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World dairy summit 2022: राजस्थान की 11 महिलाओं ने बनाई मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी, सालाना होती है बंपर कमाई

राजस्थान के पाली जिले में महिलाओं का एक समूह बनाया गया। जिसके द्वारा संचालित कंपनी आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी है। इस कंपनी में दूध का पैसा महीने में तीन बार महिला के खाते में आता है। जिसका सालाना टर्नओवर 160 करोड़ का है।

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नोएडा

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Jyoti Singh

Sep 14, 2022

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इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे वर्ल्ड डेयरी समिट आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का स्टाल लगा है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। राजस्थान के पाली जिले में 2016 में टाटा ट्रस्ट का धानी फाउंडेशन व राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के द्वारा महिलाओं का एक समूह बनाया गया। जिसके द्वारा संचालित कंपनी आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी है। इस कंपनी ने गांव में गाय भैंस का दूध का व्यवसाय करने वाली महिलाओं को जोड़कर समूह बनाया गया। जिसमें महिला के नाम पर बैंक में खाता खुलता है और दूध का पैसा महीने में तीन बार महिला के खाते में आता है। जिसका सालाना टर्नओवर 160 करोड़ का है। यह समूह महिला सशक्तिकरण व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

राजस्थान के 5 जिलों में चल रही कंपनी

वर्ल्ड डेयरी समिट में भाग लेने आईं आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की चेयरमैन कन्या देवी ने बताया कि राजस्थान के पाली जिले के बाली गांव की 11 महिलाओं ने 2016 में समूह बना कर आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की शुरुआत की। उसके बाद कई गांव की महिलाएं इस कंपनी के साथ जुड़ी और इसकी शेयर होल्डर बनी। यह कंपनी राजस्थान के 5 जिलों में चल रही है और लगभग 565 गांव में आज 28 हजार महिलाएं इस समूह के साथ जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने बताया कि आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़कर उनके जीवन में काफी बदलाव हुए हैं। महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं क्योंकि इस समूह में महिला के नाम से खाता खोला जाता है जिसमें दूध का सारा पैसा उनके सीधे खाते में भेजा जाता है। महिलाएं अपने खर्चे के हिसाब से पैसे खर्च कर अपने जीवन में बदलाव कर रही हैं।

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व्यवसाय के साथ पढ़ाई की दिशा में बढ़ रहीं महिलांए

कंपनी से जुड़ी रेखा माली ने बताया कि दूध का काम वह पहले भी करती थीं लेकिन इतनी लगन से नहीं करती थी। जब से वह समूह से जुड़ी हैं, उसके बाद सीधा पैसा उनके खाते में आने लगा है। इसीलिए वह अब पूरी लगन और मेहनत से दूध के काम में जुट गई है। कई महिलाएं ऐसी हैं जो समूह में जुड़ने से पहले पांचवी तक की पढ़ी लिखी थीं लेकिन समूह में जुड़ कर पैसा जब उनके पास आने लगा तो वह व्यवसाय के साथ-साथ अपनी पढ़ाई की दिशा में भी आगे बढ़ने लगीं और हाईस्कूल व इंटर तक की पढ़ाई की।

तीन बार में खातों में आती है रकम

कंपनी से जुड़ी महिला पुष्पा कवर ने बताया कि महीने में 3 बार दूध के पैसे बैंक खाते में आसानी से आ जाते हैं। एक से 10 तारीख तक की रकम 13 तारीख को बैंक खातों में आती है। 11 से 20 तक की रकम 23 तारीख को। वहीं 21 से 30 तक की रकम अगले महीने की 3 तारीख को बैंक के खाते में पहुंच जाती है जिससे परिवार का पालन-पोषण आसानी से होता है और बचत भी हो रही है।

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