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दादा स्वतंत्रता सैनानी और भाई सैनिक, आतंकी कनेक्शन के आरोप में पकड़े गए तुषार चौहान की पूरी कहानी

Tushar Chauhan Terror Connections Story: आतंकी कनेक्शन के आरोप में पकड़े गए तुषार चौहान के दादा स्वतंत्रता सैनानी थे। वहीं उसका भाई सैनिक है।

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आतंकी कनेक्शन के आरोप में पकड़े गए तुषार चौहान की पूरी कहानी। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Tushar Chauhan Terror Connections Story: आतंकी कनेक्शन के आरोप में नोएडा से पकड़े गए तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस बीच उसके परिवार और गांव के लोगों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में हैं। परिजनों का दावा है कि तुषार पढ़ाई में कमजोर था, क्रिकेटर बनना चाहता था और लंबे समय से मोबाइल में ही व्यस्त रहता था।

क्रिकेटर बनने का सपना, लेकिन अधूरा रह गया सफर

परिजनों के मुताबिक, तुषार चौहान की इच्छा क्रिकेटर बनने की थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए उसे हरियाणा की एक बड़ी क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। हालांकि वह वहां दो-ढाई महीने ही रह सका और वापस लौट आया। परिवार का कहना है कि वह प्रशिक्षण जारी नहीं रख पाया और इसके बाद उसका झुकाव मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों की ओर ज्यादा हो गया।

पढ़ाई में कमजोर, दसवीं भी नहीं कर पाया पास

तुषार के चाचा धर्मेंद्र चौहान के मुताबिक, वह पढ़ाई में कमजोर था। आठवीं कक्षा पास करने के बाद उसने ओपन स्कूल से दसवीं करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया। परिवार का कहना है कि बचपन में उसकी मानसिक स्थिति को लेकर भी चिंता रही और उपचार भी कराया गया था।

स्वतंत्रता सेनानी परिवार से है संबंध

परिवार ने बताया कि तुषार ऐसे परिवार से आता है, जिसकी पृष्ठभूमि देशभक्ति से जुड़ी रही है। उसके दादा गोवर्धन सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे और सुभाष चंद्र बोस की सेना से जुड़कर आजादी की लड़ाई में शामिल रहे थे। परिजनों के मुताबिक, तुषार के ताऊ हरेंद्र, और चाचा रविंद्र सेवानिवृत्त सैनिक हैं, जबकि उसका एक चचेरा भाई अभी भी सेना में सेवाएं दे रहा है।

पहले भी विवादों में आ चुका नाम

परिवार ने बताया कि कुछ समय पहले धार्मिक टिप्पणी से जुड़े एक मामले में मेरठ में तुषार की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया था। हालांकि परिजनों का कहना है कि पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन से उसका नाम कैसे जुड़ा, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

गांव में कम रहा, मोबाइल में ज्यादा व्यस्त रहता था

परिवार के मुताबिक, तुषार गांव में बहुत कम आता-जाता था। उसके पिता शैलेंद्र मेरठ के गंगानगर इलाके में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं और कंकरखेड़ा में रहते हैं। चाचा का कहना है कि जब वह गांव आता भी था, तब भी ज्यादातर समय मोबाइल में ही व्यस्त रहता था और ज्यादा बातचीत नहीं करता था।

चाचा ने बनाई दूरी, गांव में नाराजगी

तुषार के चाचा धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि इस मामले में उनका और परिवार का उससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों से परिवार खुद को अलग मानता है। वहीं गांव के लोगों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले से पूरे गांव की बदनामी हुई है।

गांव में चर्चा का विषय बना मामला

तुषार चौहान का मामला अब गांव से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर परिवार उसके अतीत और व्यवहार को लेकर अपने दावे रख रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां उसके कथित आतंकी कनेक्शन की परतें खोलने में जुटी हैं।