5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Parliament New Building: नए संसद भवन को संवारने में नोएडा और मिर्जापुर से इस्तेमाल हुईं ये खास चीजें, देखे वीडियो

Parliament New Building: नए संसद भवन में का उद्धाटन 28 मई को पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे। इसमें यूपी के कई जिलों की खास चीजों का इस्तेमाल हुआ है।

2 min read
Google source verification
msg891835523-20573.jpg

Parliament New Building

Parliament New Building: नए संसद भवन में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की कालीन, त्रिपुरा के बांस से बने फर्श और राजस्थान के पत्थर की नक्काशी भारत की संस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। नए संसद भवन में प्रयुक्त सागौन की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से लाई गई थी।

28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने वाले हैं। पीएम ने शुक्रवार को इस नए संसद भवन का फर्स्ट लुक भी जारी किया। इसके पहले हमने डिजिटलाइज्ड तस्वीरें ही देखी थीं। पीएम मोदी ने एक ट्वीट किया है,जिसमें आप करीब से नए संसद का भव्य इंटीरियर देख सकते हैं।

कहीं से लाई गए बलुआ पत्थर, तो कही से लाया गया कालीन
आपको बता दें कि लाल किले और हुमायूं के मकबरे के लिए बलुआ पत्थर भी सरमथुरा से लाया गया था। केशरिया हरा पत्थर उदयपुर से, अजमेर के निकट लाखा से लाल ग्रेनाइट और सफेद संगमरमर अंबाजी राजस्थान से मंगवाया गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘एक तरह से लोकतंत्र के मंदिर के निर्माण के लिए पूरा देश एक साथ आया, इस प्रकार यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत की सच्ची’ भावना को दर्शाता है।’’

इमारत पर लगे पत्थर की जाली आई नोएडा से
लोकसभा और राज्यसभा कक्षों में ‘फाल्स सीलिंग’ के लिए स्टील की संरचना केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव से मंगाई गई है, जबकि नए भवन के लिए फर्नीचर मुंबई में तैयार किया गया था। इमारत पर लगे पत्थर की ‘जाली’ राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा से मंगवाई गई थी।

फ्लाई ऐश की ईंटें भी आईं यूपी से
नए संसद भवन में निर्माण गतिविधियों के लिए ठोस मिश्रण बनाने के लिए हरियाणा में चरखी दादरी से निर्मित रेत या ‘एम-रेत’ का इस्तेमाल किया गया था। ‘एम रेत’ कृत्रिम रेत का एक रूप है, जिसे बड़े सख्त पत्थरों या ग्रेनाइट को बारीक कणों में तोड़कर निर्मित किया जाता है जो नदी की रेत से अलग होता है। निर्माण में इस्तेमाल की गई ‘फ्लाई ऐश’ की ईंटें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मंगवाई गई थीं, जबकि पीतल के काम लिए सामग्री और ‘पहले से तैयार सांचे’ गुजरात के अहमदाबाद से लिए गए।