज गति से यह प्रोजेक्ट करार तक पहुंचा है, वह भी अपने आपमें एक रिकॉर्ड है। बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बनना है। एयरपोर्ट पर छह से आठ रनवे होंगे।

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