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UP में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, इस पूर्व सपा सांसद को भाजपा देगी राज्यसभा का टिकट

खास बातें- - उत्तर प्रदेश की रिक्त दो राज्यसभा सीटों पर नामांकन की अंतिम तिथि 12 सितंबर - 23 सितंबर को होगा मतदान और मतों की गणना- पश्चिमी यूपी के गुर्जर नेता सुरेंद्र नागर को फिर से राज्यसभा भेज सकती है भाजपा

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नोएडा

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lokesh verma

Aug 30, 2019

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नोएडा. राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर व संजय सेठ के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर उपचुनाव के लिए तारीखों की घोषणा कर दी गई है। उपचुनाव की अधिसूचना 5 सितंबर को जारी की जाएगी। वहीं नामांकन की अंतिम तिथि 12 सितंबर निर्धारित की गई है। दोनों सीटों पर मतदान और मतों की गणना 23 सितंबर को होगी। बता दें भाजपा के पास उपचुनाव जीतने के पूरा बहुमत है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा फिर से सुरेंद्र नागर को टिकट देकर राज्यसभा भेजेगी।

राज्यसभा के उपचुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी और राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए सुरेंद्र नागर को एक बार फिर राज्यसभा भेजा जा सकता है। बता दें कि सुरेंद्र नागर की पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ है। यही वजह है कि उन्हें भाजपा में शामिल किया गया है। वहीं उपचुनाव जीतने के लिए प्रदेश में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है। ऐसे में दोनों राज्यसभा सीट भाजपा के खाते में जानी तय हैं। भले ही राज्यसभा की इन दोनों सीटों के टिकटों पर लोगों की नजर हो, लेकिन माना यही जा रहा है कि भाजपा नीरज शेखर की तरह ही सुरेंद्र नागर को भी फिर से उच्च सदन में भेजेगी। क्योंकि उनके सपा छोड़ने और राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद से ही इसकी संभावना जताई जा रही थी।

उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख दलों में रह चुके हैं सुरेंद्र नागर

बता दें कि पूर्व राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल राष्ट्रीय लोक दल, बहुजन समाज पार्टी और सपा में रह चुके हैं। जब तक सुरेंद्र नागर बसपा में रहे तब नोएडा समेत पूरे वेस्ट यूपी में उनकी पार्टी का वर्चस्व था। हालांकि इसके बावजूद वह भट्टा पारसौल कांड के दौरान पार्टी लाइन से हटकर सबसे पहले गांव पहुंचकर किसानों से मिले थे। उनका भट्टा-पारसौल गांव जाना बसपा को इस कदर नागवार गुजरा कि पार्टी ने इस पर आपत्ति जता दी, लेकिन सुरेंद्र नागर ने भी साफ कह दिया था कि वह किसानों के साथ हैं और रहेंगे। इसके अलावा राज्यसभा सांसद रहते हुए भी किसानों की मांगों को जोर-शोर के साथ सदन में उठाया।